सोम प्रदोष: शिव-गौरी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ अवसर, जानें शुभ और अशुभ समय

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सोम प्रदोष: शिव-गौरी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ अवसर, जानें शुभ और अशुभ समय

सारांश

16 मार्च को मनाया जाने वाला सोम प्रदोष व्रत, शिव-गौरी की आराधना का सर्वोत्तम दिन है। इस दिन व्रत करने से मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली प्राप्त होती है। जानें इस दिन के शुभ और अशुभ समय।

Key Takeaways

  • सोम प्रदोष व्रत का आयोजन हर चंद्र महीने की त्रयोदशी पर होता है।
  • यह व्रत भगवान शिव को प्रिय है।
  • इस दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
  • सोम प्रदोष व्रत से मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली मिलती है।
  • इस दिन का उचित समय पूजा और व्रत के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महादेव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित प्रदोष व्रत 16 मार्च को मनाया जाएगा। सोमवार का दिन, जिसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, शिव-गौरी की आराधना का सबसे शुभ दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार, इस व्रत के फलस्वरूप भक्तों को मानसिक शांति, वैवाहिक सुख, पारिवारिक खुशहाली और चंद्रमा से संबंधित दोषों का निवारण प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत हर चंद्र महीने में दो बार मनाया जाता है: एक बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर और दूसरी बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर। व्रत को तब रखा जाता है, जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) मौजूद होती है। प्रदोष काल शाम को सूर्य ढलने के साथ प्रारंभ होता है। जब त्रयोदशी और प्रदोष काल मिलते हैं, तो यह समय भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

जब प्रदोष सोमवार को आता है, तो इसे सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसके द्वारा मानसिक शांति, सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार में खुशहाली और चंद्रमा से जुड़े कुंडली के दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस प्रकार, सोम प्रदोष का व्रत रखने से मन की शांति और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

दृक पंचांग के अनुसार, 16 मार्च को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 9:40 बजे से प्रारंभ होकर 17 मार्च सुबह 9:23 बजे तक होगी। प्रदोष काल 16 मार्च की शाम को इस तिथि में उपस्थित होने के कारण व्रत और पूजा इसी दिन की जाएगी। सोमवार का सूर्योदय सुबह 6:30 बजे और सूर्यास्त शाम 6:30 बजे होगा।

सोमवार के शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:27 बजे से 6:52 बजे तक, अमृत काल शाम 7:47 बजे से 9:24 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:54 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक रहेगा।

अशुभ समय में पूजा या महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए। सोमवार को राहुकाल सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे तक, यमगंड सुबह 11:00 बजे से 12:30 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12:54 बजे से 1:42 बजे तक रहेगा।

Point of View

जो भक्तों को मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली के साथ-साथ चंद्रमा से जुड़े दोषों के निवारण का अवसर प्रदान करता है। इस दिन की पूजा विधि और समय का ज्ञान होना आवश्यक है।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

सोम प्रदोष व्रत क्यों किया जाता है?
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए किया जाता है, जिससे भक्तों को मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलता है।
सोम प्रदोष कब मनाया जाता है?
सोम प्रदोष हर चंद्र महीने की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है, विशेषकर जब यह सोमवार को आता है।
इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है?
सोम प्रदोष के शुभ मुहूर्त में गोधूलि मुहूर्त, अमृत काल, अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त शामिल हैं।
क्या इस दिन पूजा करने का कोई अशुभ समय होता है?
जी हां, सोम प्रदोष पर राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त जैसे अशुभ समय होते हैं, जिनमें पूजा से बचना चाहिए।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?
इस व्रत का महत्व मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और पारिवारिक समृद्धि प्राप्त करना है।
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