17 अक्टूबर 2026
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सूरत ग्रामीण विकास: ₹108 करोड़ की 143 परियोजनाओं का शुभारंभ, गाँव के स्कूलों को मिली 'ई-कक्षा बस'

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सूरत ग्रामीण विकास: ₹108 करोड़ की 143 परियोजनाओं का शुभारंभ, गाँव के स्कूलों को मिली 'ई-कक्षा बस'

सारांश

सूरत जिले में ₹108 करोड़ की 143 परियोजनाओं के साथ-साथ टोयोटा किर्लोस्कर के CSR सहयोग से बनी 'ई-कक्षा बस' का शुभारंभ हुआ, जो पाँच ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों तक डिजिटल शिक्षा पहुँचाएगी — यह गुजरात के ग्रामीण-डिजिटल विभाजन को पाटने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सूरत जिले में ₹108 करोड़ की 143 ग्रामीण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया।
₹100 करोड़ की 104 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई; ₹8 करोड़ के 39 कार्यों का उद्घाटन किया गया।
परियोजनाओं में सड़कें, 60+ गाँवों की सिंचाई योजनाएँ, आँगनवाड़ी केंद्र और अन्य सुविधाएँ शामिल हैं।
टोयोटा किर्लोस्कर के CSR कोष से तैयार 'ई-कक्षा बस' — 'डिजिटल क्लासरूम्स ऑन व्हील्स' — को हरी झंडी मिली।
हर माह पाँच ब्लॉकों के 10–15 सरकारी स्कूलों के छात्र मोबाइल कंप्यूटर प्रयोगशाला का लाभ उठाएँगे।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 'अंत्योदय' दृष्टिकोण के तहत वंचित वर्गों तक पहुँच को प्राथमिकता बताई।

गुजरात के सूरत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत बुनियादी ढाँचे से जोड़ने के लिए ₹108 करोड़ की लागत वाली 143 विकास परियोजनाओं की एकसाथ शुरुआत की गई है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 17 अक्टूबर 2026 को सूरत जिला पंचायत परिसर में आयोजित कार्यक्रम में इन कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया, तथा एक अभिनव मोबाइल डिजिटल शिक्षा पहल 'ई-कक्षा बस' को भी हरी झंडी दिखाई।

परियोजनाओं का विवरण और दायरा

कुल ₹108 करोड़ के इस पैकेज में दो हिस्से हैं — ₹100 करोड़ की लागत वाली 104 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जबकि ₹8 करोड़ की लागत वाले 39 कार्यों का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं में ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली सड़कें, 60 से अधिक गाँवों को आच्छादित करने वाली सिंचाई योजनाएँ, नए आँगनवाड़ी केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएँ शामिल हैं। जिला पंचायत के अनुसार, इन कार्यों से ग्रामीण आबादी की ज़रूरी सुविधाओं तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार होगा।

ई-कक्षा बस: डिजिटल शिक्षा का नया माध्यम

इस कार्यक्रम की सबसे चर्चित पहल 'ई-कक्षा बस' रही, जिसे जिला पंचायत ने टोयोटा किर्लोस्कर के साथ मिलकर 'डिजिटल क्लासरूम्स ऑन व्हील्स' के तहत विकसित किया है। टोयोटा के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कोष से तैयार यह मोबाइल कंप्यूटर प्रयोगशाला दूर-दराज के गाँवों के बच्चों तक कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल साक्षरता पहुँचाएगी।

प्रत्येक माह सूरत जिले के पाँच ब्लॉकों के 10 से 15 सरकारी स्कूलों के छात्र इस बस का लाभ उठाएँगे। बस को झंडी दिखाते हुए संघवी ने ग्राम पंचायत नेताओं से आह्वान किया कि जब भी यह बस किसी स्कूल में पहुँचे, तो यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी सीटें भरी हों, ताकि छात्र इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठा सकें।

सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत संदेश

ग्रामीण विकास पर बोलते हुए संघवी ने कहा, 'मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रशासन दूर-दराज के इलाकों में सुविधाएँ पहुँचाने और ग्रामीण बच्चों व महिलाओं के लिए अवसर बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है।' उन्होंने सरकारी आवास योजनाओं में लाभार्थियों को शीट की जगह आरसीसी स्लैब छत देने के सुझाव की भी सराहना की।

