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त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट: गोमती नदी से 3 जिलों को मिलेगा पेयजल, भूजल निर्भरता होगी कम

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त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट: गोमती नदी से 3 जिलों को मिलेगा पेयजल, भूजल निर्भरता होगी कम

सारांश

त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट अब सिर्फ कागज़ों में नहीं — मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मिशन मोड में काम का आदेश दिया है। गोमती नदी से 3 जिलों को पेयजल देने की योजना भूजल पर निर्भरता और आयरन-प्रदूषण की दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 24 जून 2026 को त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
पहले चरण में गोमती नदी के जल से उदयपुर, विश्रामगंज, विशालगढ़ और अगरतला में पेयजल आपूर्ति का प्रस्ताव।
परियोजना राज्य की 12 नदियों के अतिरिक्त सतही जल का उपयोग करेगी और भूजल निर्भरता में उल्लेखनीय कमी लाएगी।
राज्य के कई हिस्सों में भूजल में अत्यधिक आयरन की पुरानी समस्या के समाधान में भी सहायक होगी।
महारानी बैराज, उदयपुर से जल उद्ग्रहण और ट्रांसमिशन पाइपलाइन, जलाशय व जल-शोधन संयंत्र निर्माण की योजना प्रस्तावित।
बैठक में वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय , स्पीकर राम पाड़ा जमातिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने बुधवार, 24 जून 2026 को अगरतला में प्रस्तावित त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें गोमती सहित राज्य की 12 प्रमुख नदियों के अतिरिक्त सतही जल का उपयोग कर टिकाऊ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। साहा ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल अगरतला की वर्तमान ज़रूरतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे राज्य की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं को भी संबोधित करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक की शुरुआत में सुशासन विभाग के सचिव किरण गिट्टे ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें अगरतला शहर की मौजूदा और भविष्य की पेयजल माँग, वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था की कमियों और गोमती नदी पर आधारित दीर्घकालिक जलापूर्ति परियोजना के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया गया।

गिट्टे ने बताया कि अगरतला की पेयजल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भूजल स्रोतों पर निर्भर है। बढ़ती आबादी, तीव्र शहरीकरण और शुष्क मौसम में बार-बार उत्पन्न होने वाले जल-संकट को देखते हुए उन्होंने सतही जल पर आधारित टिकाऊ विकल्प विकसित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

परियोजना की रूपरेखा

प्रस्तावित त्रिपुरा वॉटर ग्रिड के पहले चरण में गोमती नदी के जल का उपयोग उदयपुर, विश्रामगंज, विशालगढ़ और अगरतला — जो तीन जिलों में फैले हैं — में पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा। उदयपुर के महारानी बैराज क्षेत्र से जल उद्ग्रहण और ट्रांसमिशन पाइपलाइन, जलाशय तथा जल-शोधन सुविधाओं के निर्माण की प्रस्तावित योजना पर भी विचार-विमर्श हुआ।

गौरतलब है कि गोमती नदी त्रिपुरा की आठ प्रमुख नदियों में से एक है, जो राज्य के बड़े भूभाग से होकर पड़ोसी देश बांग्लादेश में प्रवाहित होती है। बैठक में शुष्क मौसम में जल-संग्रहण और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग कच्चे जल जलाशय बनाने पर भी सहमति बनी।

भूजल की समस्या और समाधान

अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के लागू होने से भूजल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही, राज्य के कई हिस्सों में भूजल में अत्यधिक आयरन की लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान वर्षा जल संचयन को भी प्राथमिकता देने का निर्देश दिया, ताकि जल-अभाव के समय उसका उपयोग किया जा सके।

मुख्यमंत्री का संदेश

साहा ने कहा, 'अगर पक्का इरादा और लगन हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। दूर की सोच अक्सर शानदार उपलब्धियों की नींव रखती है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई ऐसी पहलें जो कभी असंभव मानी जाती थीं, वे कुशलता, प्रतिबद्धता और दूरदर्शी योजना के कारण साकार हो चुकी हैं। उन्होंने मिशन मोड में काम करने और व्यर्थ हो रहे जल का सदुपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस बैठक में वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय, त्रिपुरा विधानसभा के स्पीकर राम पाड़ा जमातिया, अगरतला नगर निगम के मेयर एवं विधायक दीपक मजूमदार, विधायक अभिषेक देबरॉय, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव अभिषेक सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव पी.के. गोयल और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। परियोजना का विस्तृत क्रियान्वयन रोडमैप आने वाले हफ्तों में अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में ऐसी जल-परियोजनाओं की घोषणाएँ पहले भी होती रही हैं जो बजट और समयसीमा दोनों में पिछड़ गईं। गोमती नदी का बांग्लादेश में प्रवाहित होना एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू है जिसे जल-उद्ग्रहण योजना में सावधानीपूर्वक संबोधित करना होगा। भूजल में आयरन की समस्या दशकों से बनी हुई है और इसका समाधान केवल तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक निरंतरता की भी माँग करता है। जब तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, बजट आवंटन और समयबद्ध रोडमैप सार्वजनिक नहीं होता, यह घोषणा एक और उच्च-स्तरीय बैठक से अधिक नहीं मानी जाएगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट क्या है?
यह त्रिपुरा सरकार की एक प्रस्तावित दीर्घकालिक जलापूर्ति परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य की 12 नदियों के अतिरिक्त सतही जल का उपयोग करके पूरे राज्य में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके पहले चरण में गोमती नदी से उदयपुर, विश्रामगंज, विशालगढ़ और अगरतला को पानी देने की योजना है।
इस परियोजना से भूजल की समस्या कैसे हल होगी?
अधिकारियों के अनुसार, सतही जल पर आधारित आपूर्ति व्यवस्था लागू होने से भूजल पर निर्भरता काफी कम होगी। इससे राज्य के कई हिस्सों में भूजल में अत्यधिक आयरन की लंबे समय से चली आ रही समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
गोमती नदी से जल उद्ग्रहण कहाँ से होगा?
प्रस्तावित योजना के अनुसार उदयपुर के महारानी बैराज क्षेत्र से जल उद्ग्रहण किया जाएगा। इसके साथ ट्रांसमिशन पाइपलाइन, जलाशय और जल-शोधन संयंत्र जैसे बुनियादी ढाँचे के निर्माण की भी योजना है।
इस परियोजना से कौन-से क्षेत्र लाभान्वित होंगे?
पहले चरण में उदयपुर, विश्रामगंज, विशालगढ़ और अगरतला — जो तीन जिलों में फैले हैं — को लाभ मिलेगा। दीर्घकालिक लक्ष्य पूरे त्रिपुरा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस परियोजना को लेकर क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री साहा ने मिशन मोड में काम करने, व्यर्थ हो रहे जल का सदुपयोग करने और मानसून में वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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