ओवैसी को 'बरसाती मेंढक' बोले कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत, भाजपा पर भी कसा तंज
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने 12 अक्टूबर 2026 को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला और उन्हें 'बरसाती मेंढक' की संज्ञा दी। यह पलटवार तब आया जब ओवैसी ने आज़मगढ़ में कहा था, 'नेहरू या गांधी की ज़रूरत नहीं है, हमें अपना नेता चाहिए।' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की सियासी बयानबाज़ी तेज़ होती दिख रही है।
ओवैसी पर राजपूत का पलटवार
राजपूत ने रहीम दास के दोहे का संदर्भ देते हुए कहा, 'जैसे ही बरसात आती है, बरसाती मेंढक टर्र-टर्र करने लगते हैं — ठीक वही हाल ओवैसी का है। जहाँ-जहाँ चुनाव आता है, वे मेंढक की तरह टर्र-टर्र करने लगते हैं।' उन्होंने ओवैसी से सवाल किया कि पिछले पाँच वर्षों में वे उत्तर प्रदेश कितनी बार आए और उन्होंने राज्य में कौन-सा ज़मीनी कार्यक्रम किया।
राजपूत ने आरोप लगाया कि जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के दौर में कथित तौर पर अल्पसंख्यकों के साथ ज़्यादतियाँ हो रही थीं, तब ओवैसी चुप रहे और केवल चुनाव के समय सक्रिय हो जाते हैं।
भाजपा-ओवैसी गठजोड़ का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने ओवैसी पर भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने का आरोप लगाते हुए कहा, 'आप मुसलमानों का नेता बनने का ठेका लेकर भाजपा को जो लाभ पहुँचाते हैं, उसे पूरे देश का हिंदुस्तानी समाज अच्छी तरह समझता है।' उन्होंने तर्क दिया कि जब ओवैसी स्वयं को मुसलमानों का नेता और भाजपा खुद को हिंदुओं का नेता बताती है, तो सवाल उठता है कि समग्र हिंदुस्तानियों का नेता कौन है।
गौरतलब है कि यह आरोप नया नहीं है — कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) पहले भी कहती रही हैं कि एआईएमआईएम की सक्रियता मतों के धार्मिक ध्रुवीकरण में भाजपा की मदद करती है।
भाजपा और उत्तर प्रदेश के कर्ज़ पर तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस आरोप का समर्थन करते हुए कि भाजपा सरकार की नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश भारी वित्तीय कर्ज़ के बोझ तले दब गया है, राजपूत ने कहा, 'भाजपा सिर्फ देश के धन्ना सेठों को ही गरीब समझती है। दलित, पिछड़ा, आदिवासी, महिला, नौजवान, किसान, अल्पसंख्यक, पीड़ित, शोषित और वंचित के सारे हक छीनकर यह सरकार सिर्फ कॉर्पोरेट और अंतरराष्ट्रीय घरानों को देने का काम कर रही है।'
उन्होंने कहा कि आज की तारीख में पूरा उत्तर प्रदेश कर्ज़ के जाल में फँसा हुआ है और कोई ऐसी जगह नहीं बची जहाँ सरकार ने कर्ज़ न लिया हो। भाजपा के सवर्ण समाज को साधने की कथित कोशिशों पर राजपूत ने तंज कसते हुए कहा, 'भाजपा पहले आँखें छीन लेती है और फिर चश्मा दान करती है।'
यूपी कांग्रेस के विवाद पर सफाई
लखनऊ में यूपी कांग्रेस मुख्यालय में आराधना मिश्रा 'मोना' के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई कहासुनी और उसके वीडियो के वायरल होने पर राजपूत ने इसे 'कुछ अति-उत्साही कार्यकर्ताओं या पुराने बैर-भाव के कारण हुई छोटी-मोटी घटना' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके मीडिया हैंडल्स ने इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
राजपूत ने पलटवार करते हुए कहा, 'हम भाजपा को याद दिलाना चाहते हैं कि कैसे उनके ही सांसद शरद त्रिपाठी ने संत कबीरनगर में तीन सेकंड में भाजपा के ही विधायक को सात जूते मारे थे। इसलिए भाजपा को इस पर बोलने का हक नहीं है।'
आगे क्या
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी करीब डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन सभी प्रमुख दलों की आक्रामक बयानबाज़ी से स्पष्ट है कि ज़मीनी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। कांग्रेस, एसपी और एआईएमआईएम के बीच अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर खींचतान आने वाले महीनों में और तेज़ होने की संभावना है।