टिहरी सड़क हादसा: 8 मौतों के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, DM ने नामित किया जांच अधिकारी

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टिहरी सड़क हादसा: 8 मौतों के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, DM ने नामित किया जांच अधिकारी

सारांश

टिहरी में 23 अप्रैल को चंबा-कोटी मार्ग पर वाहन 300 मीटर गहरी खाई में गिरा, 8 की मौत। DM नितिका खंडेलवाल ने SDM को मजिस्ट्रियल जांच अधिकारी नामित किया। एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:42 बजे टिहरी के चंबा-कोटी मार्ग पर भीषण सड़क हादसा हुआ।
  • वाहन 300 मीटर गहरी खाई में गिरा, 10 में से 8 यात्रियों की मौके पर मौत, 2 गंभीर घायल।
  • DM नितिका खंडेलवाल ने SDM टिहरी को मजिस्ट्रियल जांच अधिकारी नामित किया।
  • जांच उत्तराखंड सड़क परिवहन दुर्घटना राहत निधि संशोधन नियमावली 2023 के तहत आदेशित।
  • जांच अधिकारी को एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें चालक की स्थिति, वाहन फिटनेस और सड़क हालत शामिल।
  • हादसे की जगह नैलमल्ला, होटल बागसू महादेव के पास सुरक्षा अवरोध टूटकर वाहन खाई में गिरा।

टिहरी, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल जिले में 23 अप्रैल 2025 को हुए भीषण सड़क हादसे में 8 लोगों की जान जाने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने उप जिला मजिस्ट्रेट टिहरी को इस दुर्घटना की विस्तृत जांच के लिए आधिकारिक जांच अधिकारी नामित किया है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा

23 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजकर 42 मिनट पर चंबा-कोटी कॉलोनी मोटर मार्ग पर नैलमल्ला स्थित होटल बागसू महादेव के समीप एक यात्री वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया। वाहन ने सड़क के किनारे लगे सुरक्षा अवरोध (क्रैश बैरियर) को तोड़ते हुए करीब 300 मीटर गहरी खाई में छलांग लगा दी।

वाहन में सवार 10 लोगों में से 8 की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि शेष 2 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। यह हादसा उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर बढ़ती दुर्घटनाओं की श्रृंखला में एक और दर्दनाक कड़ी है।

मजिस्ट्रियल जांच का कानूनी आधार

यह जांच उत्तराखंड शासन के परिवहन अनुभाग द्वारा 3 मार्च 2023 को जारी सड़क परिवहन दुर्घटना राहत निधि संशोधन नियमावली 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत आदेशित की गई है। इस नियमावली के तहत बहु-मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में मजिस्ट्रियल जांच अनिवार्य है, ताकि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर संपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में दुर्घटना की तिथि, समय, मार्ग की स्थिति, वाहन का पंजीकरण विवरण, परमिट की वैधता, यात्री कर की स्थिति तथा मृत एवं घायल व्यक्तियों के नाम-पते सम्मिलित होंगे।

जांच के दायरे में क्या-क्या शामिल

जांच अधिकारी को निर्देश है कि वे घायलों के चिकित्सा प्रमाण और मृतकों के आश्रितों का विवरण भी रिपोर्ट में शामिल करें। इसके साथ ही वाहन की तकनीकी जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाएगी।

जांच में चालक की अवस्था — जैसे नशे में होना या लापरवाही — वाहन की तकनीकी खराबी, अत्यधिक गति, सड़क की भौतिक स्थिति और चालक के लाइसेंस की वैधता जैसे सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जाएगी। यह बहुआयामी जांच यह सुनिश्चित करेगी कि दोष किस कारण से हुआ।

उत्तराखंड में पहाड़ी सड़क हादसों का गहरा संदर्भ

गौरतलब है कि उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर हर वर्ष दर्जनों वाहन खाइयों में समाते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड सड़क दुर्घटना मृत्यु दर में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीर्ण-शीर्ण सुरक्षा अवरोध, संकरी सड़कें, ओवरलोडिंग और अपर्याप्त वाहन रखरखाव इन हादसों के प्रमुख कारण हैं।

विडंबना यह है कि चंबा-कोटी मार्ग पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां यात्री वाहनों का भारी दबाव रहता है, फिर भी सुरक्षा अवसंरचना अपग्रेड करने में देरी चिंताजनक है। आलोचकों का कहना है कि यदि क्रैश बैरियर मानक के अनुरूप होते तो वाहन को 300 मीटर गहरी खाई में गिरने से रोका जा सकता था।

प्रशासन का उद्देश्य और आगे की राह

जिला प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस जांच का मूल उद्देश्य केवल दोषियों को चिह्नित करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीतिगत सिफारिशें देना भी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सड़क सुधार, वाहन फिटनेस नीति और चालक प्रशिक्षण पर कदम उठाए जा सकते हैं।

अगले एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे की जिम्मेदारी किस पर तय होती है और पीड़ित परिवारों को राहत निधि कब और कैसे मिलेगी। उत्तराखंड सरकार के लिए यह मामला पहाड़ी सड़क सुरक्षा नीति की समीक्षा का एक बड़ा अवसर भी है।

Point of View

बल्कि उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों पर दशकों से चली आ रही संरचनात्मक लापरवाही का परिणाम है। जब एक वाहन 300 मीटर गहरी खाई में गिरता है और क्रैश बैरियर उसे रोक नहीं पाता, तो सवाल केवल चालक की गलती पर नहीं, बल्कि सड़क अवसंरचना की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र की विफलता पर भी उठना चाहिए। मजिस्ट्रियल जांच एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसी रिपोर्टें अक्सर फाइलों में दब जाती हैं। असली परीक्षा यह होगी कि इस रिपोर्ट के आधार पर नीतिगत बदलाव होते हैं या नहीं — और पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय और मुआवजा मिलता है या नहीं।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

टिहरी सड़क हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
23 अप्रैल 2025 को टिहरी के चंबा-कोटी मार्ग पर हुए हादसे में वाहन में सवार 10 में से 8 लोगों की मौत हो गई। शेष 2 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।
टिहरी हादसे की मजिस्ट्रियल जांच किसने आदेशित की?
जिला मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने उप जिला मजिस्ट्रेट टिहरी को जांच अधिकारी नामित किया है।
टिहरी हादसे की जांच रिपोर्ट कब तक आएगी?
जांच अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में दुर्घटना के कारण, वाहन विवरण और पीड़ितों की जानकारी शामिल होगी।
टिहरी में वाहन हादसा कहां और कैसे हुआ?
यह हादसा चंबा-कोटी कॉलोनी मोटर मार्ग पर नैलमल्ला स्थित होटल बागसू महादेव के पास हुआ। वाहन अनियंत्रित होकर सुरक्षा अवरोध तोड़ते हुए 300 मीटर गहरी खाई में गिर गया।
मजिस्ट्रियल जांच में क्या-क्या देखा जाएगा?
जांच में चालक की लापरवाही या नशे की स्थिति, वाहन की तकनीकी खराबी, अत्यधिक गति, सड़क की हालत और चालक के लाइसेंस की वैधता की पड़ताल की जाएगी। वाहन की तकनीकी जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होगी।
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