13 अक्टूबर 2026
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यूपी में बालवाटिका के बच्चों का यू-डायस पोर्टल पर होगा डिजिटल पंजीकरण, 15 दिनों की समय-सीमा तय

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यूपी में बालवाटिका के बच्चों का यू-डायस पोर्टल पर होगा डिजिटल पंजीकरण, 15 दिनों की समय-सीमा तय

सारांश

उत्तर प्रदेश में बालवाटिका के बच्चों का यू-डायस प्लस पोर्टल पर 15 दिनों में शत-प्रतिशत डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए।

मुख्य बातें

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 13 अक्टूबर 2026 को निर्देश जारी किए।
बालवाटिकाओं एवं को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल सेक्शन-4 में दर्ज होगा।
सभी जिलों को 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत त्रुटिरहित डेटा एंट्री पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यह डेटा प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर योजना बनाने में सहायक होगा।
यह पहल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सांख्यिकी ब्यूरो के कार्यालय ज्ञापन के अनुक्रम में आगे बढ़ाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को डिजिटल रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने 13 अक्टूबर 2026 को सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित बालवाटिकाओं और को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत दर्ज कराया जाए। यह पहल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सांख्यिकी ब्यूरो के कार्यालय ज्ञापन के अनुक्रम में आगे बढ़ाई जा रही है।

डेटा एंट्री की प्रक्रिया और पोर्टल का ढाँचा

यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल के सेक्शन-4 'स्टूडेंट डिटेल्स' में बालवाटिकाओं एवं सह-स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण अंकित किया जाएगा। निर्देशों में डेटा एंट्री के दौरान विशेष सावधानी बरतने और त्रुटिरहित जानकारी दर्ज करने पर जोर दिया गया है, ताकि पोर्टल पर उपलब्ध आँकड़े विश्वसनीय एवं नीति-निर्माण में उपयोगी बने रहें।

इसके साथ ही वरिष्ठ विशेषज्ञ (प्री-प्राइमरी), समग्र शिक्षा तथा मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को डेटा की गुणवत्ता का नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा करना भी अनिवार्य किया गया है।

अधिकारियों की ज़िम्मेदारी और समन्वय

सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने और 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, 'बालवाटिका के बच्चों का व्यवस्थित डेटा प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर योजना बनाने और बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने में सहायक होगा। सरकार गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।'

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया, 'बालवाटिकाओं में नामांकित बच्चों का विद्यार्थीवार विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल पर निर्धारित समय-सीमा में शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित दर्ज कराया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। सभी जिलों को 15 दिनों में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।'

आम जनता और बच्चों पर असर

यह पहल ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को औपचारिक विद्यालयी ढाँचे में एकीकृत करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि बालवाटिकाएँ 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए स्कूल-पूर्व शिक्षा का माध्यम हैं, और उनका डिजिटल पंजीकरण नीति-निर्माताओं को नामांकन प्रवृत्तियों, ड्रॉपआउट जोखिम और संसाधन-आवंटन की बेहतर तस्वीर देगा।

डेटा के व्यवस्थित संग्रह से राज्य सरकार को यह समझने में भी सहूलियत होगी कि किन क्षेत्रों में प्री-प्राइमरी शिक्षा की पहुँच अभी भी सीमित है। आने वाले महीनों में इस पोर्टल डेटा के आधार पर बालवाटिका-स्तरीय नीति समीक्षा की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस डेटा का उपयोग नीति-निर्माण में वास्तव में कितना होगा। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी और स्कूल प्रणाली के बीच समन्वय ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रहा है, और महज पोर्टल पर प्रविष्टि से यह खाई नहीं भरती। यह पहल तभी सार्थक होगी जब दर्ज डेटा का उपयोग संसाधन-आवंटन, शिक्षक-तैनाती और ड्रॉपआउट रोकथाम में हो — केवल केंद्रीय सांख्यिकी रिपोर्टिंग के लिए नहीं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में बालवाटिका बच्चों का यू-डायस पोर्टल पर पंजीकरण क्यों किया जा रहा है?
यह पंजीकरण प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के आँकड़ों को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने के लिए किया जा रहा है, ताकि नीति-निर्माताओं को नामांकन, संसाधन और शैक्षिक आवश्यकताओं की सटीक जानकारी मिल सके। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में है।
यू-डायस प्लस पोर्टल पर बालवाटिका डेटा कहाँ दर्ज किया जाएगा?
बालवाटिकाओं और सह-स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का विवरण यू-डायस प्लस पोर्टल के स्टूडेंट मॉड्यूल के सेक्शन-4 'स्टूडेंट डिटेल्स' में दर्ज किया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी का विवरण अलग-अलग अंकित होगा।
डेटा एंट्री की समय-सीमा क्या है और इसकी निगरानी कौन करेगा?
सभी जिलों को 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत डेटा एंट्री पूरी करनी है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशानुसार विकासखंडवार प्रगति की नियमित समीक्षा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी करेंगे, जबकि वरिष्ठ विशेषज्ञ (प्री-प्राइमरी) और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक डेटा गुणवत्ता की निगरानी करेंगे।
बालवाटिका क्या है और यह किन बच्चों के लिए है?
बालवाटिका परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में संचालित स्कूल-पूर्व कक्षाएँ हैं, जो 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करती हैं। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के एकीकरण का हिस्सा है।
इस डिजिटल पंजीकरण से बच्चों को क्या फायदा होगा?
व्यवस्थित डिजिटल डेटा से सरकार को प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने, संसाधनों का सही आवंटन करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी जहाँ प्री-प्राइमरी शिक्षा की पहुँच सीमित है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के अनुसार, यह डेटा प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर योजना बनाने में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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