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झारखंड पुलिस एसोसिएशन का चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, विधायक जयराम महतो की गिरफ्तारी की मांग

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झारखंड पुलिस एसोसिएशन का चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, विधायक जयराम महतो की गिरफ्तारी की मांग

सारांश

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डुमरी विधायक जयराम महतो पर बरवाअड्डा थाने में पुलिसकर्मियों से कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। काले बिल्ले से शुरू होकर सामूहिक अवकाश तक — यह टकराव झारखंड में जनप्रतिनिधियों और पुलिस बल के बीच बढ़ते तनाव की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा।
22 अगस्त को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और अमर्यादित व्यवहार का आरोप; प्राथमिकी दर्ज होने के पाँच दिन बाद भी कार्रवाई नहीं।
आंदोलन का पहला चरण: 8 से 11 सितंबर तक वर्दी पर काला बिल्ला ; 19 सितंबर को सामूहिक उपवास।
24 सितंबर को एसपी और डीजीपी कार्यालयों के सामने धरना; 5 से 10 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश का ऐलान।
वेतन भत्ते, शिक्षा-स्वास्थ्य भत्ते, तबादला नीति और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर कड़े कानून की भी मांग।

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। 22 अगस्त को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और अमर्यादित व्यवहार के आरोपों के बाद एसोसिएशन ने यह कदम उठाया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

एसोसिएशन के अनुसार, 22 अगस्त को कांड संख्या 146/26 के सिलसिले में बरवाअड्डा थाना परिसर में विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और एक आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। एसोसिएशन का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के पाँच दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद सोशल मीडिया और प्रेस के ज़रिये पुलिस एसोसिएशन को कथित तौर पर धमकाया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच तनाव की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं।

आंदोलन का रोडमैप

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू और महामंत्री संजीव कुमार ने मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में चरणबद्ध कार्यक्रम की घोषणा की।

8 से 11 सितंबर तक पुलिसकर्मी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करेंगे। 19 सितंबर को सामूहिक उपवास रखा जाएगा और इस दौरान थानों, ओपी तथा पुलिस मेस में खाना नहीं बनाया जाएगा। 24 सितंबर को एसपी कार्यालयों के सामने धरना दिया जाएगा, जबकि केंद्रीय पदाधिकारी डीजीपी कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे। इसके बाद 5 से 10 अक्टूबर तक पुलिसकर्मी सामूहिक अवकाश पर जाएंगे — जो आंदोलन का सबसे तीखा चरण होगा।

अन्य प्रमुख मांगें

गिरफ्तारी की मांग के अलावा एसोसिएशन ने वर्दी और राशन भत्ते में बढ़ोतरी, सातवें वेतनमान के अनुसार विभिन्न भत्तों के पुनरीक्षण और केंद्रीय पुलिस की तर्ज पर दो बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता देने की माँग की है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य भत्ते में बढ़ोतरी, लंबे समय से एक ही जिले में तैनात पुलिसकर्मियों का तबादला, समय पर पदोन्नति और जनप्रतिनिधियों द्वारा पुलिस कार्य में कथित अनैतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की माँग भी की गई है।

आम जनता और व्यवस्था पर असर

यदि 5 से 10 अक्टूबर का सामूहिक अवकाश वास्तव में लागू हुआ, तो झारखंड भर के थानों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस का सामूहिक अवकाश कानून-व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, हालाँकि एसोसिएशन ने इसे अंतिम विकल्प बताया है।

आगे क्या

सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आंदोलन का पहला चरण 8 सितंबर से शुरू होना है, जो सरकार को माँगों पर निर्णय लेने के लिए सीमित समय देता है। विधायक जयराम कुमार महतो की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सामूहिक अवकाश जैसा कदम कानून-व्यवस्था को जोखिम में डाल सकता है, जिसकी सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक चुकाएंगे। सरकार की चुप्पी इस संकट को और गहरा कर रही है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने आंदोलन क्यों शुरू किया?
एसोसिएशन ने आंदोलन का ऐलान इसलिए किया क्योंकि 22 अगस्त को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की और अमर्यादित व्यवहार का आरोप है। प्राथमिकी दर्ज होने के पाँच दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गिरफ्तारी की मांग की।
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के आंदोलन के चरण क्या हैं?
पहले चरण में 8 से 11 सितंबर तक वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी होगी। 19 सितंबर को सामूहिक उपवास, 24 सितंबर को एसपी और डीजीपी कार्यालयों के सामने धरना, और 5 से 10 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
बरवाअड्डा थाना विवाद में क्या हुआ था?
एसोसिएशन के अनुसार, 22 अगस्त को कांड संख्या 146/26 के सिलसिले में बरवाअड्डा थाना परिसर में विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और एक आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। इसके बाद सोशल मीडिया और प्रेस के जरिये पुलिस एसोसिएशन को कथित तौर पर धमकाया भी गया।
पुलिस एसोसिएशन ने और कौन-सी मांगें रखी हैं?
गिरफ्तारी के अलावा एसोसिएशन ने वर्दी और राशन भत्ते में बढ़ोतरी, सातवें वेतनमान के अनुसार भत्तों का पुनरीक्षण, दो बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता, स्वास्थ्य भत्ते में वृद्धि, लंबे समय से एक ही जिले में तैनात कर्मियों का तबादला, समय पर पदोन्नति और जनप्रतिनिधियों के कथित अनैतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए कड़े कानून की माँग की है।
इस आंदोलन का झारखंड की कानून-व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि 5 से 10 अक्टूबर का सामूहिक अवकाश लागू हुआ तो राज्यभर के थानों में कामकाज बाधित हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा और आम नागरिकों को सबसे अधिक परेशानी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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