17 मार्च का पंचांग: मंगलवार को मासिक शिवरात्रि, अमृतकाल रात में, भद्रा का समय जानें
सारांश
Key Takeaways
- 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि है।
- अमृतकाल पूजा के लिए सर्वोत्तम है।
- भद्रा का समय सुबह 9:23 से शाम 8:59 बजे तक है।
- अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
- सही मुहूर्त से पूजा का फल बढ़ता है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का महत्व समझने के बाद ही शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। मंगलवार, 17 मार्च को महादेव और माता पार्वती की उपासना के लिए समर्पित मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। यह दिन महादेव की पूजा के लिए बेहद विशेष माना जाता है।
इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस दिन कई महत्वपूर्ण योग और समय भी हैं, जो पूजा और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माने जाते हैं।
दृक पंचांग के अनुसार, 17 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:29 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 6:30 बजे होगा। तिथि के अनुसार, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी सुबह 9:23 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी, जिसे मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। नक्षत्र शतभिषा रहेगा, जो अगले दिन सुबह 6:09 बजे तक प्रभावी रहेगा, फिर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग सिद्ध सुबह 8:15 बजे तक रहेगा, इसके बाद साध्य योग का आरंभ होगा जो अगले दिन सुबह 6:22 बजे तक चलेगा। करण वणिज सुबह 9:23 बजे तक प्रभावी रहेगा, फिर विष्टि करण शाम 8:59 बजे तक रहेगा।
शुभ मुहूर्त के बारे में बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:53 बजे से 5:41 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:54 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:28 बजे से 6:52 बजे तक रहेगा। सबसे महत्वपूर्ण अमृतकाल रात 11:01 बजे से देर रात 12:36 बजे तक रहेगा, जो पूजा और जप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3:30 बजे से 5:00 बजे तक, यमगंड सुबह 9:29 बजे से 10:59 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे तक रहेगा। भद्रा सुबह 9:23 बजे से शाम 8:59 बजे तक और पञ्चक पूरे दिन प्रभावी रहेगा। आडल योग भी पूरे दिन रहेगा।