गोलू साहू मारपीट मामला: राजद विधायकों ने डीजीपी से मिलकर मांगी सीआईडी जांच
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी नेता एज्या यादव ने 16 अक्टूबर 2026 को पटना में बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात कर समस्तीपुर में गोलू साहू के साथ हुई मारपीट और प्राथमिकी दर्ज न किए जाने का मामला उठाया। विधायकों के अनुसार डीजीपी ने इस प्रकरण की सीआईडी से जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
राजद नेता एज्या यादव के अनुसार, पुलिस जब गोलू साहू को हिरासत में लेने पहुंची, उसी दौरान जितेश मुखिया नामक व्यक्ति पुलिस की गाड़ी से उतरा और पुलिस की लाठी उठाकर गोलू साहू की पिटाई करने लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस की मौजूदगी में एक आम नागरिक को सरकारी लाठी से किसी दूसरे व्यक्ति की पिटाई करने का अधिकार कैसे मिल सकता है।
विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि भाजपा के मंडल नेता एवं प्रभारी जितेश कुमार सिन्हा ने गोलू साहू को दोनों हाथों में लाठी लेकर इतनी बुरी तरह पीटा कि वह बेहोश हो गए। पुलिस की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि गोलू साहू गाड़ी से उतरकर भाग रहे थे, लेकिन विधायकों ने इस दावे को खारिज किया।
प्राथमिकी न दर्ज होने पर सवाल
एज्या यादव ने बताया कि पहले पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर पर प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया गया, परंतु कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद दोनों विधायक सीधे डीजीपी से मिलने पटना पहुंचे। उन्होंने बताया कि डीजीपी ने जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने का भरोसा दिलाया है।
बेतिया मामला भी उठाया
मुलाकात के दौरान राजद विधायकों ने बेतिया में निषाद अंसारी के साथ हुई घटना का मुद्दा भी उठाया। भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में पुलिस के संरक्षण में पीड़ित की हत्या हुई। उन्होंने बताया कि डीजीपी ने बेतिया मामले में भी सीआईडी जांच कराने की बात कही है।
आगे क्या होगा
डीजीपी के आश्वासन के बाद राजद विधायकों ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। गोलू साहू मामले में सीआईडी जांच शुरू होने पर जितेश कुमार सिन्हा समेत अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच होगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बिहार में पुलिस की कार्यप्रणाली और राजनीतिक पहुंच के बीच संबंध को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।