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उज्ज्वला योजना से जींद की महिलाओं को धुएं से मुक्ति, रसोई गैस ने बदली ग्रामीण जीवनशैली

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उज्ज्वला योजना से जींद की महिलाओं को धुएं से मुक्ति, रसोई गैस ने बदली ग्रामीण जीवनशैली

सारांश

जींद की ग्रामीण महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना सिर्फ एक सरकारी कनेक्शन नहीं — यह लकड़ी के बोझ, धुएं की तकलीफ और घंटों की मशक्कत से मुक्ति की कहानी है। बाला देवी और रीना रानी जैसी लाभार्थियों के अनुभव बताते हैं कि रसोई गैस ने ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या, स्वास्थ्य और समय को नए अर्थ दिए हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने जींद, हरियाणा की ग्रामीण महिलाओं को रसोई गैस की सुविधा दी है।
लाभार्थी बाला देवी ने बताया कि 2016 से पहले प्रतिदिन सिर पर लकड़ियाँ ढोना और धुएं में खाना पकाना अनिवार्य था।
लाभार्थी रीना रानी के अनुसार, गैस पर खाना अब कुछ ही मिनटों में तैयार होता है — पहले घंटों लगते थे।
योजना के तहत सिलेंडर रियायती दर पर मिलता है और सब्सिडी सीधे महिलाओं के बैंक खाते में भेजी जाती है।
धुएं से होने वाली नेत्र और श्वसन संबंधी परेशानियों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना हरियाणा के जींद ज़िले की ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की महिलाओं के लिए राहत की बड़ी वाहक बनी है। रसोई गैस की सुविधा मिलने से इन महिलाओं को लकड़ी व अन्य परंपरागत ईंधन जुटाने की दैनिक कठिनाई से छुटकारा मिला है और चूल्हे के धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है। जींद की लाभार्थी महिलाओं ने इस योजना को ग्रामीण जीवन के लिए एक सकारात्मक बदलाव बताते हुए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।

पहले की मुश्किलें: सिर पर ईंधन का बोझ

लाभार्थी बाला देवी ने बताया कि वर्ष 2016 से पहले महिलाओं को प्रतिदिन दूर-दूर से लकड़ियाँ लाकर चूल्हा जलाना पड़ता था। सिर पर लकड़ियों का भारी बोझ उठाकर घर लौटना और फिर घंटों धुएं में खाना पकाना उनकी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा था। उन्होंने कहा कि लकड़ी के चूल्हे से उठने वाले धुएं का असर आँखों पर सीधे पड़ता था, जिससे रोज़मर्रा की जिंदगी कठिन हो जाती थी।

बाला देवी के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बाद लकड़ियाँ जुटाने की ज़रूरत काफी हद तक समाप्त हो गई है। गैस पर खाना पकाने से धुएं की समस्या कम हुई है और महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ा है।

समय और मेहनत की बचत — महिलाओं का अनुभव

एक अन्य लाभार्थी रीना रानी ने बताया कि पहले खाना बनाने में काफी समय लग जाता था, जबकि अब गैस पर कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार हो जाता है। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर मिलने से महिलाओं की यह पुरानी समस्या काफी हद तक दूर हुई है और खाना पकाने का तरीका बुनियादी रूप से बदल गया है।

रीना ने आगे जोड़ा कि गैस पर खाना बनाने से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि आँखों को धुएं से होने वाली तकलीफ भी काफी कम हुई है। उनके अनुसार, इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या को सहज और स्वस्थ बनाया है।

सब्सिडी का सीधा लाभ — आर्थिक राहत भी

बाला देवी ने यह भी बताया कि योजना के अंतर्गत सिलेंडर रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाती है। इस प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था से परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना देश भर में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को मुफ़्त एलपीजी कनेक्शन देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके तहत देशभर में करोड़ों कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं।

आम जनता पर असर

जींद की महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि यह योजना न केवल ईंधन की व्यवस्था से जुड़ी है, बल्कि यह महिलाओं के समय, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वायत्तता से भी सीधे जुड़ी है। परंपरागत चूल्हे के धुएं से होने वाली श्वसन और नेत्र संबंधी बीमारियों में कमी आना इस योजना का एक महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ है।

यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब ग्रामीण भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य और उनकी कार्यक्षमता को लेकर नीतिगत चर्चाएँ तेज़ हो रही हैं। आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि रियायती सिलेंडर की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और सब्सिडी व्यवस्था प्रभावी तरीके से जारी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचक यह भी उठाते हैं कि कुछ लाभार्थी सिलेंडर की ऊँची क़ीमत के कारण पुनःभरण नहीं करा पाते और लकड़ी के चूल्हे पर लौटने को मजबूर होते हैं। असली सफलता की कसौटी केवल कनेक्शन की संख्या नहीं, बल्कि यह होनी चाहिए कि महिलाएँ योजना का नियमित और सतत लाभ उठा पा रही हैं या नहीं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना क्या है?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को मुफ़्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को परंपरागत ईंधन और उससे होने वाले धुएं की समस्या से राहत दिलाना है।
उज्ज्वला योजना से महिलाओं को क्या-क्या फायदे हुए हैं?
योजना से महिलाओं को लकड़ी जुटाने की मेहनत से मुक्ति मिली है, खाना पकाने का समय कम हुआ है और चूल्हे के धुएं से होने वाली आँखों व श्वसन संबंधी परेशानियाँ भी घटी हैं। साथ ही सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आने से आर्थिक राहत भी मिल रही है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी कैसे मिलती है?
योजना के तहत सिलेंडर रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है और सब्सिडी की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के ज़रिए सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।
जींद की महिलाओं ने योजना के बारे में क्या कहा?
जींद की लाभार्थी बाला देवी और रीना रानी ने बताया कि योजना से उनकी दिनचर्या आसान हुई है। पहले घंटों लकड़ी पर खाना पकाना पड़ता था, अब गैस पर कुछ मिनटों में भोजन तैयार हो जाता है। दोनों ने इसे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव बताया।
क्या उज्ज्वला योजना का लाभ सभी ग्रामीण महिलाओं को मिलता है?
योजना का लाभ मुख्य रूप से गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों की महिलाओं को दिया जाता है। पात्र परिवारों की महिला मुखिया के नाम पर मुफ़्त एलपीजी कनेक्शन जारी किया जाता है और सब्सिडी डीबीटी के ज़रिए उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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