तेलंगाना में 25,000 से अधिक मेडिकल दुकानें बंद, एआईओसीडी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय बंद के आह्वान पर 20 मई 2026 को तेलंगाना भर में 25,000 से अधिक मेडिकल दुकानें बंद रहीं। अकेले हैदराबाद में 12,000 से ज़्यादा फार्मेसियाँ बंद रहीं, जिससे आम नागरिकों को दवाएँ खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल की वजह
एआईओसीडी और हैदराबाद केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने यह बंद दवाओं से जुड़े नियमों में हालिया संशोधनों और ऑनलाइन फार्मेसियों के कामकाज के विरोध में बुलाया। संगठनों की मुख्य माँगें हैं — दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध, कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा दी जाने वाली भारी छूट पर रोक, और नकली दवाओं से सुरक्षा के कड़े उपाय।
संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसियों और डिजिटल चिकित्सा प्लेटफॉर्मों के अनियंत्रित संचालन से दवाओं का दुरुपयोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस में वृद्धि और जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जीवनरक्षक दवाओं की ज़रूरत वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (डीसीए) ने जनता से अपील की कि वे हड़ताल से घबराएँ नहीं और राज्यभर में ज़रूरी व जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता का आश्वासन दिया।
आम जनता को राहत के इंतज़ाम
डीसीए के महानिदेशक अविनाश मोहंती ने बताया कि एआईओसीडी के तेलंगाना चैप्टर के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया कि अस्पतालों से जुड़ी फार्मेसी दुकानों को खुला रखा जाएगा। आपात स्थिति में दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए एआईओसीडी की जिला शाखाएँ ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगी। कॉर्पोरेट मेडिकल स्टोर्स को भी दुकानें खुली रखने की सलाह दी गई।
जनता 20 मई को आपातकालीन दवाओं से जुड़ी किसी भी परेशानी के लिए स्थानीय ड्रग्स इंस्पेक्टर या डीसीए के सहायक निदेशक से संपर्क कर सकती है। इसके अलावा, डीसीए तेलंगाना का टोल-फ्री नंबर 1800 599 6969 भी उपलब्ध है।
निगरानी और आगे की राह
ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन पूरे राज्य में स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है। विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों को सतर्क रहने और दवाओं की उपलब्धता या जनता की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह हड़ताल उस व्यापक बहस की पृष्ठभूमि में हुई है जो पारंपरिक फार्मेसी व्यवसाय और तेज़ी से बढ़ते ऑनलाइन दवा बाज़ार के बीच चल रही है।