क्या तमिलनाडु ने 50 करोड़ रुपए के लुप्तप्राय प्रजाति संरक्षण फंड का नया ढांचा तैयार किया?

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क्या तमिलनाडु ने 50 करोड़ रुपए के लुप्तप्राय प्रजाति संरक्षण फंड का नया ढांचा तैयार किया?

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने अपने संरक्षण प्रयासों को मजबूती देने के लिए 50 करोड़ रुपए के लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण कोष का पुनर्गठन किया है। यह कदम न केवल विलुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करेगा, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। जानिए इस पहल के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण 50 करोड़ रुपए का कोष कार्यकारी और शासी समितियों का गठन प्रदूषण और अवैध शिकार के खिलाफ कदम बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट के रूप में तमिलनाडु

चेन्नई, 4 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण संरक्षण योजना के तहत तमिलनाडु लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण कोष (टीएनईएससीएफ) के प्रबंधन को फिर से व्यवस्थित किया है। यह कोष 50 करोड़ रुपए का है जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के भीतर लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों का संरक्षण और पुनर्स्थापन करना है।

पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू द्वारा जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार, इस कोष का प्रशासन राज्य वन विकास एजेंसी (एसएफडीए) से उन्नत वन्यजीव संरक्षण संस्थान (एआईडब्ल्यूसी), वंडलूर को स्थानांतरित कर दिया गया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम में वैज्ञानिक दृढ़ता और संस्थागत फोकस लाना है। सरकार ने कोष के संचालन की देखरेख के लिए दो समितियों (एक शासी और एक कार्यकारी) का गठन किया है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली शासी समिति हर चार महीने में एक बार बैठक करेगी, जिसका उद्देश्य कोष की रणनीतिक दिशा का मार्गदर्शन करना है। इसमें वित्त, उद्योग और पर्यावरण जैसे प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, साथ ही संरक्षणवादी और परोपकारी लोग जैसे रोहिणी नीलेकणी, मल्लिका श्रीनिवासन, जेके पैटरसन एडवर्ड, एस. बालचंद्रन और के. जयकुमार भी शामिल होंगे।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सदस्य-संयोजक के रूप में कार्य करेंगे।

अपर मुख्य सचिव (पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन) की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति दैनिक कार्यों को संभालेगी, परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी देगी और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करेगी।

एआईडब्ल्यूसी, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधि इस पैनल का हिस्सा हैं। पिछले साल 5 करोड़ रुपए की प्रारंभिक राशि से शुरू किया गया, टीएनईएससीएफ राज्य भर में प्रजातियों की पुनर्प्राप्ति, आवास पुनर्स्थापन और समुदाय-आधारित संरक्षण के लिए परियोजनाओं को वित्तपोषित करेगा। यह तमिलनाडु में संरक्षण वित्त का विस्तार करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से अतिरिक्त संसाधन भी जुटाएगा।

कार्यक्रम का पहला चरण 4 कम ज्ञात लुप्तप्राय प्रजातियों पर केंद्रित होगा। इनमें से प्रत्येक प्रजाति को अलग-अलग पारिस्थितिक दबावों का सामना करना पड़ता है, जिनमें खंडित आवास और अवैध शिकार से लेकर आक्रामक प्रजातियों और प्रदूषण तक शामिल हैं।

पश्चिमी और पूर्वी घाटों में फैले भू-दृश्यों वाला तमिलनाडु, विश्व स्तर पर एक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में जाना जाता है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इसके नाजुक पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और इन अनोखी प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए तत्काल संरक्षण प्रयास आवश्यक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हम मानते हैं कि इस संरक्षण प्रयास का महत्व केवल तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं है। यह एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो देश की जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद करेगा। यह पहल न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करेगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्थायी पर्यावरण का निर्माण भी करेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएनईएससीएफ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
टीएनईएससीएफ का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा एवं पुनर्स्थापन करना है।
इस कोष का संचालन कौन करेगा?
इस कोष का संचालन एक शासी और एक कार्यकारी समिति द्वारा किया जाएगा।
क्या इस कोष के तहत किस प्रकार की प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी?
इस कोष के तहत 4 कम ज्ञात लुप्तप्राय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या यह पहल अन्य राज्यों में भी लागू होगी?
इस पहल का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी जैव विविधता संरक्षण की दिशा में प्रेरित करना है।
क्या सरकार इस कार्यक्रम के लिए और धन जुटाएगी?
हाँ, सरकार इस कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से अतिरिक्त संसाधन जुटाने की योजना बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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