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सोन नदी में डूबने की त्रासदी: सिद्धि के भंवरसेन घाट पर एक युवती की मौत, तीन लापता

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सोन नदी में डूबने की त्रासदी: सिद्धि के भंवरसेन घाट पर एक युवती की मौत, तीन लापता

सारांश

मध्य प्रदेश के सिद्धि जिले में सोन नदी एक बार फिर काल बनी — भंवरसेन घाट पर नहाने उतरे चार लोग तेज धारा में बह गए। एक युवती ज्योति सेन (24) का शव बरामद हुआ, जबकि सुभी सेन, नीलू बैस और लखन केवट अभी भी लापता हैं।

मुख्य बातें

15 जून 2026 को दोपहर 12:30–1 बजे के बीच सिद्धि जिले के भंवरसेन घाट पर सोन नदी में चार लोग बह गए।
मृतका की पहचान ज्योति सेन (24 वर्ष) , निवासी बुधा बौर गाँव, मैहर जिला , के रूप में हुई; शव लापता स्थान से आधा किलोमीटर नीचे मिला।
लापता तीन व्यक्ति: सुभी सेन (15) , नीलू बैस (22) और लखन केवट (26) ।
रामपुर नाइकिन पुलिस , खड्डी चौकी और स्थानीय प्रशासन का बचाव अभियान जारी।
तहसीलदार आशीष मिश्रा के अनुसार नदी का यह हिस्सा गहरे भंवरों और तेज धाराओं के लिए जाना जाता है।

मध्य प्रदेश के सिद्धि जिले के भंवरसेन घाट पर 15 जून 2026 को दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच सोन नदी में स्नान के दौरान तीन महिलाएँ और एक पुरुष तेज धारा में बह गए। बचाव अभियान के दौरान एक युवती का शव नदी से बरामद हुआ, जबकि शेष तीन लापता व्यक्तियों की तलाश देर शाम तक जारी रही।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

अधिकारियों के अनुसार, चारों व्यक्ति रामपुर नाइकिन पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भंवरसेन घाट पर नहाने उतरे थे। जानकारी के अनुसार, वे गहरे पानी और तेज धारा में फँसकर बह गए, जिससे घाट पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। अधिकारियों को संदेह है कि पीड़ित गहरे भंवर में फँस गए होंगे।

बचाव अभियान और शव की बरामदगी

सूचना मिलते ही रामपुर नाइकिन पुलिस थाना, खड्डी चौकी और स्थानीय प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुँचीं और तलाशी एवं बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय निवासियों ने भी खोज कार्य में सहयोग दिया। अभियान के दौरान लापता होने के स्थान से लगभग आधा किलोमीटर नीचे नदी से एक युवती का शव बरामद किया गया।

तहसीलदार आशीष मिश्रा ने बताया कि मृतका की पहचान ज्योति सेन (24 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मैहर जिले के रामनगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत बुधा बौर गाँव की निवासी थीं। उनके परिवार को सूचित कर दिया गया है।

लापता व्यक्तियों की पहचान

देर शाम तक लापता रहे तीन व्यक्तियों की पहचान सुभी सेन (15 वर्ष), नीलू बैस (22 वर्ष) और लखन केवट (26 वर्ष) के रूप में हुई है। तहसीलदार मिश्रा ने कहा कि उनका पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है और बचाव अभियान प्रशासन की देखरेख में जारी है।

नदी की खतरनाक प्रकृति

मिश्रा ने बताया कि सोन नदी का यह हिस्सा तेज धाराओं और गहरे भंवरों के लिए जाना जाता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि वे गहरे पानी में बह गए और समय रहते उन्हें बचाया नहीं जा सका। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चारों किन परिस्थितियों में भंवरसेन घाट पहुँचे और नदी में उतरे, इसकी जाँच की जा रही है।

आगे क्या

बचाव दल तीन लापता व्यक्तियों की खोज में नदी में छानबीन जारी रखे हुए है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर डटे हैं। गौरतलब है कि मानसून पूर्व की इस अवधि में नदियों में जलस्तर और धारा की तीव्रता बढ़ जाती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी सुरक्षा उपाय नदारद हैं। सवाल यह है कि चेतावनी संकेत, जीवन रक्षक उपकरण और निगरानी कर्मी क्यों नहीं तैनात थे। मानसून पूर्व की इस अवधि में जब नदियाँ उफान पर होती हैं, प्रशासन की निष्क्रियता इन मौतों को दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही की श्रेणी में रखती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोन नदी में डूबने की घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 15 जून 2026 को दोपहर 12:30 से 1 बजे के बीच मध्य प्रदेश के सिद्धि जिले के भंवरसेन घाट पर हुई, जो रामपुर नाइकिन पुलिस थाना क्षेत्र में आता है।
कितने लोग बहे और किसका शव मिला?
कुल चार लोग — तीन महिलाएँ और एक पुरुष — सोन नदी की तेज धारा में बह गए। बचाव अभियान के दौरान ज्योति सेन (24 वर्ष) का शव लापता स्थान से लगभग आधा किलोमीटर नीचे बरामद किया गया।
तीन लापता व्यक्ति कौन हैं?
लापता तीन व्यक्तियों की पहचान सुभी सेन (15 वर्ष), नीलू बैस (22 वर्ष) और लखन केवट (26 वर्ष) के रूप में हुई है। इनकी तलाश के लिए बचाव दल नदी में छानबीन कर रहा है।
बचाव अभियान में कौन-कौन शामिल है?
रामपुर नाइकिन पुलिस थाना, खड्डी चौकी और स्थानीय प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। स्थानीय निवासियों ने भी खोज कार्य में सहयोग दिया। तहसीलदार आशीष मिश्रा की देखरेख में अभियान जारी है।
सोन नदी का यह हिस्सा इतना खतरनाक क्यों है?
तहसीलदार आशीष मिश्रा के अनुसार सोन नदी का भंवरसेन घाट वाला हिस्सा तेज धाराओं और गहरे भंवरों के लिए जाना जाता है। अधिकारियों को संदेह है कि पीड़ित इन्हीं भंवरों में फँसकर बह गए।
राष्ट्र प्रेस
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