मुजफ्फरपुर में बया नदी में डूबे तीन किशोर, साहेबगंज में पसरा मातम; एनडीआरएफ की देरी पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शनिवार, 25 जुलाई को एक दर्दनाक हादसे में बया नदी में नहाने गए तीन किशोरों की डूबकर मौत हो गई, जबकि उनके साथ गया चौथा किशोर तैरकर जान बचाने में सफल रहा। घटना साहेबगंज नगर परिषद क्षेत्र स्थित बैद्यनाथपुर शिवालय मंदिर के सामने हुई।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, वार्ड संख्या-8 निवासी अमृत कुमार (14 वर्ष), साहिल उर्फ झुन्नू (12 वर्ष) और मोहम्मद रेहान (13 वर्ष) शनिवार दोपहर बया नदी में स्नान करने गए थे। इसी दौरान तीनों गहरे पानी में चले गए और डूब गए। उनके साथ मौजूद गुड्डू (13 वर्ष), जो मोहम्मद मुन्ना के पुत्र हैं, किसी तरह तैरकर सुरक्षित किनारे पर आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और खोज-बचाव अभियान शुरू किया। ग्रामीणों ने करीब तीन घंटे तक नदी में खोजबीन जारी रखी, जिसके बाद तीनों किशोरों के शव बाहर निकाले गए।
चिकित्सा और पुलिस की कार्रवाई
शवों को तत्काल साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने जाँच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। साहेबगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
एनडीआरएफ की देरी पर स्थानीय आक्रोश
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि समय पर सूचना देने के बावजूद एनडीआरएफ (NDRF) की टीम मौके पर नहीं पहुँची, जिससे शवों की तलाश और बचाव कार्य का पूरा बोझ ग्रामीणों के कंधों पर आ गया। यह आरोप आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आम जनता पर असर
इस हादसे के बाद साहेबगंज नगर परिषद के वार्ड संख्या-8 में गहरा शोक छा गया है। एक साथ तीन किशोरों की असामयिक मौत से तीनों परिवारों का बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम का माहौल है। गौरतलब है कि बिहार में मानसून के दौरान नदियों में डूबने की घटनाएँ हर वर्ष बड़ी संख्या में सामने आती हैं, और बच्चों व किशोरों में जागरूकता की कमी इन हादसों का प्रमुख कारण बनती है।
क्या होगा आगे
पुलिस मामले की जाँच कर रही है। एनडीआरएफ की देरी को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है और संभव है कि प्रशासन को इस पर स्पष्टीकरण देना पड़े। नदियों के किनारे सुरक्षा उपायों और चेतावनी संकेतों की माँग भी एक बार फिर उठ सकती है।