अगरतला बाढ़ से बचाव: त्रिपुरा सरकार की ₹1,000 करोड़ की योजना, गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव भी
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 12 जुलाई 2026 को अगरतला में दो बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की घोषणा की — एक ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा योजना और गोमती नदी के सतही जल को राजधानी तक लाने की एक महत्वाकांक्षी नदी-जोड़ो पहल। दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की जल निकासी क्षमता को मज़बूत करना और भूजल पर निर्भरता घटाना है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री साहा ने अगरतला में एक नवनिर्मित जलाशय के उद्घाटन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा योजना में दो सुरक्षात्मक तटबंध और तीन अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन बनाए जाएँगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना फंड की उपलब्धता के आधार पर चरणों में लागू की जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब जुलाई-अगस्त 2024 में त्रिपुरा में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य को भारी नुकसान पहुँचाया था। उस अनुभव के मद्देनज़र साहा ने सभी विभागों को वर्तमान मानसून सीज़न के दौरान हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
आपातकालीन तैयारी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निम्नलिखित कदम उठाने के आदेश दिए: बचाव उपकरण, नावें और राहत शिविर तैयार रखना; भोजन, पेयजल, दवाएँ और आवश्यक सामग्री का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना; चौबीसों घंटे नदी के जलस्तर और तटबंधों की निगरानी करना; तथा जोखिम वाले और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर चेतावनी जारी करना।
गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव
साहा ने बताया कि सरकार अगरतला से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित गोमती नदी से सतही जल लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इससे राजधानी की आयरन-युक्त भूजल पर निर्भरता कम होगी, जो लंबे समय से पेयजल आपूर्ति के लिए बाधा बनी हुई है।
साहा के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को तकनीकी रूप से व्यवहार्य पाया है, क्योंकि अगरतला में पहले से ही एक व्यापक जल वितरण नेटवर्क मौजूद है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसमें तकनीकी व्यवहार्यता, गोमती में साल भर जल उपलब्धता, मोड़े जा सकने वाले जल की मात्रा तथा पर्यावरणीय व इंजीनियरिंग पहलुओं का आकलन होगा।
गौरतलब है कि यदि गोमती नदी से जल लाने की योजना सफल रही, तो इस अवधारणा को राज्य की अन्य नदियों तक भी विस्तारित किया जा सकता है — विशेषकर उन 8 नदियों के जल का उपयोग करने के लिए जो त्रिपुरा से बहकर बांग्लादेश में चली जाती हैं।
बांग्लादेश कनेक्शन और प्रदूषण का मुद्दा
त्रिपुरा में कुल 12 बड़ी और मध्यम नदियाँ हैं, जिनमें से 8 अलग-अलग जिलों से बहकर बांग्लादेश की प्रमुख नदियों में मिलती हैं। साहा ने बताया कि एक पूर्व बैठक में बांग्लादेश के एक मंत्री ने चिंता जताई थी कि त्रिपुरा की कुछ नहरों का प्रदूषित जल सीमा पार के निवासियों में त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न कर रहा है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साहा ने कहा, "इसे देखते हुए हमने पड़ोसी देश में जाने से पहले नहर के पानी को साफ करने के लिए एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला किया है।" यह कदम द्विपक्षीय जल-प्रबंधन सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
नदी-जोड़ो परियोजना अभी योजना के चरण में है और DPR पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बाढ़-सुरक्षा परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। मानसून सीज़न के दौरान राज्य की आपदा प्रबंधन मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।