यूपी सीट शेयरिंग विवाद: कांग्रेस प्रभारी गौतम बोले — '150 सीटों का दावा बिल्कुल गलत'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीट बँटवारे को लेकर सियासी तनाव गहरा गया है। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 4 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने कभी भी 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात नहीं की — और जो लोग ऐसा दावा कर रहे हैं, वे भ्रामक सूचना फैला रहे हैं।
विवाद की जड़: शिवपाल का बयान
समाजवादी पार्टी के सांसद शिवपाल सिंह यादव ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस को 50 से अधिक सीटों की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। इस बयान ने गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी और इंडिया ब्लॉक के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच औपचारिक सीट-बँटवारे की वार्ता अभी शुरुआती दौर में ही है।
गौतम का पलटवार
गौतम ने शिवपाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए कि वे गठबंधन नहीं चाहते। कम से कम उनका रुख़ सही होना चाहिए — ऐसी बेमतलब की बातें करने की क्या जरूरत थी।' उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन बनने के बाद दोनों पार्टियाँ मिलकर जीतेंगी और सरकार बनाएंगी।
सीटों पर कांग्रेस का रुख़
गौतम ने स्पष्ट किया कि सीटों की अंतिम संख्या दोनों दलों की वरिष्ठ नेतृत्व की बैठक के बाद ही तय होगी। उन्होंने कहा, 'मैंने शुरू से कहा है कि सबको बराबर प्रतिनिधित्व और आपसी सम्मान मिलना चाहिए — फिर भी हम लचीला रवैया अपनाने को तैयार हैं। अगर कुछ समझौता करना पड़ा, तो हम करने को तैयार हैं।' गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं के बयानों को विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में 150 सीटों की माँग से जोड़कर पेश किया गया था, जिसे अब पार्टी ने सिरे से नकार दिया है।
विचारधारा और जनाधार पर कांग्रेस का दावा
गौतम ने पार्टी के राष्ट्रीय कद का हवाला देते हुए कहा कि जनता पार्टी को वोट देती है, न कि व्यक्ति को। उन्होंने कहा कि चुनाव विचारधारा के आधार पर लड़े जाते हैं, और 'आइडियोलॉजी के मामले में कांग्रेस पूरे देश में नंबर वन है।' उनके अनुसार, केवल गिने-चुने नेता ऐसे होते हैं जो पार्टी टिकट के बिना भी जनता का विश्वास अर्जित कर सकते हैं, बाकी तो पार्टी की ताकत पर ही जीत हासिल होती है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों की वरिष्ठ नेतृत्व के बीच सीट-बँटवारे पर औपचारिक वार्ता अभी बाकी है। गठबंधन की दिशा तब स्पष्ट होगी जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता बातचीत की मेज पर आमने-सामने बैठेंगे। तब तक, बयानबाजी का यह दौर इंडिया ब्लॉक के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।