तमिलनाडु के 222 मछुआरे ईरान से लौटे, भाजपा नेता ने सीएम स्टालिन की भूमिका पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- तमिलनाडु के 222 मछुआरे ईरान से लौटे।
- भाजपा नेता ने सीएम स्टालिन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।
- मछुआरों की सुरक्षित वापसी से खुशी का माहौल।
- केंद्र सरकार की सक्रियता और राज्य सरकार की चुप्पी पर चर्चा।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने खाड़ी देशों से भारतीय मछुआरों की वापसी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मछुआरों की सुरक्षित वापसी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
मालवीय ने एक्स पर लिखा, "इस महीने की शुरुआत में 345 मछुआरों को सुरक्षित रूप से चेन्नई लाया गया था। अब ईरान से लौटे 312 लोगों के दूसरे जत्थे में 222 तमिलनाडु के हैं। इसमें गुजरात से 73, केरल से 9 और पुडुचेरी से 8 मछुआरे शामिल हैं। ये मछुआरे किश द्वीप के पास काम कर रहे थे और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच संसाधनों के बिना फंसे रह गए थे। उनकी सुरक्षित वापसी ने तमिलनाडु में अपार राहत और खुशी का माहौल पैदा किया है।"
उन्होंने कहा, "लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के त्वरित और सहानुभूतिपूर्ण प्रयासों की सराहना कर रहे हैं। वहीं, डीएमके नेतृत्व की चुप्पी और निष्क्रियता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।"
मालवीय ने मुख्यमंत्री से प्रश्न करते हुए लिखा, "क्या संघर्ष के पिछले छह हफ्तों में मुख्यमंत्री ने स्वदेश वापसी के लिए कोई औपचारिक दबाव डाला? क्या डीएमके सांसदों ने संसद में इन चिंताओं को गंभीरता से उठाया?" ये सवाल कई लोग पूछ रहे हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि डीएमके वही पार्टी है जिसने 1974 में कांग्रेस द्वारा किए गए कचाथीवू समझौते के दौरान चुप्पी साध ली थी, जिसका मछुआरा समुदाय पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा।"