7 अक्टूबर 2026
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दंतेवाड़ा माओवादी हमले की 15वीं बरसी: एसएसबी ने चार शहीद जवानों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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दंतेवाड़ा माओवादी हमले की 15वीं बरसी: एसएसबी ने चार शहीद जवानों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सारांश

15 साल बाद भी वे भुलाए नहीं गए। दंतेवाड़ा के बाघमुंडी में 2011 के आईईडी हमले में शहीद हुए एसएसबी के चार जवानों को आज रानीडांगा में श्रद्धांजलि दी गई। गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2015-2021 के बीच 72 से अधिक एसएसबी जवान नक्सल कार्रवाइयों में शहीद हुए — एक बलिदान जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहता है।

मुख्य बातें

7 अक्टूबर 2011 को दंतेवाड़ा के बाघमुंडी में माओवादियों के आईईडी हमले में 41वीं बटालियन एसएसबी के चार जवान शहीद हुए थे।
शहीद जवानों के नाम: हेड कांस्टेबल धर्मेश्वर नाथ और कांस्टेबल दिलेश चतुरोली , थाझकुनियिल , प्रवीण पी , विवेक कुमार ।
रानीडांगा मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा, आईजी वंदन सक्सेना समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
एसएसबी महानिदेशक संजय सिंघल ने संदेश के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
गृह मंत्रालय के अनुसार 2015-17 के बीच 48 और 2019-21 के बीच 24 एसएसबी जवान कार्रवाई में शहीद हुए।

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने 7 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 15 साल पहले हुए माओवादी आईईडी हमले में शहीद हुए अपने चार जवानों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। पश्चिम बंगाल के रानीडांगा स्थित 41वीं बटालियन एसएसबी के मुख्यालय में आयोजित इस शोक सभा में वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखा।

घटनाक्रम: 7 अक्टूबर 2011 की वह काली शाम

7 अक्टूबर 2011 को 41वीं बटालियन एसएसबी के हेड कांस्टेबल धर्मेश्वर नाथ और कांस्टेबल दिलेश चतुरोली, थाझकुनियिल, प्रवीण पी तथा विवेक कुमार एक सफल नक्सल विरोधी अभियान के बाद शिविर लौट रहे थे। दंतेवाड़ा के बाघमुंडी क्षेत्र में माओवादी विद्रोहियों ने घात लगाकर उनके वाहन को इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से उड़ा दिया। चारों जवान मौके पर ही वीरगति को प्राप्त हुए।

गौरतलब है कि यह हमला उस दौर में हुआ जब छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी हिंसा अपने चरम पर थी। सुरक्षाबलों पर घात लगाकर किए जाने वाले आईईडी हमले उस समय लाल गलियारे में तैनात जवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके थे।

श्रद्धांजलि समारोह का विवरण

रानीडांगा मुख्यालय में आयोजित शोक सभा में शस्त्रों को पलटने और दो मिनट के मौन का कार्यक्रम हुआ। सिलीगुड़ी स्थित फ्रंटियर हेडक्वार्टर के आईजी वंदन सक्सेना ने शहीद जवानों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

समारोह में डीआईजी एकेसी सिंह (फ्रंटियर हेडक्वार्टर, सिलीगुड़ी), डीआईजी एस के सारंगी एवं डीआईजी राजीव राणा (सेक्टर हेडक्वार्टर, रानीडांगा), शिव दयाल, ममता अग्रवाल और 41वीं बटालियन एसएसबी के कमांडेंट विकास कुमार उपस्थित रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों के संदेश

आईजी वंदन सक्सेना ने कहा, 'देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन वीर जवानों के हम सदा ऋणी रहेंगे। उनका बलिदान न केवल हमारे लिए एक स्मृति है, बल्कि राष्ट्र की सेवा करते समय साहस, जिम्मेदारी और अनुशासन प्रदर्शित करने की प्रेरणा भी है।'

