श्रीनगर में दशहरा 2026: कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय मिलकर मना रहे विजयादशमी
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर में विजयादशमी 2026 की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं, जहाँ कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग भी इस उत्सव में भागीदारी के लिए उत्साहित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह आयोजन कश्मीर में सांप्रदायिक सौहार्द और कौमी एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
कश्मीर का इकलौता दशहरा उत्सव
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेता मोहित भान ने बताया कि श्रीनगर में दशहरा मनाने की एक विशेष परंपरा है। उन्होंने कहा, 'पूरे कश्मीर क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह इकलौता दशहरा उत्सव है। पिछले चार वर्षों से हम इसे बहुत धूमधाम से मना रहे हैं। बीच में एक-दो साल तक यह आयोजन रुक गया था, लेकिन अब सभी समुदायों के लोग इसमें हिस्सा लेते हैं।' मंगलवार को विजयादशमी का पर्व है और इस अवसर पर श्रीनगर में विशेष आयोजन की व्यवस्था की जा रही है।
कश्मीरी पंडित समुदाय की भूमिका
कश्मीरी पंडित संदीप कौल ने बताया कि वे वर्ष 2007 से यह उत्सव मनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए आवश्यक सामग्री बाहर से मंगाई जाती है और व्यवस्थित की जाती है। कौल ने यह भी बताया कि दशहरे को लेकर कश्मीरी मुस्लिम भाइयों का लगातार समर्थन मिलता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश
मोहित भान ने कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना कश्मीर की कौमी एकता का प्रतीक है। उनके शब्दों में, 'नफरत और हिंसा के माहौल का जवाब आपसी सद्भाव, भाईचारे और एकजुटता से दिया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सामाजिक ताने-बाने को मज़बूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व
संदीप कौल ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी विश्वास के साथ यह त्योहार मनाया जाता है कि समाज से बुराइयाँ समाप्त हों और लोगों के बीच प्रेम, शांति तथा सद्भाव बना रहे। गौरतलब है कि श्रीनगर में दशहरा आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने का मंच भी है।
आगे क्या
मंगलवार को होने वाले इस विजयादशमी आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। कश्मीरी पंडित समुदाय और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस उत्सव को यादगार बनाने की तैयारी में हैं, और यह आयोजन घाटी में एकता की एक नई मिसाल पेश कर सकता है।