सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों के लिए सेना और नौसेना में पक्षपात पर कड़ा निर्णय लिया
सारांश
Key Takeaways
- महिला अधिकारियों के साथ हुए पक्षपात की गंभीरता को स्वीकारा गया।
- स्थायी कमीशन की प्राप्ति में सुधार होगा।
- कोर्ट ने महिलाओं के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
- पेंशन और अन्य लाभों का प्रावधान किया गया है।
- पुरानी धारणाओं को खत्म करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सेना, नौसेना और वायुसेना में महिला अधिकारियों के साथ हुए पक्षपात को गंभीरता से लेते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने कहा कि सशस्त्र बलों में मौजूद कुछ पुरानी धारणाओं और भ्रामक मूल्यांकन के कारण कई महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्राप्त नहीं हो सका, जिससे उनके करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
महिला अधिकारियों की कई याचिकाओं की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह उल्लेख किया कि उनके करियर का मूल्यांकन कुछ ऐसे तरीकों से किया गया जो निष्पक्ष नहीं थे। इस कारण उनकी प्रगति रुक गई और उन्हें स्थायी कमीशन से वंचित रहना पड़ा। कोर्ट ने तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किए और महिलाओं को राहत देने का निर्णय लिया।
न्यायालय ने पाया कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) और अन्य मूल्यांकन में पक्षपाती दृष्टिकोण अपनाया गया। कई मामलों में पुरुष अधिकारियों की तुलना में महिलाओं को कम आंका गया, जबकि उनकी ट्रेनिंग और पोस्टिंग समान थी।
जिन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं मिलने के कारण पहले ही सेवा से मुक्त कर दिया गया था, कोर्ट ने उन्हें एक बार की राहत देते हुए २० साल की सेवा पूरी मानने का आदेश दिया है। इससे उन्हें पेंशन और अन्य लाभ मिल सकेंगे, हालांकि बकाया वेतन नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि स्थायी कमीशन अब पुरुष अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जो महिला एसएससी अधिकारी पहले ही स्थायी कमीशन पा चुकी हैं, उनका कमीशन रद्द नहीं किया जाएगा।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान जिन्हें सेवा से मुक्त किया गया था, उन्हें एक बार की राहत के तहत २० साल की सेवा मानकर पेंशन दी जाएगी। हालांकि यह लाभ जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) और आर्मी एजुकेशन कोर (एईसी) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि दिसंबर २०२० में चयन बोर्ड द्वारा अपनाया गया रिक्तियों का मॉडल तर्कसंगत था, लेकिन मूल्यांकन के मानदंड और नीतियां समय पर सार्वजनिक नहीं की गईं, जिससे महिला अधिकारियों पर नकारात्मक असर पड़ा।
दिसंबर २०२० और दिसंबर २०२२ के चयन बोर्ड द्वारा दी गई स्थायी कमीशन और पदोन्नति रद्द नहीं होंगी। पुराने फैसलों के आधार पर दिए गए फायदे भी बरकरार रहेंगे।
एक बार की राहत के तौर पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि नया चयन बोर्ड बुलाने के बजाय कुछ योग्य महिला अधिकारियों को सीधे पदोन्नति दी जाएगी, बशर्ते वे मेडिकल और अनुशासनिक परीक्षणों में उत्तीर्ण हों।
यह राहत जनवरी २००९ से पहले नौसेना में शामिल हुई एसएससी महिला अधिकारियों को मिलेगी। इसके अतिरिक्त, जनवरी २००९ के बाद शामिल हुईं महिला अधिकारियों को भी (लॉ, एजुकेशन और नेवल आर्किटेक्चर ब्रांच को छोड़कर) और उन पुरुष एसएससी अधिकारियों को जो सेवा शर्तों के कारण स्थायी कमीशन से बाहर रखे गए थे।
जिन अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष २०२५ में सेवा से मुक्त हो गए, उन्हें भी २० साल की सेवा मानकर पेंशन दी जाएगी। उनकी पेंशन १ जनवरी २०२५ से लागू मानी जाएगी।
२०१९, २०२० और २०२१ के चयन बोर्ड द्वारा जिन एसएससी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया, उसे रद्द नहीं किया जाएगा। एक बार की राहत के रूप में इन चयन बोर्डों में शामिल सभी एसएससी अधिकारियों (पुरुष और महिला) को २० साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन और अन्य लाभ दिए जाएंगे, लेकिन बकाया वेतन नहीं मिलेगा।