13 जुलाई 2026
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अगरतला बाढ़ से बचाव: त्रिपुरा सरकार की ₹1,000 करोड़ की योजना, गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव भी

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अगरतला बाढ़ से बचाव: त्रिपुरा सरकार की ₹1,000 करोड़ की योजना, गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव भी

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला के लिए ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा परियोजना और गोमती नदी से सतही जल लाने की महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की। 2024 की विनाशकारी बाढ़ के बाद यह राज्य का सबसे बड़ा जल-प्रबंधन दांव है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 12 जुलाई 2026 को अगरतला के लिए ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा परियोजना की घोषणा की।
योजना में दो सुरक्षात्मक तटबंध और तीन अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन शामिल हैं; फंड उपलब्धता के अनुसार चरणों में लागू होगी।
गोमती नदी से सतही जल लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है; अंतिम निर्णय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के बाद होगा।
जुलाई-अगस्त 2024 की विनाशकारी बाढ़ के मद्देनज़र सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
बांग्लादेश में प्रदूषित जल प्रवाह रोकने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है।
त्रिपुरा की 12 नदियों में से 8 बांग्लादेश में प्रवाहित होती हैं; नदी-जोड़ो अवधारणा को भविष्य में इन तक विस्तारित किया जा सकता है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 12 जुलाई 2026 को अगरतला में दो बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की घोषणा की — एक ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा योजना और गोमती नदी के सतही जल को राजधानी तक लाने की एक महत्वाकांक्षी नदी-जोड़ो पहल। दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की जल निकासी क्षमता को मज़बूत करना और भूजल पर निर्भरता घटाना है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री साहा ने अगरतला में एक नवनिर्मित जलाशय के उद्घाटन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा योजना में दो सुरक्षात्मक तटबंध और तीन अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन बनाए जाएँगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना फंड की उपलब्धता के आधार पर चरणों में लागू की जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब जुलाई-अगस्त 2024 में त्रिपुरा में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य को भारी नुकसान पहुँचाया था। उस अनुभव के मद्देनज़र साहा ने सभी विभागों को वर्तमान मानसून सीज़न के दौरान हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।

आपातकालीन तैयारी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निम्नलिखित कदम उठाने के आदेश दिए: बचाव उपकरण, नावें और राहत शिविर तैयार रखना; भोजन, पेयजल, दवाएँ और आवश्यक सामग्री का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना; चौबीसों घंटे नदी के जलस्तर और तटबंधों की निगरानी करना; तथा जोखिम वाले और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर चेतावनी जारी करना।

गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव

साहा ने बताया कि सरकार अगरतला से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित गोमती नदी से सतही जल लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इससे राजधानी की आयरन-युक्त भूजल पर निर्भरता कम होगी, जो लंबे समय से पेयजल आपूर्ति के लिए बाधा बनी हुई है।

साहा के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को तकनीकी रूप से व्यवहार्य पाया है, क्योंकि अगरतला में पहले से ही एक व्यापक जल वितरण नेटवर्क मौजूद है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसमें तकनीकी व्यवहार्यता, गोमती में साल भर जल उपलब्धता, मोड़े जा सकने वाले जल की मात्रा तथा पर्यावरणीय व इंजीनियरिंग पहलुओं का आकलन होगा।

गौरतलब है कि यदि गोमती नदी से जल लाने की योजना सफल रही, तो इस अवधारणा को राज्य की अन्य नदियों तक भी विस्तारित किया जा सकता है — विशेषकर उन 8 नदियों के जल का उपयोग करने के लिए जो त्रिपुरा से बहकर बांग्लादेश में चली जाती हैं।

बांग्लादेश कनेक्शन और प्रदूषण का मुद्दा

त्रिपुरा में कुल 12 बड़ी और मध्यम नदियाँ हैं, जिनमें से 8 अलग-अलग जिलों से बहकर बांग्लादेश की प्रमुख नदियों में मिलती हैं। साहा ने बताया कि एक पूर्व बैठक में बांग्लादेश के एक मंत्री ने चिंता जताई थी कि त्रिपुरा की कुछ नहरों का प्रदूषित जल सीमा पार के निवासियों में त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न कर रहा है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साहा ने कहा, "इसे देखते हुए हमने पड़ोसी देश में जाने से पहले नहर के पानी को साफ करने के लिए एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला किया है।" यह कदम द्विपक्षीय जल-प्रबंधन सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

नदी-जोड़ो परियोजना अभी योजना के चरण में है और DPR पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बाढ़-सुरक्षा परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। मानसून सीज़न के दौरान राज्य की आपदा प्रबंधन मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की यह बाढ़-सुरक्षा योजना 2024 की तबाही के बाद एक ज़रूरी कदम है, लेकिन 'चरणों में फंड उपलब्धता के अनुसार' जैसी शर्तें इसकी समयसीमा को अनिश्चित बनाती हैं। गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव तकनीकी रूप से आशाजनक है, पर DPR पूरी होने से पहले इसे सार्वजनिक करना अपेक्षाएँ बढ़ाने का जोखिम उठाता है। बांग्लादेश को जाने वाले प्रदूषित जल पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्णय द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक है, परंतु इसकी समयसीमा और वित्तपोषण का कोई ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। असली परीक्षा यह होगी कि घोषणाएँ मानसून के बाद भी गति बनाए रखती हैं या अगली आपदा तक ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगरतला की ₹1,000 करोड़ की बाढ़-सुरक्षा परियोजना में क्या शामिल है?
इस परियोजना में दो सुरक्षात्मक तटबंध और तीन अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन बनाए जाएँगे, जिससे शहर की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और शहरी बाढ़ का खतरा कम होगा। मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, यह योजना फंड उपलब्धता के आधार पर चरणों में लागू की जाएगी।
गोमती नदी-जोड़ो प्रस्ताव क्या है और यह अभी किस स्थिति में है?
यह प्रस्ताव अगरतला से लगभग 60 किलोमीटर दूर गोमती नदी से सतही जल लाकर राजधानी की आयरन-युक्त भूजल पर निर्भरता घटाने की योजना है। यह अभी योजना के चरण में है और अंतिम निर्णय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
त्रिपुरा सरकार ने 2024 की बाढ़ के बाद क्या आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं?
मुख्यमंत्री साहा ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने, बचाव उपकरण और नावें तैयार रखने, भोजन-दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखने और नदी के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। जोखिम वाले और निचले इलाकों में समय पर चेतावनी जारी करना भी अनिवार्य किया गया है।
बांग्लादेश में जाने वाले प्रदूषित जल के मुद्दे पर त्रिपुरा ने क्या कदम उठाया है?
बांग्लादेश के एक मंत्री द्वारा त्रिपुरा की नहरों के प्रदूषित जल से सीमा पार स्वास्थ्य समस्याओं की चिंता जताए जाने के बाद, मुख्यमंत्री साहा ने सीमा पार जाने से पहले नहर के पानी को शुद्ध करने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का निर्णय लिया है।
त्रिपुरा में कितनी नदियाँ हैं और बांग्लादेश से उनका क्या संबंध है?
त्रिपुरा में 12 बड़ी और मध्यम नदियाँ हैं, जिनमें से 8 अलग-अलग जिलों से बहकर बांग्लादेश की प्रमुख नदियों में मिलती हैं। इसके अलावा कई नहरों का जल भी बांग्लादेश में प्रवाहित होता है, जिससे जल-प्रबंधन में द्विपक्षीय सहयोग की आवश्यकता बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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