सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर उठाई आवाज़, गृह मंत्रालय से तत्काल रिहाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने 14 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ़्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। सुले ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
क्या बोलीं सुप्रिया सुले
सुले ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ़्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूँ।' सुले ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग है।
मुख्य घटनाक्रम: गिरफ़्तारी और न्यायिक हिरासत
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध नारेबाज़ी भी की।
बुधवार को अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, तीसरे आरोपी अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
बचाव पक्ष के वकील का आरोप
सीजेपी नेताओं की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने दावा किया कि न्यायिक हिरासत का आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की — अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें जेल भेजा गया। हेला ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि 'भारत माता की जय' के नारे लगाने और तिरंगा लहराने पर जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
जंतर-मंतर पर नए प्रतिबंध की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में हुई जब दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि जंतर-मंतर दशकों से नागरिक विरोध का प्रतीकात्मक केंद्र रहा है और इस बदलाव से असहमति के सार्वजनिक स्थानों पर असर पड़ेगा।
आगे की संभावनाएँ
बचाव पक्ष द्वारा न्यायिक हिरासत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सुले की माँग के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ने की उम्मीद है। यह मामला विरोध के अधिकार और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच की सीमा-रेखा पर एक अहम बहस को पुनः जीवित कर रहा है।