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यूपीआई एमडीआर समय-सीमा दीपावली के बाद तक बढ़ी, दिल्ली व्यापारियों ने किया स्वागत

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यूपीआई एमडीआर समय-सीमा दीपावली के बाद तक बढ़ी, दिल्ली व्यापारियों ने किया स्वागत

सारांश

यूपीआई पर एमडीआर की समय-सीमा दीपावली के बाद तक बढ़ी — दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने राहत की सांस ली, लेकिन माँग साफ है: अस्थायी राहत नहीं, पूरी तरह स्थायी छूट चाहिए।

मुख्य बातें

यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने एमडीआर लागू करने की समय-सीमा 15 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर दीपावली के बाद तक कर दी है।
पम्मा सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह ने फैसले का स्वागत करते हुए एमडीआर को स्थायी रूप से समाप्त करने की माँग की।
दिल्ली साड़ी मर्केंटाइल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजकुमार भारद्वाज ने चेताया कि एमडीआर की लागत अंततः ग्राहकों पर पड़ेगी।
चांदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल के कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी इस निर्णय का स्वागत करते हैं।
दीपावली के बाद यूपीआई एमडीआर के भविष्य पर अंतिम निर्णय अपेक्षित है।

यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की समय-सीमा 15 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर दीपावली के बाद तक करने का फैसला किया है, जिससे नई दिल्ली सहित देश भर के व्यापारियों को त्योहारी सीजन में राहत मिलेगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब बाज़ारों में ग्राहकों की भीड़ चरम पर होती है और डिजिटल भुगतान का उपयोग तेज़ी से बढ़ता है।

क्या है एमडीआर विवाद

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों से लिया जाता है। फिलहाल यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शून्य है, लेकिन इसे लागू करने की चर्चाओं ने छोटे व्यापारियों और दुकानदारों में चिंता पैदा कर दी थी। गौरतलब है कि भारत में यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को जन-जन तक पहुँचाया है और करोड़ों छोटे व्यवसायों की रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुका है।

व्यापारियों का तर्क है कि एमडीआर लागू होने पर बढ़ी हुई लागत का बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ेगा — जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च पहले से ही दबाव में है।

व्यापारी संगठनों की प्रतिक्रिया

पम्मा सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'यह बिल्कुल सही फैसला है और हम इसका स्वागत करते हैं। हमने इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन भी किया था और सरकार से यह कदम उठाने की अपील की थी।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल दीपावली तक टालना पर्याप्त नहीं है — 'इस प्रावधान को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए, वरना भविष्य में व्यापारियों और ग्राहकों को ही मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।'

दिल्ली साड़ी मर्केंटाइल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजकुमार भारद्वाज ने कहा, 'सरकार का यह फैसला व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए बहुत अच्छा है। अगर एमडीआर की वजह से व्यापारियों को नुकसान होता है या उनकी लागत बढ़ती है, तो वे अंततः उसे कीमत में जोड़ देंगे और इसका सीधा असर ग्राहक पर पड़ेगा।'

चांदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल के कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने भी राहत व्यक्त की और कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले दिन से ही व्यापारियों के हित में काम कर रहे हैं। व्यापारियों ने तब भी इसका स्वागत किया था और अब वे इसे टालने के फैसले का भी स्वागत कर रहे हैं।'

आम व्यापारियों और ग्राहकों पर असर

दिल्ली के सदर बाज़ार, चांदनी चौक और अन्य प्रमुख व्यापारिक इलाकों में दीपावली से पहले कारोबार चरम पर रहता है। इस दौरान यूपीआई के ज़रिये लाखों लेनदेन होते हैं। छोटे दुकानदारों के लिए एमडीआर का कोई भी अतिरिक्त बोझ उनके मुनाफे को सीधे प्रभावित कर सकता था।

आलोचकों का कहना है कि समय-सीमा बढ़ाना एक अस्थायी उपाय है — असली ज़रूरत एमडीआर को स्थायी रूप से समाप्त करने की है। व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे दीपावली के बाद भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहेंगे।

आगे क्या होगा

दीपावली के बाद यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी एमडीआर के भविष्य पर अंतिम फैसला लेगी। व्यापारी संगठनों ने माँग की है कि इस मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए और यूपीआई को शुल्क-मुक्त रखने की नीति बरकरार रखी जाए। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता काफी हद तक इस फैसले की दिशा पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और किसी भी शुल्क का प्रवेश उस उपलब्धि को पलट सकता है। व्यापारियों की माँग सही है — दीपावली के बाद भी यही दबाव बना रहेगा और कमिटी के सामने असली परीक्षा तब होगी। सरकार के लिए डिजिटल इंडिया के विस्तार और बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र की राजस्व ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर एमडीआर क्या है और इसे क्यों टाला गया?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों से लिया जाता है। यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने त्योहारी सीजन में व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसलिए इसकी समय-सीमा 15 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर दीपावली के बाद तक कर दी है।
दिल्ली के व्यापारी एमडीआर के खिलाफ क्यों हैं?
व्यापारियों का कहना है कि एमडीआर से उनकी परिचालन लागत बढ़ेगी, जिसे वे अंततः उत्पाद की कीमत में जोड़ेंगे — जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। छोटे दुकानदारों के लिए यह बोझ विशेष रूप से भारी होगा।
एमडीआर पर अंतिम फैसला कब होगा?
दीपावली के बाद यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी एमडीआर के भविष्य पर विचार करेगी। व्यापारी संगठनों ने माँग की है कि इसे स्थायी रूप से समाप्त किया जाए।
यूपीआई पर एमडीआर लागू होने से ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
व्यापारी विशेषज्ञों के अनुसार, एमडीआर लागू होने पर व्यापारी बढ़ी हुई लागत को उत्पाद की कीमत में जोड़ देंगे, जिससे ग्राहकों को ज़्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। इससे डिजिटल पेमेंट को अपनाने की रफ्तार भी धीमी हो सकती है।
कौन-से व्यापारी संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय हैं?
पम्मा सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन, दिल्ली साड़ी मर्केंटाइल एसोसिएशन और चांदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल सहित कई संगठन सक्रिय हैं। इन सभी ने एमडीआर समय-सीमा बढ़ाने का स्वागत किया है और इसे स्थायी रूप से खत्म करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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