संघवी ने हलपति समुदाय के परिवारों को पक्के घर दिलाने के जिला प्रशासन के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सरकारी आँगनवाड़ी केंद्र, पंचायत भवन और बस स्टेशन जैसी सार्वजनिक संपत्तियों की देखभाल को सामूहिक जिम्मेदारी मानें।

स्वास्थ्य मंत्री और जिला पंचायत अध्यक्ष के विचार

कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई और रोज़गार को मजबूत करने के लिए 'अंत्योदय' दृष्टिकोण अपना रही है, जिसका उद्देश्य समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचना है। उन्होंने कहा, 'ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में निवेश से बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने में मदद मिल रही है।' पानशेरिया ने यह भी कहा कि गुजरात ने तपेदिक (TB) उन्मूलन, कुपोषण और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी की दिशा में प्रगति की है।

सूरत जिला पंचायत के अध्यक्ष समीरभाई मोदी ने कहा कि ये परियोजनाएँ ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क ढाँचे तक पहुँच को और बेहतर बनाएँगी। उन्होंने 'ई-कक्षा बस' पहल के समर्थन के लिए टोयोटा का आभार व्यक्त किया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात सरकार ग्रामीण-शहरी डिजिटल विभाजन को पाटने पर जोर दे रही है। ₹108 करोड़ की ये परियोजनाएँ अगले कुछ महीनों में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि 'ई-कक्षा बस' जिले के हर ब्लॉक के सरकारी स्कूलों तक पहुँचने का लक्ष्य लेकर चलेगी। गौरतलब है कि सरकारी-CSR साझेदारी का यह मॉडल राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक संभावित नमूना बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गुणवत्ता और समयसीमा की होगी — सिंचाई और सड़क परियोजनाओं में अक्सर लागत और देरी के बीच का फासला बड़ा हो जाता है। 'ई-कक्षा बस' की CSR-सरकार साझेदारी एक रचनात्मक मॉडल है, पर प्रति माह 10–15 स्कूलों की पहुँच सीमित है — जब तक इसे नियमित रूप से स्केल नहीं किया जाता, यह एक प्रतीकात्मक पहल बनी रह सकती है। हलपति समुदाय के आवास और आरसीसी स्लैब जैसे सुझावों की तारीफ सुकून देती है, लेकिन यह भी देखना होगा कि ये वादे जमीन पर कितनी तेज़ी से उतरते हैं।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत जिले में शुरू की गई 143 विकास परियोजनाएँ क्या हैं?
ये ₹108 करोड़ की 143 ग्रामीण बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ हैं, जिनमें सड़कें, 60 से अधिक गाँवों की सिंचाई योजनाएँ, नए आँगनवाड़ी केंद्र और सार्वजनिक सुविधाएँ शामिल हैं। ₹100 करोड़ की 104 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई और ₹8 करोड़ के 39 कार्यों का उद्घाटन हुआ।
'ई-कक्षा बस' क्या है और इसे किसने बनाया?
'ई-कक्षा बस' एक मोबाइल कंप्यूटर प्रयोगशाला है जिसे सूरत जिला पंचायत ने टोयोटा किर्लोस्कर के CSR कोष से 'डिजिटल क्लासरूम्स ऑन व्हील्स' पहल के तहत तैयार किया है। इसका उद्देश्य दूर-दराज के गाँवों के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल साक्षरता देना है।
ई-कक्षा बस से कितने स्कूलों को फायदा मिलेगा?
हर महीने सूरत जिले के पाँच ब्लॉकों के 10 से 15 सरकारी स्कूलों के छात्र इस बस का लाभ उठा सकेंगे। बस का संचालन जिला पंचायत द्वारा किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए?
कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया उपस्थित रहे। सूरत जिला पंचायत के अध्यक्ष समीरभाई मोदी ने भी इस अवसर पर संबोधन दिया।
गुजरात सरकार का 'अंत्योदय' दृष्टिकोण क्या है?
'अंत्योदय' दृष्टिकोण के तहत राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोज़गार सुविधाओं को समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचाने को प्राथमिकता देती है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री पानशेरिया ने इस कार्यक्रम में इसी दृष्टिकोण का उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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