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तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी संकट: 97 में से सिर्फ 37 टीचिंग स्टाफ, मेघालय सरकार ने बुलाई समीक्षा बैठक

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तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी संकट: 97 में से सिर्फ 37 टीचिंग स्टाफ, मेघालय सरकार ने बुलाई समीक्षा बैठक

सारांश

मेघालय के तुरा मेडिकल कॉलेज में NMC मानक के मुकाबले केवल 37 में से 97 ज़रूरी टीचिंग स्टाफ उपलब्ध हैं। एक साल से अधिक के प्रयासों और तीन भर्ती विज्ञापनों के बावजूद कमी जस की तस है। सरकार अब पहले अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा कर गारो हिल्स को स्वास्थ्य सेवाएँ देने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

प्रस्तावित तुरा मेडिकल कॉलेज में NMC मानक के अनुसार 97 टीचिंग स्टाफ की ज़रूरत है, लेकिन अभी केवल 37 उपलब्ध हैं।
प्रति वर्ष 50 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश के लिए यह न्यूनतम आवश्यकता है।
जोरम बेडा की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर 2026 को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
फैकल्टी जुटाने के लिए पिछले एक वर्ष में तीन बार भर्ती विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं।
बैठक में तुरा सिविल अस्पताल में निर्माणाधीन 150-बिस्तर और 80-बिस्तर ब्लॉक को प्राथमिकता से पूरा करने की सिफारिश की गई।
इन ब्लॉकों के चालू होने से गारो हिल्स क्षेत्र को तत्काल स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सकेगा।

मेघालय के प्रस्तावित तुरा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की गंभीर कमी बनी हुई है — नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुसार प्रति वर्ष 50 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश के लिए 97 टीचिंग स्टाफ की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल केवल 37 टीचिंग स्टाफ ही उपलब्ध हैं। 1 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों ने बताया कि यह कमी कॉलेज को समय पर चालू करने में सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

इस स्थिति का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. जोरम बेडा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक, तुरा सिविल अस्पताल और तुरा एमसीएच अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट तथा मैनपावर असेसमेंट कमेटी के सदस्य शामिल हुए।

बैठक में मेडिकल कॉलेज को संचालित करने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई और फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया।

फैकल्टी जुटाने के लिए क्या-क्या कोशिशें हुईं

विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अधिक समय से टीचिंग स्टाफ की व्यवस्था के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें नौकरीपेशा इच्छुक एवं योग्य डॉक्टरों की पहचान करना, भर्ती के लिए तीन बार अलग-अलग विज्ञापन जारी करना तथा तुरा में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधी बातचीत करना शामिल है।

गौरतलब है कि इन तमाम कोशिशों के बावजूद उपलब्ध फैकल्टी सदस्यों की संख्या NMC की न्यूनतम आवश्यकता से 60 से अधिक कम बनी हुई है, जो दर्शाता है कि गारो हिल्स जैसे दूरदराज़ इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करना कितना कठिन है।

अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देने का सुझाव

मौजूदा स्थिति को देखते हुए समीक्षा बैठक में यह सिफारिश की गई कि तुरा सिविल अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन 150-बिस्तर और 80-बिस्तर वाले अस्पताल ब्लॉक का काम प्राथमिकता से पूरा किया जाए और उन्हें मरीजों की देखभाल के लिए जल्द से जल्द चालू किया जाए।

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि तुरा में तैयार हो रहा बड़ा स्वास्थ्य ढाँचा गारो हिल्स क्षेत्र के निवासियों को लाभ पहुँचाना शुरू कर दे, भले ही मेडिकल कॉलेज तत्काल पूरी क्षमता से संचालित न हो सके।

आम जनता पर असर

इन नए अस्पताल ब्लॉकों के चालू होने से तुरा सिविल अस्पताल की कुल बेड क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह अस्पताल भविष्य में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में भी काम करेगा, जिससे इस क्षेत्र में दीर्घकालिक चिकित्सा शिक्षा की नींव तैयार होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब मेघालय के दूरदराज़ इलाकों — विशेष रूप से गारो हिल्स — में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी चली आ रही है और निवासियों को उपचार के लिए अक्सर दूर-दराज़ शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

आगे की राह

विभाग के अनुसार, अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर का काम जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, अधिकारी आवश्यक टीचिंग फैकल्टी जुटाने के प्रयास भी जारी रखेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि NMC की आवश्यकताओं को पूरा करने और मेडिकल कॉलेज को विधिवत मान्यता दिलाने की दिशा में ठोस कदम जल्द उठाए जाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर-पूर्व भारत के दूरदराज़ इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने की उस पुरानी संरचनात्मक विफलता का प्रतिबिंब है जो दशकों से बनी हुई है। एक साल से अधिक समय और तीन भर्ती विज्ञापनों के बाद भी जब 60 से ज़्यादा पदों की कमी हो, तो यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा वेतनमान और सुविधाएँ गारो हिल्स जैसे क्षेत्रों में प्रतिभाशाली डॉक्टरों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर को पहले पूरा करने की रणनीति व्यावहारिक ज़रूर है, पर जब तक फैकल्टी संकट का दीर्घकालिक समाधान — जैसे विशेष भत्ते, बंधन-रहित सेवा अनुबंध या दूरदराज़ पोस्टिंग को करियर प्रोत्साहन से जोड़ना — नहीं निकाला जाता, तब तक मेडिकल कॉलेज का सपना कागज़ों तक ही सीमित रहेगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुरा मेडिकल कॉलेज में कितने टीचिंग स्टाफ की ज़रूरत है और कितने हैं?
NMC के नियमों के अनुसार प्रति वर्ष 50 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश के लिए 97 टीचिंग स्टाफ चाहिए, जबकि अभी केवल 37 उपलब्ध हैं। यह कमी 60 से अधिक पदों की है और मेडिकल कॉलेज को चालू करने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
मेघालय सरकार ने फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
विभाग ने एक साल से अधिक समय से प्रयास किए हैं — जिनमें तीन बार भर्ती विज्ञापन जारी करना, कार्यरत योग्य डॉक्टरों की पहचान करना और तुरा में मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधी बातचीत करना शामिल है। इन प्रयासों के बावजूद कमी अभी भी बनी हुई है।
तुरा मेडिकल कॉलेज की समीक्षा बैठक में क्या निर्णय हुआ?
1 अक्टूबर 2026 को डॉ. जोरम बेडा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सुझाव दिया गया कि तुरा सिविल अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन 150-बिस्तर और 80-बिस्तर वाले ब्लॉक को प्राथमिकता से पूरा कर मरीजों के लिए चालू किया जाए। इससे मेडिकल कॉलेज पूरी तरह शुरू होने से पहले ही गारो हिल्स के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ मिलने लगेंगी।
नए अस्पताल ब्लॉकों से गारो हिल्स को क्या फायदा होगा?
150-बिस्तर और 80-बिस्तर वाले नए ब्लॉकों के चालू होने से तुरा सिविल अस्पताल की कुल बेड क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह अस्पताल भविष्य में मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में भी काम करेगा, जिससे गारो हिल्स के निवासियों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
क्या तुरा मेडिकल कॉलेज इस साल शुरू हो पाएगा?
फिलहाल फैकल्टी की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज को NMC के मानकों के अनुसार तत्काल पूरी क्षमता से चालू करना संभव नहीं दिखता। सरकार पहले अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने और साथ-साथ टीचिंग स्टाफ जुटाने के प्रयास जारी रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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