एसएसबी महानिदेशक संजय सिंघल ने भी एक संदेश के माध्यम से चारों शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उनके संदेश में कहा गया कि जवानों ने 'अद्वितीय साहस, कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण और राष्ट्रीय सेवा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत किया।' संदेश का समापन 'वीर जवानों को सौ सलाम' से हुआ।

एसएसबी और नक्सल विरोधी अभियानों में बलिदान

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2015 से 2017 के बीच 48 एसएसबी जवान कार्रवाई में शहीद हुए, जिनमें से दो 2017-18 में वीरगति को प्राप्त हुए। 2019 और 2021 के बीच कार्रवाई में शहीद हुए एसएसबी कर्मियों की संख्या 24 रही। ये आंकड़े बताते हैं कि लाल गलियारे में सुरक्षाबलों की कुर्बानी का सिलसिला लंबे समय से जारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में माओवाद के खिलाफ अभियान को और तेज करने की घोषणा कर चुकी है। इन बलिदानों की स्मृति न केवल एसएसबी के भीतर मनोबल बनाए रखने का माध्यम है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा में सुरक्षाबलों की अदृश्य कुर्बानी की याद भी दिलाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उतना ही ज़रूरी है कि क्या आंतरिक सुरक्षा में जान गँवाने वाले जवानों को वह राष्ट्रीय स्मृति मिलती है जिसके वे हकदार हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2015-2021 के बीच सत्तर से अधिक एसएसबी जवान नक्सल अभियानों में शहीद हुए — यह संख्या उस बलिदान की गहराई दिखाती है जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिए पर रहती है। दंतेवाड़ा के बाघमुंडी का वह हमला याद दिलाता है कि लाल गलियारे में 'सफल अभियान के बाद' भी जवान सुरक्षित नहीं थे — घर लौटते वक्त का रास्ता भी घात का मैदान था। इन बलिदानों को वार्षिक समारोहों से आगे नीतिगत स्मृति में भी स्थान मिलना चाहिए।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

7 अक्टूबर 2011 के दंतेवाड़ा एसएसबी हमले में क्या हुआ था?
7 अक्टूबर 2011 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बाघमुंडी में माओवादी विद्रोहियों ने नक्सल विरोधी अभियान से लौट रहे 41वीं बटालियन एसएसबी के वाहन को आईईडी से उड़ा दिया। हेड कांस्टेबल धर्मेश्वर नाथ और कांस्टेबल दिलेश चतुरोली, थाझकुनियिल, प्रवीण पी तथा विवेक कुमार — चारों जवान मौके पर ही शहीद हो गए।
एसएसबी ने 15वीं बरसी पर श्रद्धांजलि कहाँ और कैसे दी?
पश्चिम बंगाल के रानीडांगा स्थित 41वीं बटालियन एसएसबी मुख्यालय में शोक सभा आयोजित की गई। आईजी वंदन सक्सेना समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, शस्त्रों को पलटा गया और दो मिनट का मौन रखा गया।
एसएसबी महानिदेशक ने शहीदों के बारे में क्या कहा?
एसएसबी महानिदेशक संजय सिंघल ने एक संदेश में कहा कि चारों जवानों ने अद्वितीय साहस और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने शहीदों को 'वीर जवानों को सौ सलाम' कहते हुए श्रद्धांजलि दी।
नक्सल अभियानों में एसएसबी के कितने जवान शहीद हुए हैं?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2015 से 2017 के बीच 48 एसएसबी जवान कार्रवाई में शहीद हुए, जिनमें दो 2017-18 में थे। 2019 से 2021 के बीच 24 एसएसबी कर्मी कार्रवाई में शहीद हुए।
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की भूमिका क्या है?
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) भारत का एक अर्धसैनिक बल है जो मुख्यतः भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा अभियानों में भी तैनात किया जाता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एसएसबी की बटालियनें नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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