अलवर में दो बहनों की कार में बंद होकर दम घुटने से मौत, टीना (8) और लक्ष्मी (5) की गई जान

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अलवर में दो बहनों की कार में बंद होकर दम घुटने से मौत, टीना (8) और लक्ष्मी (5) की गई जान

सारांश

अलवर के खुदानपुरी में खेलते हुए एक क्षतिग्रस्त कार में घुसीं दो बहनें — टीना (8) और लक्ष्मी (5) — दरवाज़ा न खुलने के कारण भीतर फँसी रहीं और दम घुटने से उनकी जान चली गई। चार साल पहले माँ को खो चुके इस परिवार पर अब दूसरी त्रासदी टूट पड़ी है।

मुख्य बातें

टीना (8 वर्ष) और लक्ष्मी (5 वर्ष) की 20 मई को अलवर, राजस्थान के खुदानपुरी इलाके में दम घुटने से मौत हुई।
दोनों बच्चियाँ सुबह 11:30 बजे कार मरम्मत केंद्र के पास खड़ी एक लावारिस क्षतिग्रस्त कार में घुस गईं और दरवाज़ा बंद हो जाने के बाद बाहर नहीं निकल पाईं।
घटना का सीसीटीवी फुटेज पुलिस ने सुरक्षित किया है, जिसमें पूरी घटना कैद है।
कार का इंजन और बैटरी पहले से निकाली जा चुकी थी — वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त था।
चार साल पहले दोनों बच्चियों की माँ की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो चुकी थी; पिता रमेश अकेले परिवार चला रहे थे।
वैशाली नगर पुलिस ने मामले की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है।

राजस्थान के अलवर शहर के खुदानपुरी इलाके में बुधवार, 20 मई को एक दर्दनाक हादसे में दो सगी बहनों की जान चली गई। टीना (8 वर्ष) और लक्ष्मी (5 वर्ष) खेलते-खेलते एक क्षतिग्रस्त कार में घुस गईं और दरवाज़ा अंदर से न खुलने के कारण दम घुटने से उनकी मृत्यु हो गई। दोनों बच्चियों को बेहोश हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

पुलिस और परिजनों के अनुसार, दोनों बच्चियाँ सुबह लगभग 11:30 बजे घर के पास स्थित एक कार मरम्मत केंद्र के निकट खेल रही थीं। उसी दौरान वे वहाँ खड़ी एक लावारिस लाल कार में चली गईं। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें दोनों बहनें वाहन के पास जाती, ड्राइवर की तरफ से अंदर घुसती और दरवाज़ा बंद करती हुई स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।

पुलिस के अनुसार, कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी — उसका इंजन और बैटरी पहले ही निकाल ली गई थी। एक बार दरवाज़ा बंद होने के बाद बच्चियाँ उसे दोबारा नहीं खोल पाईं और भीतर ही फँसी रहीं।

पिता की पीड़ा: दोपहर में लौटे तो बेटियाँ गायब थीं

बच्चियों के पिता रमेश ने बताया कि वे सुबह बच्चों को घर पर छोड़कर काम पर गए थे। उन्होंने कहा, 'जब मैं दोपहर के भोजन के लिए घर लौटा, तो मेरी दोनों बेटियाँ गायब थीं। हमने आसपास खोजबीन की और बाद में उन्हें कार के अंदर बेहोश पाया।' स्थानीय लोगों की मदद से बच्चियों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रमेश ने यह भी बताया कि मरम्मत केंद्र के कर्मचारियों ने पहले भी कई बार बच्चों को उस गाड़ी से दूर करने की कोशिश की थी, परंतु खेल में मशगूल लड़कियाँ बार-बार वापस चली जाती थीं।

परिवार पर दोहरी त्रासदी

यह हादसा उस परिवार के लिए दूसरा बड़ा सदमा है। चार साल पहले ही दोनों बच्चियों की माँ की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो चुकी है। अब पिता रमेश ने अपनी दोनों बेटियाँ भी खो दी हैं। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।

पुलिस जाँच और प्रारंभिक निष्कर्ष

वैशाली नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर गुरुदत्त सैनी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में यह स्पष्ट होता है कि कार में प्रवेश के बाद बच्चियाँ दरवाज़ा नहीं खोल पाईं, जिससे दम घुटने के कारण उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है। सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया गया है।

यह घटना उन अनगिनत हादसों की याद दिलाती है जहाँ छोटे बच्चे बंद वाहनों में फँसकर जान गँवा देते हैं — और लावारिस व क्षतिग्रस्त वाहनों को आबादी वाले इलाकों में खुला छोड़ने के खतरे को एक बार फिर रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीतिगत स्तर पर इसे रोकने का कोई ठोस तंत्र अब तक नहीं बना।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलवर में कार में बंद होकर दम घुटने से किन बच्चियों की मौत हुई?
मृतक बच्चियों की पहचान टीना (8 वर्ष) और लक्ष्मी (5 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सगी बहनें थीं। दोनों राजस्थान के अलवर शहर के खुदानपुरी इलाके की रहने वाली थीं।
क्या घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज है?
हाँ, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें दोनों बहनें क्षतिग्रस्त वाहन के पास जाती, अंदर घुसती और दरवाज़ा बंद करती दिख रही हैं। पुलिस ने इस फुटेज को जाँच के लिए सुरक्षित कर लिया है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
वैशाली नगर पुलिस स्टेशन के SHO गुरुदत्त सैनी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में दम घुटने से मृत्यु की पुष्टि होती है। मामले की विस्तृत जाँच जारी है और सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के रूप में लिया गया है।
मृत बच्चियों के परिवार की क्या स्थिति है?
दोनों बच्चियों के पिता रमेश काम से दोपहर को लौटे तो बेटियाँ लापता थीं। खोजने पर उन्हें कार में बेहोश पाया गया। परिवार पर यह दूसरी बड़ी त्रासदी है — चार साल पहले दोनों बच्चियों की माँ की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो चुकी थी।
राष्ट्र प्रेस
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