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पोंगल 2027: तमिलनाडु सरकार ने मुफ्त धोती-साड़ी योजना में किया बड़ा बदलाव, बेहतर कपड़ा और नए रंग

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पोंगल 2027: तमिलनाडु सरकार ने मुफ्त धोती-साड़ी योजना में किया बड़ा बदलाव, बेहतर कपड़ा और नए रंग

सारांश

एक दशक से अधिक समय बाद तमिलनाडु सरकार ने पोंगल की मुफ्त धोती-साड़ी योजना में बड़ा बदलाव किया है — अधिक कॉटन, नए रंग और पहली बार धुली हुई धोतियाँ। ₹642.88 करोड़ की इस योजना से करोड़ों लाभार्थियों और हथकरघा बुनकरों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने पोंगल 2027 के लिए मुफ्त धोती-साड़ी योजना में एक दशक बाद सबसे बड़ा बदलाव किया।
साड़ियों का पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात 90:10 से बदलकर 80:20 किया गया; नया रंग हरा जोड़ा गया।
धोतियों का अनुपात 80:20 से 65:35 किया गया; पहली बार वॉशिंग के बाद वितरण होगा।
उत्पादन लक्ष्य: 1.7764 करोड़ साड़ियाँ और 1.7722 करोड़ धोतियाँ ; कुल लागत ₹642.88 करोड़ ।
सरकार ₹300 करोड़ की पहली किस्त पहले ही जारी कर चुकी है।
वितरण को-ऑपटेक्स , तमिलनाडु टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन और तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के माध्यम से होगा।

तमिलनाडु सरकार ने पोंगल 2027 के लिए अपनी वार्षिक मुफ्त धोती-साड़ी उपहार योजना में एक दशक से भी अधिक समय बाद सबसे बड़ा सुधार किया है — बेहतर कपड़ा गुणवत्ता, अधिक कॉटन अनुपात और नए रंग विकल्पों के साथ। 1 जुलाई 2026 को हथकरघा एवं खादी विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के तहत यह बदलाव लागू किए गए हैं, जिनसे राज्य के करोड़ों लाभार्थियों और हथकरघा बुनकरों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

साड़ियों में क्या बदला

नई व्यवस्था के अनुसार, मुफ्त साड़ियाँ अब 60 पॉली-कॉटन धागे से बुनी जाएंगी, जिसमें पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात 80:20 होगा। पहले यह अनुपात 90:10 था, यानी कॉटन की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे ये साड़ियाँ खासकर गर्मियों में अधिक आरामदायक होंगी। साड़ियों का आकार पूर्ववत 5.5 मीटर लंबाई और 45 इंच चौड़ाई का रहेगा। नई साड़ियों में सिल्वर या कॉपर रंग की पॉलिएस्टर बॉर्डर जोड़ी गई है। रंग विकल्पों में पहले से उपलब्ध हल्के नीले, गुलाबी और आइवरी सफेद के साथ अब हरा रंग भी शामिल किया गया है।

धोतियों में सुधार

मुफ्त धोतियाँ अब 40 ग्रे पॉली-कॉटन धागे से बुनी जाएंगी, जिसमें पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात 65:35 होगा — पहले यह 80:20 था। प्रत्येक धोती की लंबाई 2 मीटर और चौड़ाई 50 इंच होगी तथा इसमें रंगीन पॉलिएस्टर बॉर्डर होगी। उल्लेखनीय यह है कि पहली बार धोतियों को वॉशिंग के बाद वितरित किया जाएगा, जो गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में एक नया कदम है।

उत्पादन लक्ष्य और बजट

सरकार ने पोंगल 2027 के लिए 1.7764 करोड़ साड़ियों और 1.7722 करोड़ धोतियों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जो पिछले तीन वर्षों के बराबर है। गौरतलब है कि जिला कलेक्टरों ने अनुमानित मांग के आधार पर 2.27 करोड़ से अधिक साड़ियों और 2.25 करोड़ से अधिक धोतियों की माँग की थी, परंतु नए डिजाइन लागू करने के लिए सीमित समय को देखते हुए सरकार ने उत्पादन नहीं बढ़ाया। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत ₹642.88 करोड़ है। 2026-27 के राज्य बजट में इस मद के लिए ₹606.94 करोड़ का प्रावधान था, और सरकार उत्पादन शुरू कराने के लिए ₹300 करोड़ की पहली किस्त पहले ही जारी कर चुकी है।

