19 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

श्रीनगर में दशहरा 2026: कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय मिलकर मना रहे विजयादशमी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
श्रीनगर में दशहरा 2026: कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय मिलकर मना रहे विजयादशमी

सारांश

श्रीनगर में दशहरा अब सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं — यह कश्मीर की बदलती तस्वीर का आईना है। कश्मीरी पंडित संदीप कौल 2007 से यह उत्सव मना रहे हैं और PDP नेता मोहित भान कहते हैं कि नफरत का जवाब सद्भाव से देना ही असली कश्मीरियत है।

मुख्य बातें

श्रीनगर में मंगलवार 21 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी का आयोजन होगा, जिसमें कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय दोनों शामिल होंगे।
कश्मीरी पंडित संदीप कौल ने बताया कि वे वर्ष 2007 से श्रीनगर में दशहरा मनाते आ रहे हैं।
PDP नेता मोहित भान ने इसे पूरे कश्मीर क्षेत्र का इकलौता दशहरा उत्सव बताया।
पिछले चार वर्षों से यह आयोजन निरंतर और धूमधाम से होता आ रहा है; बीच में एक-दो वर्ष के लिए रुका था।
आयोजन को कश्मीरी मुस्लिम समुदाय का लगातार समर्थन मिल रहा है, जो सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है।

श्रीनगर में विजयादशमी 2026 की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं, जहाँ कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग भी इस उत्सव में भागीदारी के लिए उत्साहित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह आयोजन कश्मीर में सांप्रदायिक सौहार्द और कौमी एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

कश्मीर का इकलौता दशहरा उत्सव

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेता मोहित भान ने बताया कि श्रीनगर में दशहरा मनाने की एक विशेष परंपरा है। उन्होंने कहा, 'पूरे कश्मीर क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह इकलौता दशहरा उत्सव है। पिछले चार वर्षों से हम इसे बहुत धूमधाम से मना रहे हैं। बीच में एक-दो साल तक यह आयोजन रुक गया था, लेकिन अब सभी समुदायों के लोग इसमें हिस्सा लेते हैं।' मंगलवार को विजयादशमी का पर्व है और इस अवसर पर श्रीनगर में विशेष आयोजन की व्यवस्था की जा रही है।

कश्मीरी पंडित समुदाय की भूमिका

कश्मीरी पंडित संदीप कौल ने बताया कि वे वर्ष 2007 से यह उत्सव मनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए आवश्यक सामग्री बाहर से मंगाई जाती है और व्यवस्थित की जाती है। कौल ने यह भी बताया कि दशहरे को लेकर कश्मीरी मुस्लिम भाइयों का लगातार समर्थन मिलता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे।

सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश

मोहित भान ने कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना कश्मीर की कौमी एकता का प्रतीक है। उनके शब्दों में, 'नफरत और हिंसा के माहौल का जवाब आपसी सद्भाव, भाईचारे और एकजुटता से दिया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सामाजिक ताने-बाने को मज़बूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व

संदीप कौल ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी विश्वास के साथ यह त्योहार मनाया जाता है कि समाज से बुराइयाँ समाप्त हों और लोगों के बीच प्रेम, शांति तथा सद्भाव बना रहे। गौरतलब है कि श्रीनगर में दशहरा आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने का मंच भी है।

आगे क्या

मंगलवार को होने वाले इस विजयादशमी आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। कश्मीरी पंडित समुदाय और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस उत्सव को यादगार बनाने की तैयारी में हैं, और यह आयोजन घाटी में एकता की एक नई मिसाल पेश कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जम्मू-कश्मीर में सामाजिक पुनर्निर्माण की धीमी लेकिन ठोस प्रक्रिया का प्रतिबिंब है। 2007 से चले आ रहे इस उत्सव का तथ्य बताता है कि कश्मीरी पंडित समुदाय ने घाटी में अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति को पूरी तरह नहीं छोड़ा। हालाँकि मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल संघर्ष और राजनीति पर केंद्रित रहती है, ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि ज़मीनी स्तर पर एकता की कोशिशें हमेशा जारी रही हैं। असली कसौटी यह है कि क्या इस सद्भाव को संस्थागत समर्थन और नीतिगत निरंतरता मिलती है, या यह कुछ समर्पित व्यक्तियों के उत्साह पर ही टिका रहता है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में दशहरा कब से मनाया जा रहा है?
कश्मीरी पंडित संदीप कौल के अनुसार, श्रीनगर में दशहरा वर्ष 2007 से मनाया जा रहा है। बीच में एक-दो वर्षों के लिए आयोजन रुका था, लेकिन पिछले चार वर्षों से यह लगातार और धूमधाम से हो रहा है।
श्रीनगर के दशहरे में कौन-कौन से समुदाय शामिल होते हैं?
इस उत्सव में कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग भी भाग लेते हैं। संदीप कौल ने बताया कि कश्मीरी मुस्लिम भाइयों का इस आयोजन को लगातार समर्थन मिलता रहा है।
PDP नेता मोहित भान ने दशहरे के बारे में क्या कहा?
PDP नेता मोहित भान ने कहा कि यह पूरे कश्मीर क्षेत्र में होने वाला इकलौता दशहरा उत्सव है। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होना कश्मीर की कौमी एकता का प्रतीक है और नफरत का जवाब सद्भाव व भाईचारे से देना चाहिए।
श्रीनगर दशहरा 2026 का क्या महत्व है?
यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास और एकता को मज़बूत करने का अवसर है। संदीप कौल के अनुसार, दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।
दशहरे की तैयारियाँ कैसे की जाती हैं?
संदीप कौल ने बताया कि उत्सव के लिए आवश्यक सामग्री बाहर से मंगाई जाती है और आयोजन से पहले उसे व्यवस्थित किया जाता है। स्थानीय समुदाय मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले