तमिलनाडु राजस्व मंत्री सेंगोट्टैयन का निजी अस्पताल विवाद: 'रिश्तेदारों का है, मुफ्त मिलता है इलाज'
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के राजस्व मंत्री के. ए. सेंगोट्टैयन ने सोमवार, 25 मई को कोयंबटूर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के अपने फैसले पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच थी, जो काम के दबाव के कारण पिछले आठ महीनों से टलती आ रही थी। यह मामला इसलिए विवादास्पद बना क्योंकि सत्तारूढ़ तमिलनाडु विकास कझगम (TVK) सरकार ने पहले घोषणा की थी कि उसके मंत्री सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
सेंगोट्टैयन ने बताया कि वे सामान्यतः साल में दो बार नियमित शारीरिक जांच कराते हैं। सरकारी व्यस्तताओं के कारण यह क्रम टूट गया था, इसलिए उन्होंने अस्पताल में रुककर सभी लंबित जांचें एक साथ पूरी कराने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, डॉक्टरों ने जांच के नतीजे संतोषजनक बताए। जांच पूरी होने के बाद वे अपनी सरकारी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए चेन्नई रवाना हो गए।
निजी अस्पताल चुनने पर सफाई
आलोचनाओं का सीधा जवाब देते हुए सेंगोट्टैयन ने कहा कि जिस अस्पताल में उन्होंने जांच कराई, वह उनके रिश्तेदारों द्वारा संचालित है और वे वर्षों से वहीं इलाज कराते आए हैं। उनके शब्दों में, 'यह एक ऐसा अस्पताल है जिसे मेरे रिश्तेदार चलाते हैं और मैंने हमेशा वहीं इलाज करवाया है। चूँकि मुझे वहाँ मुफ्त में इलाज और सुविधाएँ मिलती हैं, इसलिए मुझे कहीं और जाने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई।' उन्होंने इसे वर्षों से चली आ रही अपनी सामान्य आदत बताया।
सरकारी नीति और विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि TVK सरकार ने सत्ता में आने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के संकल्प के तहत यह नीति घोषित की थी कि मंत्री सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएंगे। ऐसे में एक वरिष्ठ मंत्री का निजी अस्पताल जाना स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में आ गया। आलोचकों का कहना है कि रिश्तेदार के अस्पताल में मुफ्त इलाज लेना नैतिक पारदर्शिता के दृष्टिकोण से भी जाँच का विषय हो सकता है।
अन्य मुद्दों पर मंत्री का बयान
सेंगोट्टैयन ने हवाई अड्डे पर पत्रकारों के अन्य सवालों का भी जवाब दिया। कोयंबटूर में हाल ही में एक लड़की की हत्या के मामले पर उन्होंने कहा कि कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है। कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की योजनाओं पर निर्णय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सरकार की वित्तीय स्थिति के आधार पर लेंगे।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब TVK सरकार अपनी जन-हितैषी छवि को मज़बूत करने में जुटी है। मंत्री की सफाई से विवाद पूरी तरह थमेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा — खासकर तब जब विपक्ष इस मुद्दे को सरकारी नीति की विश्वसनीयता से जोड़कर उठा सकता है।