योगी सरकार का 'द शैडो' ऐप: बेटियों की सुरक्षा में एक नई तकनीकी पहल

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योगी सरकार का 'द शैडो' ऐप: बेटियों की सुरक्षा में एक नई तकनीकी पहल

सारांश

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 'द शैडो' ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए शैक्षणिक प्रगति का भी ध्यान रखेगा। जानें इस ऐप की विशेषताएं और कैसे यह बेटियों को बनाएगा सुरक्षित।

मुख्य बातें

बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला ऐप शैक्षणिक प्रगति का ट्रैकिंग पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी कॉल क्यूआर-कोड-आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम

लखनऊ, २२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यूपी सरकार ने आधी आबादी को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी दिशा में, सीएम योगी की सोच के अनुसार, यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) ने एक अभिनव पहलकदमी की है।

इस संस्थान के बीटेक छात्रों द्वारा तैयार 'द शैडो' (यूपीएसआईएफएस ऐप) ऐप, छात्रों, विशेषकर बेटियों की सुरक्षा और शैक्षणिक प्रबंधन को एक साथ मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐप एक समग्र सुरक्षा-आधारित डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जो हर छात्र के साथ उसकी “परछाईं” की तरह जुड़ा रहेगा। यह तकनीक बेटियों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि 'द शैडो' ऐप संस्थान के छात्रों द्वारा विकसित किया गया है। इस ऐप की विशेषता केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनके हर मूवमेंट को अधिकृत तरीके से ट्रैक करता है। कैंपस में प्रवेश, निकास, अवकाश अनुरोध और अन्य गतिविधियों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे संस्थान प्रशासन को रियल-टाइम जानकारी मिलती रहती है। इसमें अटेंडेंस, असाइनमेंट, परीक्षा प्रदर्शन और अकादमिक प्रगति का पूरा डेटा भी उपलब्ध रहता है, जिससे छात्रों, माता-पिता और शिक्षकों तीनों एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहते हैं।

इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी। ऐप में मौजूद ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ इसे और विशेष बनाता है। इसके तहत किसी भी छात्रा के कैंपस से बाहर जाने या विशेष अनुमति से जुड़े अनुरोध पर सबसे पहले अभिभावकों की मंजूरी अनिवार्य है। इससे बेटियों की सुरक्षा को एक अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। इससे छात्राओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित होगा।

'द शैडो' ऐप का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी कॉल सिस्टम है। यदि कोई छात्रा किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में आती है, तो एक बटन दबाते ही संस्थान प्रशासन और अभिभावकों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकता है। इसके साथ ही क्यूआर-कोड-आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे कैंपस में अनधिकृत प्रवेश और अवांछनीय गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके।

इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में इस ऐप को बीटेक छात्र हर्ष और आदित्य मिश्रा ने विकसित किया है। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि 'द शैडो' ऐप बेटियों की सुरक्षा को लेकर तकनीकी नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है, जो सरकारी प्रयासों को संस्थागत स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाता है। यह ऐप दिखाता है कि कैसे डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है। यह छात्रों के लिए एक 'डिजिटल साथी' की तरह है, जो हर पल उनकी सुरक्षा, निगरानी और शैक्षणिक प्रगति का ध्यान रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है। ऐसे प्रयासों से समाज के लिए सुरक्षा में सुधार और विश्वास निर्माण होता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस ऐप की विशेषताएं क्या हैं?
यह ऐप छात्रों की गतिविधियों को ट्रैक करता है, एसओएस इमरजेंसी कॉल सिस्टम और पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रदान करता है।
इस ऐप का उपयोग कैसे किया जाएगा?
छात्र इस ऐप का उपयोग अपनी गतिविधियों को प्रबंधित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करेंगे।
क्या यह ऐप मुफ्त है?
'द शैडो' ऐप का उपयोग छात्रों के लिए निःशुल्क है।
क्या अभिभावक इस ऐप से जुड़े होंगे?
हां, ऐप में शामिल पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम के कारण अभिभावक भी जुड़े रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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