यूपी चुनाव: कांग्रेस की 150 सीट की मांग अनुचित, 50 भी मिलें तो काफी — सपा सांसद एसपी सिंह पटेल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद एसपी सिंह पटेल ने 30 सितंबर को प्रतापगढ़ में कांग्रेस की कथित 150 विधानसभा सीटों की मांग को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह माँग अनुचित है और यदि कांग्रेस को 50 सीटें भी मिल जाएँ तो उसके लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। साथ ही उन्होंने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विपक्षी दलों पर दिए 'सांपनाथ-नागनाथ-कालिया नाग' वाले बयान की भी आलोचना की।
कांग्रेस की सीट मांग पर सपा का रुख
एसपी सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं और उनमें से लगभग आधी — यानी 150 सीटें — माँगना किसी भी गठबंधन सहयोगी के लिए अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कई क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त उम्मीदवार भी नहीं हैं, और यदि सीट बंटवारे की नौबत आई तो संभव है कि पार्टी गठबंधन से ही प्रत्याशी माँगे। उनके अनुसार इस तरह की अनुचित माँग गठबंधन की एकता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
पटेल ने यह भी संकेत दिया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को कुछ लोगों ने इस माँग के लिए प्रभावित किया हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी चुनाव में पर्याप्त समय है और आपसी बातचीत से सीट बंटवारे का हल निकाला जाएगा। उनके मुताबिक, गठबंधन में जिस पार्टी की स्थिति जितनी मजबूत हो — विधायकों और सांसदों की संख्या के लिहाज से — उसे उतना ही सम्मान और सीटें मिलनी चाहिए।
केशव मौर्य के बयान पर आपत्ति
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा को 'सांपनाथ', बसपा को 'नागनाथ' और कांग्रेस को 'कालिया नाग' बताया था। इस पर एसपी सिंह पटेल ने कहा कि केशव मौर्य को ऐसी भाषा से परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान अक्सर मौर्य देते रहते हैं, लेकिन इससे विपक्ष के समर्थन आधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा — बल्कि पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और अन्य वंचित वर्ग और अधिक एकजुट होंगे। पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछड़े वर्ग के नेताओं का उपयोग केवल अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए करती है।
धर्म और राजनीति पर सपा सांसद का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'कालनेमि' वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पटेल ने कहा कि देवी-देवता किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं — वे समस्त हिंदू समाज की आस्था के प्रतीक हैं। उन्होंने योगी के एक पुराने बयान का हवाला दिया जिसमें कथित तौर पर हनुमान जी को दलित समाज से जोड़ा गया था। पटेल ने कहा कि देवी-देवताओं को जाति के आधार पर विभाजित करना उचित नहीं है और धर्म को व्यक्तिगत आस्था का विषय रहने देना चाहिए, राजनीतिक हथियार नहीं बनाना चाहिए।
पटेल ने मंदिर निर्माण से जुड़े धन के इस्तेमाल को लेकर भी कई आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में सामने आए कथित विवादों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े स्तर पर कथित धन की हेराफेरी का आरोप केवल एक ड्राइवर पर डालना संदेह पैदा करता है। उल्लेखनीय है कि ये सभी आरोप एसपी सिंह पटेल ने लगाए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रोजगार नीति पर निशाना
सपा सांसद ने BJP नेताओं के रोजगार संबंधी बयानों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बीटेक, स्नातक और परास्नातक की डिग्री हासिल करने वाले युवाओं को रिक्शा चलाने जैसे सुझाव देना उनकी मेहनत का अपमान है। उनके मुताबिक, चुनाव के समय बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर वे दिखाई नहीं देते। पटेल ने कहा कि स्थायी रोजगार और अवसर देने के बजाय युवाओं को वैकल्पिक कामों की सलाह देना सरकार की रोजगार नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है और सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। अब यदि गठबंधन बनता है तो सीट बंटवारे की यह बहस निर्णायक भूमिका निभाएगी। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच औपचारिक वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।