मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 7 अक्टूबर को दार्जिलिंग में जीजेएम स्थापना दिवस रैली में होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को दार्जिलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने वाले हैं। राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, उनकी उपस्थिति लगभग निश्चित मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने जीजेएम नेतृत्व को दिया गया अपना वादा पूरा करने का संकल्प लिया है।
निमंत्रण और पृष्ठभूमि
जीजेएम अध्यक्ष बिमल गुरुंग और महासचिव रोशन गिरी ने पिछले सितंबर में कोलकाता में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। लोक निर्माण विभाग के ग्राउंड टेंट में आयोजित इस बैठक में पहाड़ियों की राजनीतिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उसी अवसर पर गुरुंग और गिरी ने मुख्यमंत्री को जीजेएम के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा था कि यदि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें किसी अत्यावश्यक कार्य के लिए दिल्ली बुलाता है, तो स्थिति अलग होगी — अन्यथा वे दार्जिलिंग में अवश्य उपस्थित रहेंगे।
यात्रा की तैयारियाँ
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए वहाँ पहुँचे। उल्लेखनीय है कि अर्जुन सिंह सितंबर में कोलकाता में हुई जीजेएम नेतृत्व की बैठक में भी मौजूद थे। दार्जिलिंग में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री उसी दिन कोलकाता लौटेंगे।
जीजेएम और भाजपा का राजनीतिक समीकरण
बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) इस समय केंद्र में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी है। इस वर्ष के विधानसभा चुनावों में जीजेएम ने उत्तर बंगाल के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में कई सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों का समर्थन किया था। भाजपा ने उत्तर बंगाल में कई सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की।
पहाड़ी क्षेत्र की तीनों विधानसभा सीटों — दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियोंग — पर जीजेएम का प्रभाव कायम है। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पहाड़ी राजनीति को और मज़बूत करने की कोशिश में है।
राजनीतिक महत्व
माना जा रहा है कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का पहाड़ियों के राजनीतिक भविष्य और विकास पर दिया जाने वाला भाषण महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत देगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री की इस यात्रा को राज्य सरकार के पहाड़ी क्षेत्र के साथ नए राजनीतिक समीकरण के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर बंगाल की पहाड़ियाँ दशकों से राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील रही हैं और यहाँ की सत्ता-गणित कोलकाता की सियासत पर सीधा असर डालती है।
आगामी दिनों में मुख्यमंत्री का यह दौरा पहाड़ी क्षेत्र की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे सकता है।