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बाबूलाल मरांडी का तीखा सवाल: जयराम महतो वायरल ऑडियो विवाद में पुलिस एसोसिएशन और झारखंड सरकार कठघरे में

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बाबूलाल मरांडी का तीखा सवाल: जयराम महतो वायरल ऑडियो विवाद में पुलिस एसोसिएशन और झारखंड सरकार कठघरे में

सारांश

डुमरी विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के वायरल ऑडियो विवाद ने झारखंड में राजनीतिक हलचल मचा दी है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन और राज्य सरकार से सीधे पूछा — शिष्टाचार का नियम सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए क्यों, पुलिस के लिए क्यों नहीं?

मुख्य बातें

डुमरी विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित गाली-गलौज वाला व्हाट्सएप कॉल ऑडियो वायरल हुआ।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन और झारखंड सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
मरांडी ने बिना सहमति के ऑडियो रिकॉर्ड कर वायरल करने को निजता के अधिकार का हनन और आपराधिक कृत्य बताया।
बोकारो के चास थाना प्रभारी के पुराने वायरल ऑडियो मामले में भी सरकार पर संरक्षण देने का आरोप लगाया।
पुलिस एसोसिएशन ने विधायक पर कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी; विधायक ने ऑडियो को एडिटेड बताया।
मरांडी ने माँग की कि सरकार केवल निलंबन नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर सुनिश्चित करे।

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डुमरी विधायक जयराम महतो और धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित गाली-गलौज और वायरल ऑडियो विवाद पर राज्य सरकार तथा पुलिस एसोसिएशन को सीधे कठघरे में खड़ा किया है। मरांडी ने पूछा कि भाषा और शिष्टाचार की मर्यादा का नियम क्या केवल जनप्रतिनिधियों पर लागू होता है — पुलिसकर्मियों पर नहीं?

मुख्य घटनाक्रम

विवाद की जड़ बरवाअड्डा थाने में फर्जी मुहर से प्रमाण पत्र बनाने का मामला है। इसी विवाद के बाद विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच हुई कथित व्हाट्सएप कॉल का ऑडियो वायरल हो गया। इस ऑडियो में दोनों पक्षों के बीच कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग सुना गया। इसके बाद पुलिस एसोसिएशन ने विधायक पर कार्रवाई न होने की स्थिति में कार्य बहिष्कार की चेतावनी दे दी। वहीं विधायक महतो ने ऑडियो को एडिटेड बताते हुए निजता के हनन का मामला दर्ज कराने की बात कही है।

मरांडी के तीखे सवाल

मरांडी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच भाषा व शिष्टाचार की मर्यादा बनाए रखना निस्संदेह आवश्यक है। लेकिन उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी आम जनता के साथ गाली-गलौज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एसोसिएशन ने कभी किसी 'अभद्र व्यवहार करने वाले दारोगा' की निंदा की या उसे आम नागरिकों के साथ सभ्यता से पेश आने की नसीहत दी?

मरांडी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के कानूनी पहलू पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'क्या पुलिस को यह नहीं पता कि किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उससे की गई बातचीत को रिकॉर्ड करके वायरल करना उसकी निजता के अधिकार का हनन और एक आपराधिक कृत्य है? क्या निजता के हनन से जुड़े कानून सिर्फ आम लोगों के लिए बने हैं, पुलिस अधिकारियों के लिए नहीं?'

पुराने मामलों का संदर्भ

मरांडी ने बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी के कुछ महीने पहले वायरल हुए गाली-गलौज वाले ऑडियो का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी उन्होंने सरकार से एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की माँग की थी, लेकिन सरकार ने कार्रवाई करने के बजाय ऐसे अधिकारियों को संरक्षण देने का काम किया। यह ऐसे समय में आया है जब थानों में आम जनता के साथ अभद्र भाषा और दुर्व्यवहार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

सरकार की कार्यशैली पर निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति के लिए झारखंड सरकार की नीतियाँ और उसका ढुलमुल रवैया जिम्मेदार है। उन्होंने माँग की कि सरकार ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित न रहे, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करे।

आगे क्या

मरांडी का कहना है कि पुलिस को सबसे पहले आम जनता से बात करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा। गौरतलब है कि पुलिस एसोसिएशन की कार्य बहिष्कार की चेतावनी और विधायक की निजता हनन की शिकायत — दोनों मामले अभी लंबित हैं। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और उसके बाद की कार्रवाई यह तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आम नागरिकों के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार पर उसकी चुप्पी क्यों? बोकारो के चास थाने के पुराने मामले में सरकार की निष्क्रियता यह दर्शाती है कि संरक्षण की संस्कृति गहरी जड़ें जमा चुकी है। जब तक निलंबन से आगे बढ़कर एफआईआर और पारदर्शी जाँच को नियम नहीं बनाया जाता, ऐसे विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सिमटते रहेंगे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम महतो वायरल ऑडियो विवाद क्या है?
यह विवाद धनबाद के बरवाअड्डा थाने में फर्जी मुहर से प्रमाण पत्र बनाने के मामले से शुरू हुआ, जिसके बाद डुमरी विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित गाली-गलौज वाला व्हाट्सएप कॉल ऑडियो वायरल हो गया। विधायक ने ऑडियो को एडिटेड बताया है और निजता हनन का मामला दर्ज कराने की बात कही है।
बाबूलाल मरांडी ने पुलिस एसोसिएशन से क्या सवाल पूछे?
मरांडी ने पूछा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी आम जनता के साथ गाली-गलौज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एसोसिएशन ने कभी किसी अभद्र व्यवहार करने वाले दारोगा की निंदा की है।
वायरल ऑडियो को रिकॉर्ड कर फैलाना कानूनी है?
मरांडी के अनुसार, किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उससे की गई बातचीत को रिकॉर्ड कर वायरल करना निजता के अधिकार का हनन और एक आपराधिक कृत्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि निजता से जुड़े कानून क्या पुलिस अधिकारियों पर लागू नहीं होते।
पुलिस एसोसिएशन ने क्या चेतावनी दी है?
पुलिस एसोसिएशन ने विधायक जयराम महतो पर कार्रवाई न होने की स्थिति में कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। यह चेतावनी ऑडियो वायरल होने के बाद दी गई।
झारखंड सरकार पर मरांडी ने क्या आरोप लगाए?
मरांडी ने आरोप लगाया कि बोकारो के चास थाना प्रभारी के पुराने वायरल ऑडियो मामले में भी सरकार ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय ऐसे अधिकारियों को संरक्षण दिया। उन्होंने माँग की कि सरकार केवल निलंबन तक सीमित न रहे, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
राष्ट्र प्रेस
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