यूपीएसआईएफएस और चार संस्थानों के बीच एमओयू, छात्रों को जेल में केस स्टडी का मिलेगा मौका
सारांश
Key Takeaways
- एमओयू से छात्रों को फॉरेंसिक क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।
- जेलों में जाकर केस स्टडी करने का अनूठा मौका।
- प्रयोगशाला में अनुसंधान और परीक्षण के लिए आधुनिक तकनीकें।
- छात्रों और फैकल्टी का एक्सचेंज प्रोग्राम होगा।
- फॉरेंसिक शिक्षा में प्रैक्टिकल पर जोर दिया जाएगा।
लखनऊ, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) अपने छात्रों को फॉरेंसिक क्षेत्र में विशेषज्ञ बनाने के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। योगी सरकार द्वारा चार प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसमें शामिल हैं: महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू)।
इन सहयोगों से यूपीएसआईएफएस के छात्रों को इंटर्नशिप, अनुसंधान और व्यावहारिक अनुभव के लिए नए अवसर मिलेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखना है, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन के परिदृश्यों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना है।
यूपीएसआईएफएस के निदेशक जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य फॉरेंसिक साइंस के छात्रों को ‘जॉब रेडी’ बनाना है। अब तक फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी पर अधिक जोर था, लेकिन अब प्रैक्टिकल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इन एमओयू के माध्यम से छात्रों को केस स्टडी, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, मेडिकल-लीगल पहलुओं और अपराध अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ समझौते के तहत, यूपीएसआईएफएस के छात्र फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया का नजदीकी अध्ययन कर सकेंगे। इसमें पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी, जिससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी घटना में मौत किन परिस्थितियों में हुई और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उसका विश्लेषण कैसे किया जाता है।
यूपीएसआईएफएस के उपनिदेशक चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ एमओयू से छात्रों को जेलों में जाकर बंदियों के केस स्टडी करने का अवसर मिलेगा। छात्र जान सकेंगे कि बंदियों के मामलों में जमानत कैसे होती है, जेल का माहौल कैसा होता है और अपराध के पीछे के सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारण क्या हैं।
यह अनुभव छात्रों को अपराध की जड़ों को समझने में मदद करेगा, जो एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ के लिए आवश्यक है। वहीं, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, दोनों संस्थानों के शिक्षकों को एक-दूसरे के संस्थानों में लेक्चर देने का अवसर मिलेगा। भविष्य में, दोनों संस्थान मिलकर फॉरेंसिक साइंस की एक संयुक्त प्रयोगशाला भी स्थापित करेंगे।
इस प्रयोगशाला में अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान और परीक्षण किए जाएंगे, जिससे छात्रों को नई तकनीकों का ज्ञान मिलेगा और राज्य का फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। यूपीएसआईएफएस के छात्र वहां जाकर इंटर्नशिप कर सकेंगे, जबकि धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के छात्र लखनऊ आकर फॉरेंसिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
इससे राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा। खास बात यह है कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि फैकल्टी मेंबर्स भी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर लेक्चर देंगे। इस पहल से शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विभिन्न विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। यह पहल डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच को सटीक निष्कर्षों तक पहुंचने का विश्वसनीय माध्यम बनाएगी।
-- राष्ट्र प्रेस
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