झारखंड पुलिस एसोसिएशन का चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, विधायक जयराम महतो की गिरफ्तारी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। 22 अगस्त को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और अमर्यादित व्यवहार के आरोपों के बाद एसोसिएशन ने यह कदम उठाया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
एसोसिएशन के अनुसार, 22 अगस्त को कांड संख्या 146/26 के सिलसिले में बरवाअड्डा थाना परिसर में विधायक जयराम कुमार महतो और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और एक आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। एसोसिएशन का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के पाँच दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद सोशल मीडिया और प्रेस के ज़रिये पुलिस एसोसिएशन को कथित तौर पर धमकाया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच तनाव की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं।
आंदोलन का रोडमैप
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू और महामंत्री संजीव कुमार ने मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में चरणबद्ध कार्यक्रम की घोषणा की।
8 से 11 सितंबर तक पुलिसकर्मी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करेंगे। 19 सितंबर को सामूहिक उपवास रखा जाएगा और इस दौरान थानों, ओपी तथा पुलिस मेस में खाना नहीं बनाया जाएगा। 24 सितंबर को एसपी कार्यालयों के सामने धरना दिया जाएगा, जबकि केंद्रीय पदाधिकारी डीजीपी कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे। इसके बाद 5 से 10 अक्टूबर तक पुलिसकर्मी सामूहिक अवकाश पर जाएंगे — जो आंदोलन का सबसे तीखा चरण होगा।
अन्य प्रमुख मांगें
गिरफ्तारी की मांग के अलावा एसोसिएशन ने वर्दी और राशन भत्ते में बढ़ोतरी, सातवें वेतनमान के अनुसार विभिन्न भत्तों के पुनरीक्षण और केंद्रीय पुलिस की तर्ज पर दो बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता देने की माँग की है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य भत्ते में बढ़ोतरी, लंबे समय से एक ही जिले में तैनात पुलिसकर्मियों का तबादला, समय पर पदोन्नति और जनप्रतिनिधियों द्वारा पुलिस कार्य में कथित अनैतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की माँग भी की गई है।
आम जनता और व्यवस्था पर असर
यदि 5 से 10 अक्टूबर का सामूहिक अवकाश वास्तव में लागू हुआ, तो झारखंड भर के थानों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस का सामूहिक अवकाश कानून-व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, हालाँकि एसोसिएशन ने इसे अंतिम विकल्प बताया है।
आगे क्या
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आंदोलन का पहला चरण 8 सितंबर से शुरू होना है, जो सरकार को माँगों पर निर्णय लेने के लिए सीमित समय देता है। विधायक जयराम कुमार महतो की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।