13 अक्टूबर 2026
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यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबंध निरस्त किया, ₹55 लाख जब्त; 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

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यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबंध निरस्त किया, ₹55 लाख जब्त; 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

सारांश

प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में बाल चिकित्सालय का निर्माण समय पर न करने पर यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबंध रद्द किया, ₹55 लाख जब्त किए और फर्म को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया। तीन अभियंताओं पर विभागीय और दो पर विधिक कार्रवाई भी शुरू।

मुख्य बातें

यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का प्रयागराज बाल चिकित्सालय निर्माण अनुबंध समय-सीमा में काम पूरा न करने के कारण निरस्त किया।
फर्म की सिक्योरिटी और परफॉर्मेंस गारंटी की ₹55 लाख की धनराशि जब्त; फर्म 5 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट।
तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी , अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई।
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता पंकज चोपड़ा के विरुद्ध विधिक कार्रवाई; केजी दुबे से पंजीकरण कार्य तत्काल वापस।
अवशेष निर्माण डीसीयू पैटर्न पर पूरा होगा; नोडल अधिकारी एके निर्मल नामित।
निगम में फर्जी दस्तावेजों पर पंजीकृत अन्य फर्मों की भी जाँच के आदेश।

यूपी सिडको ने 13 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में बाल चिकित्सालय निर्माण की ज़िम्मेदारी संभाल रही फर्म आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबंध निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा न करने के कारण निरस्त कर दिया। फर्म की सिक्योरिटी और परफॉर्मेंस गारंटी की ₹55 लाख की धनराशि भी जब्त कर ली गई है और फर्म को 5 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि फर्म के पंजीकरण में कूटरचित अभिलेखों का उपयोग करने और फर्म के निदेशक के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मुकदमे की जानकारी छिपाने के आरोप में यह ब्लैकलिस्टिंग की गई है। द्वितीय चरण का अनुबंध निरस्त करते हुए ₹55 लाख की गारंटी राशि जब्त करना इस कार्रवाई का तात्कालिक वित्तीय असर है।

गौरतलब है कि यह बाल चिकित्सालय जन स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजना है, और निर्माण में हुई देरी के कारण स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ा है।

अभियंताओं पर विभागीय कार्रवाई

निगम के तीन अभियंताओं — तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी — के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इन पर आरोप है कि कार्य पूर्ण हुए बिना ही फर्म के पक्ष में आंशिक भुगतान अवमुक्त किया गया।

इसके अतिरिक्त, पूर्व अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) पंकज चोपड़ा — जो फर्जी प्रपत्रों के आधार पर फर्म का पंजीकरण कराने के प्राथमिक दृष्टि से दोषी बताए जा रहे हैं — के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी। मुख्य अभियंता (पूर्व) केजी दुबे के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है, जिन पर त्रुटिपूर्ण टेंडर प्रक्रिया के ज़रिये अनुबंध करने का आरोप है।

नोडल अधिकारी की नियुक्ति और अग्रिम वसूली

बाल चिकित्सालय के अवशेष निर्माण कार्य को अब डीसीयू पैटर्न पर पूरा कराया जाएगा। इसके लिए मुख्य अभियंता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। प्रबंध निदेशक संजीव सिंह ने निर्देश दिया है कि फर्म को पहले किए गए अग्रिम भुगतान की वसूली भी की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि केजी दुबे से फर्मों के पंजीकरण और नवीनीकरण के समस्त कार्य तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए गए हैं।

व्यापक जाँच का आदेश

इस प्रकरण के मद्देनजर निगम में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों और अन्य जाली दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने वाली अन्य फर्मों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने पर इन्हें भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

राज्य सरकार ने प्रदेश भर में चल रहे निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप में पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं — और जनसेवा से जुड़े कार्यों में लापरवाही पर फर्मों तथा अभियंताओं दोनों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

आगे की राह

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डीसीयू पैटर्न पर अवशेष निर्माण कार्य कितनी जल्दी पूरा होगा, ताकि प्रयागराज के बच्चों को बाल चिकित्सालय की सेवाएँ मिल सकें। कार्रवाई का दायरा अन्य फर्मों तक बढ़ने की संभावना से यूपी सिडको के पंजीकरण तंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा भी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें जाँच तब होती है जब नुकसान हो चुका होता है। ₹55 लाख की जब्ती और ब्लैकलिस्टिंग प्रतीकात्मक कदम हैं — असली जवाबदेही यह होगी कि फर्म को अग्रिम भुगतान की पूर्ण वसूली हो और बाल चिकित्सालय तय समय में पूरा हो। पंजीकरण में फर्जीवाड़े के बावजूद अनुबंध मिलना यह भी बताता है कि निगम की आंतरिक जाँच प्रणाली महज औपचारिकता बन चुकी थी — अब अन्य फर्मों की जाँच का निर्देश सही दिशा में है, लेकिन परिणाम तभी मिलेंगे जब यह व्यापक प्रणालीगत सुधार में बदले।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी सिडको ने आरसीबी इन्फ्राकॉन्स का अनुबंध क्यों निरस्त किया?
फर्म ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में बाल चिकित्सालय का निर्माण अनुबंध की निर्धारित समय-सीमा में पूरा नहीं किया। इसके अतिरिक्त पंजीकरण में कूटरचित अभिलेखों के उपयोग और फर्म निदेशक के विरुद्ध पूर्व दर्ज मुकदमे की जानकारी छिपाने के आरोप भी हैं।
आरसीबी इन्फ्राकॉन्स पर क्या वित्तीय कार्रवाई हुई?
फर्म की सिक्योरिटी और परफॉर्मेंस गारंटी की ₹55 लाख की धनराशि जब्त कर ली गई है। साथ ही फर्म को 5 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है और फर्म को दिए गए अग्रिम भुगतान की भी वसूली की जाएगी।
किन अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है?
तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हो रही है। सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता पंकज चोपड़ा के विरुद्ध विधिक कार्रवाई और मुख्य अभियंता केजी दुबे के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
बाल चिकित्सालय का अवशेष निर्माण अब कैसे होगा?
अवशेष निर्माण कार्य डीसीयू पैटर्न पर पूरा कराया जाएगा। इसके लिए मुख्य अभियंता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है और काम अविलंब शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या अन्य फर्मों पर भी कार्रवाई होगी?
हाँ, यूपी सिडको ने निगम में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों और जाली दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने वाली अन्य फर्मों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। दोषी पाई जाने वाली फर्मों को भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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