तामेंगलोंग जिला: पीएम धन धान्य योजना के तहत शहद उत्पादन में नई क्रांति लाने की तैयारी, 1000 लीटर मासिक लक्ष्य

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तामेंगलोंग जिला: पीएम धन धान्य योजना के तहत शहद उत्पादन में नई क्रांति लाने की तैयारी, 1000 लीटर मासिक लक्ष्य

सारांश

मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में शहद उत्पादन में क्रांति लाने के लिए पीएम धन धान्य योजना के तहत विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यहां 100 किसानों को वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन की तकनीक सिखाई जा रही है, जिससे हर महीने 1000 लीटर शहद उत्पादन का लक्ष्य है।

Key Takeaways

  • तामेंगलोंग जिले में पीएम धन धान्य योजना का कार्यान्वयन
  • हर महीने 1000 लीटर शहद उत्पादन का लक्ष्य
  • 100 किसानों को वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग
  • स्थायी कृषि और परागण में सुधार
  • जैव विविधता का लाभ उठाना

तामेंगलोंग (मणिपुर), 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर के तामेंगलोंग जिले ने शहद उत्पादन में एक नई क्रांति लाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। 'प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना' (पीएमडीडीकेवाई) के तहत इस जिले को देश के 100 'आकांक्षी कृषि जिलों' में शामिल किया गया है, जहाँ वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और प्रजनन तकनीकों को अपनाकर अधिकतम शहद उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पीएमडीडीकेवाई, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को छह वर्ष (2025-26 से 2030-31) के लिए मंजूरी दी थी, कम उत्पादकता, मध्यम फसल सघनता और कम ऋण वितरण वाले 100 जिलों पर केंद्रित है। यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है और कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण, टिकाऊ कृषि, पंचायत/ब्लॉक स्तर पर भंडारण, सिंचाई सुधार और ऋण उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करती है। तामेंगलोंग मणिपुर का एकमात्र जिला है जो इस सूची में शामिल हुआ है।

जिला प्रशासन, हम्बल बी बजवर्थी वेंचर प्राइवेट लिमिटेड (अंबरनाथ, ठाणे, महाराष्ट्र) और हिल मधुमक्खी पालक संघ (तामेंगलोंग) के सहयोग से इस परियोजना को अंजाम दिया जा रहा है। पहले चरण में 100 किसानों को चुना गया है, जिन्हें मधुमक्खी के छत्ते, वैज्ञानिक उपकरण और 8000 रुपए मूल्य के सामान प्रदान किए जा रहे हैं। शहर में 500 बक्से पहुँच चुके हैं और प्रशिक्षण कार्य शुरू हो गया है।

उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव और तामेंगलोंग के केंद्रीय नोडल अधिकारी (सीएनओ) आईएएस आर्मस्ट्रांग पामे ने बताया कि 'आकांक्षी जिला' घोषित होने के बाद सीएसआर फंड से धनराशि जुटाई गई है, जिससे 100 किसानों को सहायता मिल रही है। उनका लक्ष्य हर महीने कम से कम 1000 लीटर शहद उत्पादन करना है।

गदैलॉन्ग हॉर्टिकल्चर फार्म में बागवानी एवं मृदा संरक्षण विभाग ने 17 मार्च 2026 को कार्यक्रम आयोजित किया। 18 मार्च से 'हंबल बी' के सह-संस्थापक और सीओओ वैभव त्रिमुखे के नेतृत्व में मधुमक्खी ग्राफ्टिंग (प्रजनन) का कार्य चल रहा है। वैभव त्रिमुखे ने कहा, "हंबल बी वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन से किसानों की क्षमता बढ़ा रहा है। पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक तकनीक अपनाने से अधिक शहद उत्पादन और आय बढ़ेगी।"

यह परियोजना तामेंगलोंग के घने जंगलों और जैव-विविधता का लाभ उठाती है। वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खियों के स्वास्थ्य, उत्पादकता और स्थिरता सुनिश्चित की जा रही है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, परागण में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।

जिला प्रशासन नियमित रूप से समीक्षा कर रहा है। यह कदम पीएमडीडीकेवाई के उद्देश्यों, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ आजीविका को साकार करने में महत्वपूर्ण है।

Point of View

बल्कि यह राज्य की कृषि उत्पादकता को भी सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

तामेंगलोंग जिले में शहद उत्पादन का लक्ष्य क्या है?
तामेंगलोंग जिले का लक्ष्य हर महीने कम से कम 1000 लीटर शहद उत्पादन करना है।
पीएम धन धान्य योजना क्या है?
पीएम धन धान्य योजना एक सरकारी योजना है जो कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
इस परियोजना में कितने किसानों को शामिल किया गया है?
इस परियोजना में पहले चरण में 100 किसानों को शामिल किया गया है।
किस प्रकार की तकनीकें अपनाई जा रही हैं?
विज्ञान आधारित मधुमक्खी पालन और प्रजनन तकनीकें अपनाई जा रही हैं।
इस परियोजना का क्या लाभ होगा?
इस परियोजना के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी, परागण में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।
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