यूपी ट्रेड शो 2026: मत्स्य क्षेत्र को ₹600.20 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, कोल्ड चेन में सबसे बड़ा दांव
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में 29 सितंबर 2026 को नोएडा में आयोजित मत्स्य क्षेत्र की प्रदर्शनी में निवेशकों और उद्यमियों ने असाधारण उत्साह दिखाया। मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश को ट्रेड शो के दौरान विभिन्न उप-क्षेत्रों में कुल ₹600.20 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें सबसे बड़ा प्रस्ताव कोल्ड चेन के लिए था। यह प्रदेश की मत्स्य अर्थव्यवस्था को आधुनिक ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक उल्लेखनीय संकेत है।
निवेश प्रस्तावों का विभाजन
प्राप्त ₹600.20 करोड़ के कुल निवेश प्रस्तावों में सर्वाधिक ₹509.20 करोड़ का प्रस्ताव कोल्ड चेन क्षेत्र के लिए आया। इसके बाद फीड मिल क्षेत्र में ₹51 करोड़, वैल्यू एडिशन एवं निर्यात क्षेत्र में ₹20 करोड़, मत्स्य पालन में ₹13.80 करोड़ और हैचरी एवं बीज उत्पादन में ₹6.20 करोड़ के प्रस्ताव शामिल हैं। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि निवेशक मत्स्य उत्पादों की शीत श्रृंखला को मज़बूत करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रमुख निवेशकों की भागीदारी
यूपीआईटीएस-2026 में फिश व्हाइट, बीवीजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु, पीवीआर एक्वा और व्हाइट फिश, वाराणसी सहित अनेक प्रमुख उद्यमियों ने मत्स्य क्षेत्र में निवेश के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इन कंपनियों ने मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की आपूर्ति, आधुनिक हैचरी विकास, फीड उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात जैसे क्षेत्रों में रुचि दिखाई। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी मत्स्य पालन को कृषि के समकक्ष प्राथमिकता दे रही है।
विभाग का उद्देश्य और रणनीति
मत्स्य विभाग की महानिदेशक धनलक्ष्मी के. ने बताया कि ट्रेड शो में निवेशकों को प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध निवेश अवसरों, विभागीय योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि विभाग का उद्देश्य निजी निवेश के ज़रिए मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आधुनिक मत्स्य अवसंरचना तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला और विपणन को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
किसानों और उद्यमियों पर असर
विभाग के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों से मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होने की उम्मीद है। कोल्ड चेन, फीड मिल, हैचरी और बीज उत्पादन में निजी पूँजी आने से मत्स्य पालकों को आधुनिक सुविधाएँ और बेहतर बाज़ार पहुँच मिल सकती है। गौरतलब है कि मत्स्य विभाग के स्टॉल पर निवेशकों के साथ-साथ उद्यमी, विद्यार्थी और मत्स्य पालक भी जानकारी लेने पहुँचे, जो इस क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता का संकेत है।
आगे की राह
विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परियोजनाओं, तकनीकी आवश्यकताओं और निवेश के संभावित क्षेत्रों पर निवेशकों के साथ विस्तृत चर्चा हो चुकी है। अब इन प्रस्तावों को ज़मीनी परियोजनाओं में बदलने की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि ये निवेश साकार होते हैं, तो उत्तर प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र न केवल उत्पादन में बल्कि प्रसंस्करण और निर्यात में भी नई ऊँचाई हासिल कर सकता है।