सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के संस्थापक एस. रामदास को दिया सिविल कोर्ट जाने का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के संस्थापक एस. रामदास को दिया सिविल कोर्ट जाने का निर्देश

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के 'आम' चुनाव चिह्न विवाद पर सुनवाई करते हुए कहा है कि इसे चुनाव आयोग नहीं सुलझा सकता। रामदास को सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी गई है। क्या इससे तमिलनाडु चुनाव पर असर पड़ेगा?

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हस्तक्षेप को अस्वीकार किया।
  • रामदास को सिविल कोर्ट जाने का निर्देश दिया गया।
  • विवाद पार्टी के आंतरिक नेतृत्व और चिह्न के उपयोग को लेकर है।
  • तमिलनाडु चुनाव पर इस फैसले का प्रभाव पड़ सकता है।
  • कोर्ट ने निचली अदालत को तेजी से सुनवाई का आदेश दिया।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ एस. रामदास की याचिका पर निर्णय सुनाते हुए कहा कि पार्टी के 'आम' (मैंगो) चुनाव चिह्न से संबंधित विवाद का समाधान चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को मान्य किया है, जिसमें रामदास द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज किया गया था।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह स्पष्ट किया कि जैसे पीएमके जैसी गैर-पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों के आंतरिक विवादों, विशेषकर चुनाव चिह्न के आवंटन से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग का हस्तक्षेप नहीं हो सकता।

यह विवाद मुख्यतः रामदास के गुट और उनके बेटे डॉ. अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी की कमान और 'आम' चिह्न के उपयोग के संबंध में है। रामदास ने चिह्न को अपने गुट को आवंटित करने या इसे फ्रीज करने की मांग की थी, ताकि अंबुमणि का गुट इसका उपयोग न कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने रामदास को निर्देश दिया कि वे इस मामले में सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करें। कोर्ट ने निचली अदालत को यह आदेश दिया है कि वह इस विवाद की सुनवाई को तेजी से करें और शीघ्र निर्णय सुनाएं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रामदास के कानूनी विकल्प पूरी तरह से खुले हैं और वे सिविल कोर्ट में जाकर पार्टी के नाम, झंडे और चिह्न पर अपने दावे को मजबूत कर सकते हैं।

यह मामला पीएमके के भीतर लंबे समय से चल रहे पारिवारिक और नेतृत्व विवाद से संबंधित है। रामदास ने पार्टी की स्थापना की थी, लेकिन हाल के वर्षों में उनके बेटे अंबुमणि को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद गुटबाजी बढ़ गई है। मद्रास हाई कोर्ट ने पहले ही कहा था कि ऐसे विवादों का समाधान सिविल कोर्ट में होना चाहिए, न कि चुनाव आयोग या रिट याचिका के माध्यम से। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी विचार को स्वीकार किया है।

कोर्ट के इस निर्णय से तमिलनाडु चुनाव में पीएमके की स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि 'आम' चिह्न पार्टी की पहचान है। अब यह विवाद सिविल कोर्ट में जाएगा, जहां दोनों पक्षों को अपने दावों के समर्थन में सबूत प्रस्तुत करने होंगे।

Point of View

न कि पार्टी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना।
NationPress
24/03/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले पर निर्णय दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के 'आम' चुनाव चिह्न विवाद पर निर्णय दिया है।
रामदास को क्या करने के लिए कहा गया?
रामदास को इस मामले में सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करने के लिए कहा गया है।
क्या चुनाव आयोग इस विवाद में हस्तक्षेप कर सकता है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
यह विवाद किसके बीच है?
यह विवाद रामदास के गुट और उनके बेटे अंबुमणि रामदास के गुट के बीच है।
इस विवाद का चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस फैसले से पीएमके की स्थिति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि 'आम' चिह्न पार्टी की पहचान है।
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