26 सितंबर 2026
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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026: डिफेंस ड्रोन और 'काल' मिसाइल बने आकर्षण, ₹50 हजार करोड़ के डिफेंस कॉरिडोर की झलक

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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026: डिफेंस ड्रोन और 'काल' मिसाइल बने आकर्षण, ₹50 हजार करोड़ के डिफेंस कॉरिडोर की झलक

सारांश

ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण सिर्फ एक व्यापार मेला नहीं — यह उत्तर प्रदेश की बदलती पहचान का शोकेस है। ऑपरेशन सिंदूर वाले ड्रोन से लेकर 1,000 किमी मारक क्षमता वाले 'काल' तक, राज्य खुद को रक्षा उत्पादन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में 26 सितंबर 2026 को स्वदेशी रक्षा तकनीक मुख्य आकर्षण रही।
ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग हुए ड्रोन प्रदर्शित; एक ड्रोन करीब 60 किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम बताया गया।
झांसी डिफेंस कॉरिडोर में निर्मित ' काल ' की मारक क्षमता करीब 1,000 किलोमीटर बताई गई।
लॉन्ग रेंज वन-वे अटैकिंग ड्रोन लक्ष्य भेदने के बाद स्वयं नष्ट हो जाता है — तकनीक सुरक्षित रहती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए हैं और ₹50 हजार करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा है।
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद , भूपेंद्र चौधरी और हंसराज विश्वकर्मा ने ओडीओपी, ओडीओसी और हस्तशिल्प स्टॉलों का भ्रमण किया।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में 26 सितंबर 2026 को स्वदेशी रक्षा तकनीक और 'मेक इन यूपी' की औद्योगिक ताकत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी और एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर उद्यमियों और कारीगरों से सीधा संवाद किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चर्चा में आए स्वदेशी ड्रोन समेत झांसी डिफेंस कॉरिडोर में निर्मित 'काल' जैसे उत्पादों ने विदेशी मेहमानों और आम दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा।

मंत्रियों ने कारीगरों और उद्यमियों से की मुलाकात

तीनों मंत्रियों ने पीलीभीत, सहारनपुर, आगरा, कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कारीगरों के उत्पादों का अवलोकन किया। ओडीओपी (One District One Product) और ओडीओसी (One District One Craft) के स्टॉलों पर हस्तशिल्प, कृषि उपकरण और परंपरागत उत्पादों को देखा गया।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इस ट्रेड शो के माध्यम से ओडीओसी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच और नई पहचान मिल रही है। मंत्रियों ने ओडीओसी के कुछ उत्पादों का स्वाद भी चखा, जो इस आयोजन की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।

डिफेंस ड्रोन और 'काल' बने आकर्षण का केंद्र

ट्रेड शो में रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्वदेशी ड्रोन सबसे अधिक चर्चा में रहे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों के विरुद्ध कार्रवाई में उपयोग किए गए ड्रोन को भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है। एग्जीबिटर के अनुसार, इनमें से एक ड्रोन करीब 60 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम बताया गया है।

स्वार्म ड्रोन तकनीक भी दर्शकों के बीच विशेष चर्चा का विषय रही, जिसमें कई ड्रोन एक साथ समन्वित तरीके से लक्ष्य पर कार्रवाई कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार ये ड्रोन मुख्यतः सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों को उपलब्ध कराए जाते हैं।

झांसी डिफेंस कॉरिडोर में विकसित 'काल' को सफल परीक्षण के बाद पहली बार इस ट्रेड शो में शोकेस किया गया है। प्रदर्शनी में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 'काल' की मारक क्षमता करीब 1,000 किलोमीटर बताई गई है। एग्जीबिटर का कहना है कि यह उत्पाद भविष्य में उत्तर प्रदेश की रक्षा उत्पादन क्षमता की पहचान बन सकता है।

लॉन्ग रेंज अटैकिंग ड्रोन: आत्म-विनाश क्षमता से सुरक्षित तकनीक

प्रदर्शनी में एक लॉन्ग रेंज अटैकिंग वन-वे ड्रोन भी आकर्षण का केंद्र रहा, जो करीब 50 किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम बताया गया है। इस ड्रोन की विशेषता यह है कि लक्ष्य को निशाना बनाने के बाद यह स्वयं भी नष्ट हो जाता है, जिससे इसकी तकनीक किसी अन्य देश के हाथ लगने की आशंका कम होती है।

