19 अक्टूबर 2026
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मणिपुर के तामेंगलोंग में बांस-बेंत शिल्प कार्यशाला शुरू, 25 प्रशिक्षुओं को मिलेगा आजीविका का हुनर

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मणिपुर के तामेंगलोंग में बांस-बेंत शिल्प कार्यशाला शुरू, 25 प्रशिक्षुओं को मिलेगा आजीविका का हुनर

सारांश

मणिपुर के तामेंगलोंग में TAMBAC की बांस-बेंत कार्यशाला महज़ हस्तशिल्प प्रशिक्षण नहीं — यह पूर्वोत्तर के उस हरित आर्थिक मॉडल की परीक्षा है, जहाँ IIT मुंबई की तकनीक और UK निर्यात के अनुभव को जोड़कर स्थानीय कारीगरों की किस्मत बदलने की कोशिश की जा रही है।

मुख्य बातें

TAMBAC ने 19 अक्टूबर 2026 को तामेंगलोंग, मणिपुर में बांस-बेंत शिल्प कार्यशाला का उद्घाटन किया।
कार्यशाला 24 अक्टूबर 2026 तक चलेगी; लगभग 25 प्रशिक्षुओं ने पंजीकरण कराया है।
कार्यक्रम को केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अंतर्गत NECBDC द्वारा प्रायोजित किया गया है।
TAMBAC ने IIT मुंबई से बैम्बू कॉइलिंग तकनीक सीखी है और कुछ उत्पाद यूनाइटेड किंगडम को निर्यात किए जा चुके हैं।
आगामी चरणों में बांस-बेंत फर्नीचर निर्माण की कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएँगी।
प्रतिभागियों को पीएम मुद्रा योजना , पीएम विश्वकर्मा और SHG ऋण समेत सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

तामेंगलोंग बैम्बू एंड केन डेवलपमेंट सेंटर (TAMBAC) ने 19 अक्टूबर 2026 को मणिपुर के तामेंगलोंग जिला मुख्यालय में एक छह दिवसीय बांस और बेंत शिल्प कार्यशाला का उद्घाटन किया, जिसमें लगभग 25 प्रशिक्षुओं ने भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया है। यह कार्यशाला 24 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और इसका मुख्य उद्देश्य जिले में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध बांस और बेंत संसाधनों के ज़रिए स्थानीय युवाओं में कौशल विकास, उद्यमिता और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है।

कार्यशाला की रूपरेखा और प्रायोजक

इस कार्यशाला को केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल बैम्बू एंड केन डेवलपमेंट सेंटर (NECBDC) द्वारा प्रायोजित किया गया है। प्रशिक्षण का संचालन मास्टर ट्रेनर रियांगकामंग कामेई और असिन टी. पानमेई कर रहे हैं। यह कार्यशाला विशेष रूप से उन शुरुआती प्रतिभागियों के लिए तैयार की गई है जो पहली बार बांस और बेंत शिल्प सीखना चाहते हैं।

वर्तमान चरण में प्रशिक्षुओं को बांस और बेंत की टोकरियाँ बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है। TAMBAC के आगामी चरणों में बैम्बू कॉइलिंग (बांस को लपेटकर बनाई जाने वाली कला) और बांस-बेंत फर्नीचर निर्माण की कार्यशालाएँ भी आयोजित करने की योजना है।

मुख्य अतिथि का संबोधन

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा प्रबंधक टीपी मेइनिंगथैलियू ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बताया कि बांस की विविधता के मामले में भारत, चीन के बाद दूसरे स्थान पर है, और पूर्वोत्तर राज्यों में त्रिपुरा में बांस की सर्वाधिक किस्में पाई जाती हैं, जिसके बाद मणिपुर का स्थान आता है।

मेइनिंगथैलियू ने प्रशिक्षुओं को बांस और बेंत उत्पादों की पर्यावरणीय अहमियत से भी परिचित कराया। उन्होंने रेखांकित किया कि ये उत्पाद प्लास्टिक का एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ बांस और बेंत उत्पादों पर अनुकूल जीएसटी दरें इस क्षेत्र के व्यावसायिक विकास में सहायक हो सकती हैं।

वित्तीय साक्षरता पर जोर देते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को कमाई, बचत और खर्च के बीच संतुलन बनाने की सलाह दी और घरेलू खर्चों तथा व्यावसायिक पूँजी को अलग रखने की ज़रूरत समझाई। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं — प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), पीएम विश्वकर्मा, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूह (SHG) ऋण — के बारे में भी जानकारी साझा की।

