विश्व बांस दिवस 2026: 'ग्रीन स्टील' बांस का वैश्विक बाज़ार 2033 तक ₹9.5 लाख करोड़ पार करने का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
विश्व बांस दिवस प्रतिवर्ष 18 सितंबर को मनाया जाता है — और इस वर्ष 2026 की थीम 'बैम्बू बियॉन्ड बॉर्डर्स' के साथ, दुनिया भर में बांस की असीमित संभावनाओं को नई पहचान मिल रही है। घर-निर्माण, हस्तशिल्प, औषधि और पर्यावरण संरक्षण — बांस आज हर क्षेत्र में अपनी अमिट उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इसे आधुनिक विज्ञान 21वीं सदी का 'ग्रीन स्टील' कहता है, और यह उपाधि बेवजह नहीं है।
विश्व बांस दिवस की शुरुआत और 2026 की थीम
इस दिवस की आधिकारिक शुरुआत 18 सितंबर 2009 को बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित 8वें विश्व बांस कांग्रेस के दौरान विश्व बांस संगठन द्वारा की गई थी। तब से यह दिवस हर साल नई प्रासंगिकता के साथ मनाया जाता है।
वर्ष 2026 के लिए आधिकारिक थीम 'बैम्बू बियॉन्ड बॉर्डर्स' रखी गई है, जो भौगोलिक और आर्थिक सीमाओं से परे बांस की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है। इससे पूर्व 2025 में थीम 'नेक्स्ट जेनरेशन बैम्बू: सॉल्यूशन, इनोवेशन, एंड डिजाइन' थी, जो आधुनिक चुनौतियों के समाधान में बांस के नवाचार पर केंद्रित थी।
क्यों कहते हैं बांस को 'ग्रीन स्टील'
वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से बांस पोएसी कुल की घास है — जिसे ग्रेमिनीई भी कहा जाता है। यह सबसे लंबी और लकड़ी जैसी संरचना वाली घास होती है। इसकी तनन क्षमता (tensile strength) इतनी असाधारण है कि यह निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले माइल्ड स्टील से भी प्रतिस्पर्धा करती है — और कई मामलों में उससे भी बेहतर प्रदर्शन करती है।
यही कारण है कि इंजीनियर और पर्यावरणविद् दोनों इसे 'ग्रीन स्टील' की संज्ञा देते हैं। गौरतलब है कि बांस न केवल मज़बूत है, बल्कि पारंपरिक इस्पात के मुकाबले इसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन भी कहीं कम होता है।
वैश्विक बाज़ार में बांस की ताकत
अंतरराष्ट्रीय बांस और बेंत संगठन (INBAR) तथा विभिन्न बाज़ार शोध रिपोर्टों के आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक बांस बाज़ार का आकार 2025 में लगभग 70 से 76 बिलियन डॉलर आंका गया था। अनुमान है कि यह 2033 तक 113.8 बिलियन डॉलर के विशाल आँकड़े को पार कर जाएगा।
इस वैश्विक व्यापार में चीन अग्रणी है — 3 करोड़ टन वार्षिक उत्पादन और 2 बिलियन डॉलर से अधिक के निर्यात मूल्य के साथ। उसके ठीक बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जहाँ प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ टन बांस का उत्पादन होता है।
पर्यावरण संरक्षण में बांस का योगदान
जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध चल रही वैश्विक लड़ाई में बांस एक अत्यंत शक्तिशाली प्राकृतिक हथियार साबित हो रहा है। अध्ययनों के अनुसार, एक हेक्टेयर बांस का जंगल प्रतिवर्ष लगभग 12,000 से 17,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में सक्षम है।
इसके साथ ही बांस सामान्य पेड़ों की तुलना में तेज़ी से ऑक्सीजन छोड़ता है और अपने तनों, पत्तियों तथा जड़ों में भारी मात्रा में कार्बन संग्रहित करता है। इसकी पर्यावरणीय भूमिका यहीं नहीं रुकती — फाइटोरेमेडिएशन की प्रक्रिया के ज़रिये यह भारी धातुओं से प्रदूषित मिट्टी को भी पुनर्जीवित करता है।
शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि विशेष रूप से 'मोसो बांस' और अन्य प्रजातियाँ अपनी जड़ों के माध्यम से ज़िंक, क्रोमियम जैसे विषाक्त तत्वों और कच्चे तेल के रिसाव को सोखकर भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने में अत्यधिक कारगर हैं। आने वाले दशकों में बांस की इस भूमिका के और अधिक विस्तार की संभावना है।