मणिपुर में तमेंगलोंग: शहद उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु 100 से अधिक किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण
सारांश
Key Takeaways
- तमेंगलोंग को राज्य का प्रमुख शहद उत्पादक बनाने की दिशा में पहल।
- 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- शहद उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य 1000 लीटर प्रति माह।
- आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
- वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन तकनीकों का उपयोग।
इम्फाल, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर के तमेंगलोंग जिले को राज्य का प्रमुख शहद उत्पादक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) के तहत यहाँ 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
तमेंगलोंग उन 100 जिलों में से एक है, जिन्हें इस योजना के लिए चुना गया है। इसे आकांक्षी कृषि जिलों के मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।
इस पहल के पहले चरण में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और प्रजनन तकनीकों को अपनाया गया है। यहाँ 100 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है और उनकी मधुमक्खी कॉलोनियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मधुमक्खियों के स्वास्थ्य, उत्पादकता और स्थिरता में सुधार करना है।
जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम को बज़वर्दी वेंचर प्राइवेट लिमिटेड (अंबरनाथ) के सहयोग से आरंभ किया है। इस दौरान नोडल अधिकारी क्षेत्रीय दौरे कर प्रगति की समीक्षा भी कर रहे हैं।
तमेंगलोंग को आकांक्षी जिला घोषित किया गया है और सीएसआर पहल के तहत 100 किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक लगभग 500 बॉक्स (बीहाइव्स) जिले में पहुँच चुके हैं और प्रशिक्षण कार्य आरंभ हो चुका है। हर महीने 1000 लीटर शहद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में चयनित किसानों को 8000 रुपये तक के मधुमक्खी पालन उपकरण, जिनमें बीहाइव्स भी शामिल हैं, उपलब्ध कराए जाएंगे।
कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी वैभव त्रिमुखे के अनुसार, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पारंपरिक तरीकों की तुलना में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।
यह ध्यान देने योग्य है कि मणिपुर का तमेंगलोंग जिला ही पीएमडीडीकेवाई के तहत 100 आकांक्षी कृषि जिलों की सूची में शामिल है। इस योजना को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी और यह 2025-26 से अगले छह वर्षों तक लागू रहेगी।
योजना के तहत जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल तीव्रता, और कम ऋण वितरण जैसे मानकों के आधार पर किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में शहद उत्पादन को बढ़ावा देना है। पिछले एक दशक में भारत में शहद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और निर्यात 1500 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है और कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।