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क्या सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी की गिरफ्तारी हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है?

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क्या सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी की गिरफ्तारी हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है?

सारांश

चंडीगढ़ में सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी की गिरफ्तारी पर उठे विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। क्या यह वास्तव में हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है? जानिए पूरी कहानी।

मुख्य बातें

पुलिस रिमांड पर रोक का आदेश दिया गया।
हाईकोर्ट का आदेश उल्लंघन का मामला।
राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका।
कानून के राज की रक्षा का महत्व।
महिला नेताओं के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता।

चंडीगढ़, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को यह बयान दिया कि हाल ही में संपन्न विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की तरनतारन उम्मीदवार सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी कंचनप्रीत कौर की गिरफ्तारी हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

उन्होंने कोर्ट का आभार व्यक्त किया कि उसने हस्तक्षेप किया और ट्रायल कोर्ट में सुनवाई होने तक मामले में किसी भी पुलिस रिमांड पर रोक लगा दी।

शिरोमणि अकाली दल के लीगल सेल हेड अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, डीजीपी और शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, क्योंकि हाईकोर्ट ने कंचनप्रीत को चार मामलों में अंतरिम जमानत दी थी, जिसमें उसके खिलाफ दर्ज एक और मामले में गैर-जमानती अपराध भी शामिल थे।

उन्होंने एक बयान में कहा, "यह स्पष्ट है कि आप सरकार ने बदले की कार्रवाई में पुलिस को कंचनप्रीत को गिरफ्तार करने के लिए मजबूर किया है।" उन्होंने कहा कि सरकार कंचनप्रीत के खिलाफ झूठी कहानी बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि असल बात यह है कि उपचुनाव से पहले उनके खिलाफ कोई क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया गया था।

अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों ने उनके खिलाफ झूठे केस दर्ज किए और अब बिना नियमों का पालन किए उन्हें गिरफ्तार किया है, वे स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी कार्यों के लिए जिम्मेदार होंगे। एसएडी नेता ने कहा कि उन्होंने शनिवार को हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए गए थे कि कंचनप्रीत के वकील के कोर्ट पहुंचने तक मामले में कोई रिमांड न दिया जाए। इसके अनुसार, ट्रायल कोर्ट तय करेगा कि बेलेबल एफआईआर में जोड़ा गया नॉन-बेलेबल अपराध सही था या नहीं।

इस बीच, अकाली दल ने कहा कि एक युवा महिला नेता पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर सरकार ने दिखा दिया है कि उसे पंजाब की बेटियों या कानून के राज की कोई इज्जत नहीं है। सीनियर नेता दलजीत सिंह चीमा ने सभी डेमोक्रेटिक, सामाजिक और महिला संगठनों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने और सत्ता के इस घिनौने दुरुपयोग की निंदा करने की अपील की।

उन्होंने कहा, “इस बुराई को शुरू में ही खत्म कर देना चाहिए। हमारे महान गुरुओं की पवित्र धरती पर ऐसे गैर-संवैधानिक कार्यों को जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पंजाब की राजनीति में गहरे राजनीतिक द्वंद्व को भी उजागर करता है। न्यायपालिका के आदेशों के पालन की अनिवार्यता पर जोर देना आवश्यक है, जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत रहे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कंचनप्रीत कौर की गिरफ्तारी सही है?
अकाली दल के अनुसार, यह हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
हाईकोर्ट ने कंचनप्रीत को चार मामलों में अंतरिम जमानत दी थी।
सरकार पर क्या आरोप हैं?
सरकार पर आरोप है कि उसने पुलिस को बदले की कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
राष्ट्र प्रेस
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