वितरण तंत्र और खरीद प्रक्रिया

इन कपड़ों का उत्पादन हथकरघा और पावरलूम बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से होगा। सरकारी संस्था को-ऑपटेक्स और तमिलनाडु टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन सहकारी बुनकर समितियों से खरीद करेंगे, और इन्हें तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के ज़रिए लाभार्थियों तक पहुँचाया जाएगा। समय पर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक निविदाओं के माध्यम से धागे की खरीद की भी अनुमति दी गई है। यह भी तय किया गया है कि पोंगल 2026 योजना का बचा हुआ स्टॉक इस वर्ष दीपावली पर वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थियों को वितरित किया जाएगा।

बुनकरों और लाभार्थियों पर असर

सेलम के हथकरघा बुनकरों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नए डिजाइन और बेहतर गुणवत्ता से इन कपड़ों की माँग और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे। समय पर धन जारी होने से बुनकरों को भुगतान में देरी की समस्या से राहत मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव से सहकारी स्पिनिंग मिलों में धागे का उत्पादन बढ़ेगा और निर्माण प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित होगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार हथकरघा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कपड़े की गुणवत्ता को लेकर लाभार्थियों की शिकायतें भी उतनी ही पुरानी हैं। कॉटन अनुपात में सुधार और वॉशिंग के बाद वितरण जैसे कदम सही दिशा में हैं, पर असली सवाल यह है कि जिला कलेक्टरों की 2.27 करोड़ साड़ियों की माँग के मुकाबले केवल 1.77 करोड़ का उत्पादन लक्ष्य रखना कितने लाभार्थियों को योजना से बाहर रखेगा। हथकरघा बुनकरों के लिए समय पर भुगतान की बात सराहनीय है, परंतु सहकारी समितियों की क्षमता और अल्पकालिक निविदाओं पर निर्भरता दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोंगल 2027 के लिए तमिलनाडु की मुफ्त धोती-साड़ी योजना में क्या बदला है?
तमिलनाडु सरकार ने साड़ियों का पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात 90:10 से बदलकर 80:20 किया है और हरा रंग नया जोड़ा है। धोतियों का अनुपात 80:20 से 65:35 किया गया है और पहली बार इन्हें वॉशिंग के बाद वितरित किया जाएगा।
पोंगल 2027 धोती-साड़ी योजना की कुल लागत कितनी है?
इस योजना की कुल अनुमानित लागत ₹642.88 करोड़ है। 2026-27 के राज्य बजट में ₹606.94 करोड़ का प्रावधान था, और सरकार ₹300 करोड़ की पहली किस्त पहले ही जारी कर चुकी है।
पोंगल 2027 के लिए कितनी साड़ियाँ और धोतियाँ बनाई जाएंगी?
सरकार ने 1.7764 करोड़ साड़ियों और 1.7722 करोड़ धोतियों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। यह पिछले तीन वर्षों के बराबर है, जबकि जिला कलेक्टरों ने 2.27 करोड़ से अधिक साड़ियों और 2.25 करोड़ से अधिक धोतियों की माँग की थी।
इन कपड़ों का वितरण किसके माध्यम से होगा?
को-ऑपटेक्स और तमिलनाडु टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन सहकारी बुनकर समितियों से खरीद करेंगे। इसके बाद तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन इन्हें लाभार्थियों तक पहुँचाएगा।
इस बदलाव से हथकरघा बुनकरों को क्या फायदा होगा?
नए डिजाइन और बेहतर गुणवत्ता से हथकरघा और पावरलूम बुनकर सहकारी समितियों को अधिक ऑर्डर मिलेंगे। समय पर धन जारी होने से बुनकरों को भुगतान में देरी की समस्या से राहत मिलेगी और सहकारी स्पिनिंग मिलों में धागे का उत्पादन भी बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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