IIT मुंबई से सीखी तकनीक, UK तक निर्यात

TAMBAC के निदेशक नेहेमियाह पानमेई ने बताया कि संस्थान ने बैम्बू कॉइलिंग तकनीक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), मुंबई से सीखी है और इस विधि से सफलतापूर्वक बांस के कटोरे तैयार किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से कुछ उत्पाद यूनाइटेड किंगडम में स्थित एक 'इंडिया शॉप' के माध्यम से निर्यात भी किए जा चुके हैं।

पानमेई ने कहा कि इस अनुभव से यह स्पष्ट हुआ है कि बांस-बेंत शिल्प में न केवल स्थानीय आय बढ़ाने की क्षमता है, बल्कि यह तामेंगलोंग के कारीगरों को वैश्विक बाज़ार से भी जोड़ सकता है। आगामी फर्नीचर निर्माण कार्यशाला के लिए कुशल विशेषज्ञों को आमंत्रित करने की योजना है, ताकि प्रतिभागी बड़े महानगरों की बाज़ार माँग के अनुरूप उत्पाद विकसित कर सकें।

समुदाय की भूमिका और आगे की राह

चिउलुआन बैपटिस्ट चर्च के एसोसिएट पास्टर पौरी गंगमेई ने प्रशिक्षणार्थियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया और तामेंगलोंग में बने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

TAMBAC के निदेशक ने उम्मीद जताई कि कौशल विकास, उत्पाद नवाचार और बाज़ार विस्तार को निरंतर बढ़ावा देने से तामेंगलोंग के प्रचुर बांस संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और धीरे-धीरे वहाँ के लोगों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार आएगा। यह कार्यशाला पूर्वोत्तर भारत में हस्तशिल्प आधारित ग्रीन इकॉनमी की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 25 प्रशिक्षुओं की एक कार्यशाला से बड़े पैमाने पर आजीविका परिवर्तन की उम्मीद यथार्थवादी नहीं होगी। असली परीक्षा यह है कि प्रशिक्षण के बाद इन कारीगरों को स्थायी बाज़ार संपर्क, गुणवत्ता मानक और ऋण सुलभता मिल पाती है या नहीं। बिना इन तीनों स्तंभों के, कौशल विकास की यह पहल भी कई पूर्ववर्ती कार्यशालाओं की तरह एकल घटना बनकर रह सकती है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तामेंगलोंग बांस-बेंत शिल्प कार्यशाला क्या है और इसे किसने आयोजित किया?
यह एक छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला है जिसे TAMBAC ने 19 अक्टूबर 2026 को तामेंगलोंग, मणिपुर में शुरू किया है। इसे केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अंतर्गत NECBDC द्वारा प्रायोजित किया गया है और इसमें लगभग 25 प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं।
यह कार्यशाला कब तक चलेगी और इसमें क्या सिखाया जाएगा?
यह कार्यशाला 24 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। वर्तमान चरण में बांस-बेंत की टोकरियाँ बनाना सिखाया जा रहा है। इसके बाद TAMBAC बैम्बू कॉइलिंग और बांस-बेंत फर्नीचर निर्माण की कार्यशालाएँ आयोजित करने की योजना बना रहा है।
TAMBAC ने बैम्बू कॉइलिंग तकनीक कहाँ से सीखी और क्या उत्पाद विदेश भेजे गए हैं?
TAMBAC ने बैम्बू कॉइलिंग तकनीक IIT मुंबई से सीखी है और इस विधि से बांस के कटोरे बनाए गए हैं। इनमें से कुछ उत्पाद यूनाइटेड किंगडम में स्थित एक 'इंडिया शॉप' के माध्यम से निर्यात किए जा चुके हैं।
प्रतिभागियों को कौन-सी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई?
कार्यशाला में SBI शाखा प्रबंधक ने प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), पीएम विश्वकर्मा, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूह (SHG) ऋण के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही वित्तीय साक्षरता और छोटे उद्यमियों के लिए ऋण प्राप्ति के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
मणिपुर में बांस उद्योग का महत्व क्यों है?
बांस की विविधता के मामले में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है, और मणिपुर पूर्वोत्तर में त्रिपुरा के बाद दूसरा सबसे समृद्ध राज्य है। तामेंगलोंग जिले में बांस और बेंत के प्रचुर संसाधन हैं, जिनके ज़रिए स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन करके आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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