क्या माघ माह की चतुर्दशी तिथि, मासिक शिवरात्रि पर शिव-गौरी की पूजा करना शुभ है?
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म में पूजा-पाठ या किसी सामान्य कार्यक्रम में पंचांग का महत्व अत्यधिक होता है। इसी के आधार पर किसी भी कार्य का निर्धारण किया जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का आयोजन किया जाता है। इस बार माघ मास की शिवरात्रि 17 जनवरी को मनाई जाएगी।
महादेव और मां पार्वती की पूजा का यह खास दिन है। दृक पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 18 जनवरी की रात 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। इस दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 17 जनवरी, शनिवार को की जाएगी, क्योंकि निशिता काल (मध्य रात्रि का सबसे शुभ समय) इसी दिन है।
इस दिन भक्तों को शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद से अभिषेक करना चाहिए और फिर इत्र लगाना चाहिए। इसके बाद भगवान को बेलपत्र, धतूरा, फूल-फल, भांग, अबीर-बुक्का, मेहंदी आदि चढ़ाने चाहिए। वहीं, मां गौरी को 16 श्रृंगार की वस्त्र चढ़ाकर उनका शृंगार कर मीठा भोग लगाना चाहिए। इसके बाद 'गौरी केदारेश्वराभ्यां नम:' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए और रात्रि जागरण एवं भगवान का ध्यान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शिव-गौरी की विधि विधान और भक्ति से की गई पूजा से पापों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
दिन की शुरुआत के लिए शुभ और अशुभ मुहूर्त भी नोट कर लें। दृक पंचांग के अनुसार, 17 जनवरी को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 12 बजकर 3 मिनट से 18 जनवरी तक है। मूल नक्षत्र सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र होगा। व्याघात योग रात 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा और करण विष्टि 11 बजकर 15 मिनट तक, उसके बाद शकुनि होगा। चतुर्दशी को चंद्रमा धनु राशि में संचार करेगा। वहीं, सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 48 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त पर नजर डालें तो निशिता काल पूजा मध्य रात्रि लगभग 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस समय गौरी-शंकर की पूजा, रुद्राभिषेक और जप करना सर्वोत्तम माना जाता है। वहीं, राहुकाल सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य न करें।