तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी संकट: 150 मंजूर सीटों के बावजूद सिर्फ 50 एमबीबीएस दाखिले
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के तुरा मेडिकल कॉलेज में टीचिंग फैकल्टी की गंभीर कमी के कारण 150 एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति के बावजूद प्रतिवर्ष केवल 50 छात्रों को ही दाखिला मिल पा रहा है। 9 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, संस्थान नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा निर्धारित फैकल्टी मानकों को पूरा करने में अब तक असमर्थ रहा है, जिससे राज्य में चिकित्सा शिक्षा के भविष्य को लेकर चिंताएँ गहरी हो गई हैं।
समीक्षा बैठक में उभरा मुद्दा
7 अक्टूबर 2026 को राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के कमिश्नर एवं सेक्रेटरी जोराम बेडा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भर्ती प्रक्रिया की धीमी गति और निर्माण कार्य की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने माना कि मौजूदा स्टाफिंग स्तर NMC की अनिवार्य आवश्यकताओं से काफी पीछे है।
फैकल्टी की कमी का विस्तृत चित्र
आवश्यक 97 फैकल्टी पदों के सापेक्ष वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। प्रोफेसर स्तर पर 86 प्रतिशत और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर 85 प्रतिशत भर्ती हो चुकी है, किंतु सीनियर रेजिडेंट्स के पद केवल 52 प्रतिशत और असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद महज 36 प्रतिशत ही भरे जा सके हैं। यह असंतुलन दर्शाता है कि जूनियर और मध्य-स्तरीय शिक्षण पदों पर संकट अधिक गहरा है।
विभाग पाँच महीनों में तीन बार भर्ती विज्ञापन जारी कर चुका है। इसके अतिरिक्त, गारो हिल्स क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों — विशेषतः वेस्ट गारो हिल्स के बाहर तैनात डॉक्टरों — की पहचान संभावित प्रतिनियुक्ति के लिए की गई है। हालाँकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तैनाती से अन्य ज़िलों की स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
बुनियादी ढाँचे की स्थिति
निर्माण के मोर्चे पर परियोजना का कुल काम 84 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। तुरा सिविल हॉस्पिटल कैंपस में 80 बेड वाले ब्लॉक का निर्माण 55 प्रतिशत और 150 बेड वाले ब्लॉक का 25 प्रतिशत पूरा हुआ है। 80 बेड वाले ब्लॉक का काम 31 दिसंबर 2026 तक, बड़े ब्लॉक का काम 30 जून 2027 तक और डोलडेग्रे स्थित एकेडमिक ब्लॉक का काम 31 मार्च 2027 तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है।
आम जनता और छात्रों पर असर
इस देरी ने मेघालय के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए स्थानीय अवसरों की सीमितता को उजागर किया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पुनः पुष्टि की है कि तुरा मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए वार्षिक शुल्क वही रहेगा जो शिलॉन्ग मेडिकल कॉलेज में राज्य कोटे के अंतर्गत लिया जाता है — अर्थात ₹33,000 प्रति वर्ष। यह राहत की बात है, परंतु सीट की उपलब्धता जब तक नहीं बढ़ती, इसका लाभ सीमित रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य राज्यों में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी संकट एक सामान्य चुनौती बना हुआ है। राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि केवल नई भर्तियाँ करने से, विशेषकर वरिष्ठ फैकल्टी की कमी को देखते हुए, NMC के मानकों को पूरा करना संभव नहीं होगा।
आगे की राह
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता दो स्तरों पर है — स्टाफ की कमी को दूर करना और बुनियादी ढाँचे के कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करना। यदि ये दोनों लक्ष्य हासिल हो जाते हैं, तो संस्थान पूर्ण क्षमता पर चलकर मेघालय के चिकित्सा शिक्षा परिदृश्य को बदलने की स्थिति में होगा। भर्ती और निर्माण दोनों मोर्चों पर आने वाले महीने निर्णायक रहेंगे।