13 अक्टूबर 2026
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यूपीआई एमडीआर टालने का फैसला: कैट ने किया स्वागत, त्योहारी सीजन में व्यापारियों को राहत

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यूपीआई एमडीआर टालने का फैसला: कैट ने किया स्वागत, त्योहारी सीजन में व्यापारियों को राहत

सारांश

सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित एमडीआर को टाल दिया है — और कैट इसे त्योहारी सीजन में लाखों छोटे व्यापारियों की जीत बता रहा है। प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में कर्तव्य भवन में हुई मुलाकात के कुछ हफ्तों बाद आया यह फैसला, सरकार और व्यापारिक समुदाय के बीच सक्रिय संवाद की मिसाल है।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 13 अक्टूबर 2026 को चुनिंदा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित एमडीआर टालने के सरकार के फैसले का स्वागत किया।
कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में 20 व्यापारिक नेताओं ने 30 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कर्तव्य भवन में मुलाकात की थी।
संगठन के अनुसार एमडीआर लागू होता तो कम मार्जिन वाले व्यापारियों और एमएसएमई पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता।
त्योहारों और शादियों के सीजन में एमएसएमई की बिक्री उच्चतम स्तर पर रहती है, जिससे यह फैसला समय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कैट ने PM नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया और डिजिटल पेमेंट को सस्ता और टिकाऊ बनाए रखने की अपील दोहराई।

अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 13 अक्टूबर 2026 को चुनिंदा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को टालने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया। संगठन के अनुसार यह कदम खासतौर पर त्योहारों और शादियों के सीजन में लाखों व्यापारियों और एमएसएमई के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

फैसले की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में लगभग 20 व्यापारिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा 30 सितंबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री से की गई मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद सामने आया है। कैट उस बैठक से पहले देशभर के व्यापार संघों के साथ भी समन्वय कर रहा था ताकि व्यापारियों की चिंताएँ सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जा सकें।

व्यापारियों पर असर

कैट के अनुसार, यूपीआई एमडीआर लागू होता तो कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर ट्रांजैक्शन की अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ता और डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती थी। संगठन ने कहा, 'ट्रांजैक्शन की अतिरिक्त लागत कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर एक अनावश्यक बोझ डाल सकती थी और डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाने में बाधा डाल सकती थी।' त्योहारी और शादियों के सीजन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की बिक्री उच्चतम स्तर पर रहती है, इसलिए समय के लिहाज से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है।

सरकार की संवेदनशीलता पर कैट की प्रतिक्रिया

प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद करते हुए कहा, 'हम व्यापारियों की चिंताओं को समझने और सकारात्मक फैसला लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। कैट डिजिटल पेमेंट का समर्थन करता है, लेकिन यह सिस्टम व्यापारियों, खासकर छोटे व्यवसायों के लिए सस्ता और टिकाऊ बना रहना चाहिए।'

खंडेलवाल ने आगे कहा, 'इस टालने के फैसले से व्यापारियों का भरोसा बढ़ेगा और एक मजबूत डिजिटल इंडिया बनाने में व्यापारिक समुदाय के साथ सरकार की साझेदारी और मजबूत होगी।'

डिजिटल पेमेंट पारिस्थितिकी पर व्यापक असर

गौरतलब है कि यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका है और इस पर एमडीआर लगाने का विचार लंबे समय से बहस का विषय रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या सर्वाधिक रहती है। कैट का कहना है कि वह डिजिटल पेमेंट का पूर्ण समर्थक है, बशर्ते यह तंत्र छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना रहे।

आगे की राह

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एमडीआर को कितने समय के लिए टाला गया है और भविष्य में इस पर नीतिगत स्थिति क्या रहेगी। कैट ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा और व्यापारिक समुदाय के हितों की पैरवी करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नीतिगत अनिश्चितता को भी उजागर करता है — आखिर एमडीआर का प्रस्ताव लाया ही क्यों गया था, जब यह स्पष्ट था कि इससे छोटे व्यापारी प्रभावित होंगे। असली सवाल यह है कि यह 'टालना' स्थायी राहत है या भविष्य में किसी संशोधित रूप में वापस आएगा — क्योंकि यूपीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण का प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है। कैट की पैरवी का असर दिखा, लेकिन व्यापारी समुदाय को चाहिए कि वह इस 'टालने' को स्थायी नीति समझने की भूल न करे।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई एमडीआर क्या है और इसे क्यों टाला गया?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से लिया जाता है। सरकार ने चुनिंदा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित एमडीआर को फिलहाल टाल दिया है, जिसे कैट ने व्यापारियों की चिंताओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का संकेत बताया है।
कैट ने इस फैसले पर क्या कहा?
कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने PM नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला व्यापारियों का भरोसा बढ़ाएगा और सरकार तथा व्यापारिक समुदाय की साझेदारी को मजबूत करेगा।
एमडीआर टालने से छोटे व्यापारियों को क्या फायदा होगा?
एमडीआर लागू होता तो कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों और एमएसएमई पर अतिरिक्त लेनदेन लागत का बोझ पड़ता। इसे टालने से विशेष रूप से त्योहारों और शादियों के सीजन में डिजिटल पेमेंट को अपनाना जारी रहेगा और छोटे व्यवसायों की नकदी प्रवाह पर दबाव नहीं पड़ेगा।
कैट ने सरकार से कब और कहाँ मुलाकात की थी?
कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में लगभग 20 व्यापारिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। उसी बैठक के कुछ सप्ताह बाद एमडीआर टालने का फैसला आया।
क्या यूपीआई एमडीआर भविष्य में लागू हो सकता है?
फिलहाल सरकार ने एमडीआर को टाला है, लेकिन यह स्थायी समाप्ति नहीं है। कैट ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा। भविष्य की नीतिगत दिशा अभी स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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