यूपीआई एमडीआर टालने का फैसला: कैट ने किया स्वागत, त्योहारी सीजन में व्यापारियों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 13 अक्टूबर 2026 को चुनिंदा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को टालने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया। संगठन के अनुसार यह कदम खासतौर पर त्योहारों और शादियों के सीजन में लाखों व्यापारियों और एमएसएमई के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
फैसले की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम कैट के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में लगभग 20 व्यापारिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा 30 सितंबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में वित्त मंत्री से की गई मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद सामने आया है। कैट उस बैठक से पहले देशभर के व्यापार संघों के साथ भी समन्वय कर रहा था ताकि व्यापारियों की चिंताएँ सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जा सकें।
व्यापारियों पर असर
कैट के अनुसार, यूपीआई एमडीआर लागू होता तो कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर ट्रांजैक्शन की अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ता और डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती थी। संगठन ने कहा, 'ट्रांजैक्शन की अतिरिक्त लागत कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर एक अनावश्यक बोझ डाल सकती थी और डिजिटल पेमेंट को बड़े पैमाने पर अपनाने में बाधा डाल सकती थी।' त्योहारी और शादियों के सीजन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की बिक्री उच्चतम स्तर पर रहती है, इसलिए समय के लिहाज से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है।
सरकार की संवेदनशीलता पर कैट की प्रतिक्रिया
प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का धन्यवाद करते हुए कहा, 'हम व्यापारियों की चिंताओं को समझने और सकारात्मक फैसला लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। कैट डिजिटल पेमेंट का समर्थन करता है, लेकिन यह सिस्टम व्यापारियों, खासकर छोटे व्यवसायों के लिए सस्ता और टिकाऊ बना रहना चाहिए।'
खंडेलवाल ने आगे कहा, 'इस टालने के फैसले से व्यापारियों का भरोसा बढ़ेगा और एक मजबूत डिजिटल इंडिया बनाने में व्यापारिक समुदाय के साथ सरकार की साझेदारी और मजबूत होगी।'
डिजिटल पेमेंट पारिस्थितिकी पर व्यापक असर
गौरतलब है कि यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका है और इस पर एमडीआर लगाने का विचार लंबे समय से बहस का विषय रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या सर्वाधिक रहती है। कैट का कहना है कि वह डिजिटल पेमेंट का पूर्ण समर्थक है, बशर्ते यह तंत्र छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना रहे।
आगे की राह
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एमडीआर को कितने समय के लिए टाला गया है और भविष्य में इस पर नीतिगत स्थिति क्या रहेगी। कैट ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा और व्यापारिक समुदाय के हितों की पैरवी करता रहेगा।