इसके अलावा, ब्रह्मोस मिसाइल समेत अनेक नई रक्षा तकनीकें भी यूपी डिफेंस कॉरिडोर के स्टॉल पर प्रदर्शित की गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी भूमिका को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश में जुटी है।

यूपी डिफेंस कॉरिडोर: ₹50 हजार करोड़ का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने रक्षा उत्पादन को गति देने के लिए डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए हैं। सरकार ने इसमें करीब ₹50 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। ट्रेड शो में प्रदर्शित उत्पाद इसी महत्वाकांक्षी योजना की व्यावहारिक झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह ट्रेड शो एमएसएमई, ओडीओपी, ओडीओसी, हस्तशिल्प, कृषि उपकरण, रक्षा और आधुनिक तकनीक — सभी को एक ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाकर 'मेक इन इंडिया' और 'मेक इन यूपी' के दृष्टिकोण को साकार कर रहा है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह

एग्जीबिटर्स ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भागीदारी को लेकर उत्साह व्यक्त किया और इसे अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों से उत्तर प्रदेश में निर्मित उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने का अवसर बन रहा है।

पारंपरिक हस्तशिल्प से लेकर अत्याधुनिक रक्षा तकनीक तक की यह विविधता उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक पहचान को रेखांकित करती है, और आने वाले वर्षों में राज्य के वैश्विक व्यापार विस्तार की दिशा तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ट्रेड शो की प्रदर्शनी और वास्तविक खरीद आदेशों के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। ₹50 हजार करोड़ के निवेश लक्ष्य की घोषणा पहले भी हो चुकी है — असली परीक्षा यह है कि इसमें से कितना वास्तविक अनुबंध और रोजगार में तब्दील हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ देकर ड्रोन को 'युद्ध-परीक्षित' के रूप में प्रस्तुत करना जनमानस में विश्वसनीयता बनाने की चतुर रणनीति है, परन्तु स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन के बिना ये दावे केवल प्रचार की श्रेणी में रहते हैं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में कौन से प्रमुख रक्षा उत्पाद प्रदर्शित किए गए?
ट्रेड शो में ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग किए गए स्वदेशी ड्रोन, झांसी डिफेंस कॉरिडोर में निर्मित 'काल' (1,000 किमी मारक क्षमता), स्वार्म ड्रोन, लॉन्ग रेंज वन-वे अटैकिंग ड्रोन और ब्रह्मोस मिसाइल प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। ये सभी उत्पाद यूपी डिफेंस कॉरिडोर की स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को दर्शाते हैं।
'काल' क्या है और यह क्यों खास है?
'काल' झांसी डिफेंस कॉरिडोर में विकसित एक स्वदेशी रक्षा उत्पाद है, जिसकी मारक क्षमता करीब 1,000 किलोमीटर बताई गई है। सफल परीक्षण के बाद इसे पहली बार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शोकेस किया गया है, और एग्जीबिटर के अनुसार यह भविष्य में उत्तर प्रदेश की रक्षा उत्पादन क्षमता की पहचान बन सकता है।
यूपी डिफेंस कॉरिडोर में कितने निवेश का लक्ष्य है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए हैं और इसमें करीब ₹50 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। यह कॉरिडोर 'मेक इन इंडिया' और 'मेक इन यूपी' नीति के तहत राज्य को रक्षा उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।
वन-वे अटैकिंग ड्रोन की क्या विशेषता है?
प्रदर्शित लॉन्ग रेंज अटैकिंग वन-वे ड्रोन करीब 50 किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम बताया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लक्ष्य को निशाना बनाने के बाद यह ड्रोन स्वयं भी नष्ट हो जाता है, जिससे इसकी तकनीक किसी अन्य देश के हाथ लगने का जोखिम कम हो जाता है।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में अन्य कौन से उत्पाद और क्षेत्र प्रदर्शित हैं?
इस ट्रेड शो में एमएसएमई, ओडीओपी, ओडीओसी, हस्तशिल्प, कृषि उपकरण, रक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़े उत्पाद एक ही मंच पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। पीलीभीत, सहारनपुर, आगरा, कानपुर समेत विभिन्न जिलों के कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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