यूपीएसआईएफएस की 'टीम 12' अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी की तकनीकी चुनौतियों से लेगी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस), लखनऊ के 150 विद्यार्थियों में से चुने गए 12 सदस्यीय दल 'टीम 12' को अब अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों की अंतरराष्ट्रीय तकनीकी परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर मिलने की संभावना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में इन विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी नवाचार क्षमता को वैश्विक विशेषज्ञों के सामने प्रदर्शित किया। 11 अक्टूबर 2026 को सामने आई यह पहल फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय की एक विशिष्ट मिसाल बनकर उभरी है।
चयन प्रक्रिया और 'टीम 12' का गठन
संस्थान के 150 विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी समाधान दो प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किए। पहले, अमेरिका स्थित कंपनी ब्राविटी के सीईओ पवन शर्मा के सामने, जो AI, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। दूसरे, केआईपीएल (KIPL) के सीईओ पराग शेंडे के समक्ष नवाचार संबंधी प्रेजेंटेशन दिए गए। इन दोनों दौरों के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 12 विद्यार्थियों को 'टीम 12' में स्थान दिया गया।
इस दल में ईशानी पांडे, ईशानी ओझा, सिद्धि वत्स, साक्षी गहलोत, पुष्कर सिंह, रवि यादव, विवेक मिश्रा, प्रखर सिंह, दिव्यम श्रीवास्तव, अनिमेष शुक्ला, अनुभव चतुर्वेदी और रविशंकर कुशवाहा शामिल हैं। परियोजना का नेतृत्व संस्थान के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल की प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह कर रही हैं।
फॉरेंसिक और तकनीक का अनूठा समन्वय
यूपीएसआईएफएस का शैक्षणिक मॉडल तकनीक, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान के त्रिकोण पर आधारित है। डिजिटल साक्ष्यों की जाँच, साइबर सुरक्षा और आधुनिक अपराधों की वैज्ञानिक पड़ताल — इन सभी क्षेत्रों में गहरी तकनीकी समझ अनिवार्य होती है। गौरतलब है कि आज साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, स्वचालन और जटिल तकनीकी प्रणालियाँ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौतियों में से हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार AI और साइबर सुरक्षा में कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर जोर दे रही है। फॉरेंसिक शिक्षा में इन अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश एक नई दिशा को रेखांकित करता है।
संस्थापक निदेशक की प्रतिक्रिया
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक-आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने, नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने और उनके ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।' डॉ. गोस्वामी के अनुसार AI, रोबोटिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए समाधान विकसित करना समय की माँग है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और वैश्विक महत्त्व
'टीम 12' की अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों की तकनीकी परियोजनाओं में भागीदारी प्रस्तावित है। इन देशों में AI, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से समाधान विकसित हो रहे हैं। इस पहल का व्यापक उद्देश्य भारतीय विद्यार्थियों की नवाचार क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
तकनीकी ज्ञान के साथ विधिक प्रक्रियाओं और फॉरेंसिक जाँच की समझ इन विद्यार्थियों को भविष्य में अनुसंधान और उद्यमिता के नए अवसर दिला सकती है। 'टीम 12' की यह यात्रा उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के बदलते परिदृश्य की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।