योगी सरकार की अभ्युदय योजना से बेटियों ने यूपीएससी में लहराया सफलता का परचम

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योगी सरकार की अभ्युदय योजना से बेटियों ने यूपीएससी में लहराया सफलता का परचम

सारांश

उत्तर प्रदेश की बेटियां अब अपने सपनों को साकार कर रही हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जानिए इन बेटियों की प्रेरणादायक कहानियाँ।

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने बेटियों को सिविल सेवा परीक्षा में सफलता दिलाने में मदद की है।
  • अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियों ने इस योजना का लाभ उठाकर सफलता प्राप्त की है।
  • गृहणियों और सीमित संसाधनों के बावजूद बेटियां ऑनलाइन पढ़ाई करके सफल हो रही हैं।
  • सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।
  • यह योजना बेटियों में आत्मविश्वास और साहस को बढ़ावा देती है।

लखनऊ, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की बेटियों ने अब केवल सपने नहीं देखे हैं, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलने में भी सफल हो रही हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने इन बेटियों के लिए ऐसे ‘पंख’

संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में इस योजना का लाभ उठाकर प्रदेश की तीन बेटियों ने अद्वितीय सफलता प्राप्त की है। विशेष बात यह है कि इस योजना के माध्यम से अब तक ढाई सौ से अधिक बेटियां सफल हो चुकी हैं और एक अधिकारी बनकर यूपी को नई दिशा दे रही हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि योगी सरकार की शिक्षा-केंद्रित योजनाओं की प्रभावशीलता का भी प्रमाण है।

2021 में आरंभ हुई मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने अब तक एक लाख से अधिक छात्रों को जोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक मजबूत मंच उपलब्ध कराया है। खास बात यह है कि बेटियां इस योजना के जरिए महंगे कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता के बिना भी बड़ी सफलता प्राप्त कर रही हैं।

गाजियाबाद के प्रताप विहार की निवासी मानसी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 444वीं रैंक हासिल की। एक प्राइवेट जॉब करने वाले पिता के साथ पांच सदस्यों का परिवार होने के बावजूद, मानसी ने घर पर ही तैयारी की और अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से सफलता प्राप्त की।

झांसी की अदिति सिंह ने 859वीं रैंक प्राप्त की। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां की बेटी अदिति ने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की। दिलचस्प बात यह रही कि वह स्वयं भी अभ्युदय योजना के तहत अन्य छात्रों को पढ़ाकर उनकी मदद करती रहीं।

आगरा की तनीषा सिंह ने 930वीं रैंक हासिल की। रेवेन्यू इंस्पेक्टर पिता और गृहिणी मां के परिवार से आने वाली तनीषा ने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की और अभ्युदय योजना की सहायता से सफलता प्राप्त की।

लखनऊ की कीर्तिका सिंह ने 2022 में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी बन गईं। एटा में तैनात कीर्तिका एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तैयारी की और अभ्युदय योजना का लाभ उठाया।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने न केवल शिक्षा को सुलभ बनाया है, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा रही हैं। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यूपी की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

इन सफलताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि सही दिशा और संसाधन मिलें, तो प्रदेश की बेटियां देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज उन लाखों सपनों को आकार दे रही है, जो कभी संसाधनों के अभाव में अधूरे रह जाते थे।

Point of View

जो योगी सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त कर रही हैं। यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों के साथ, महिलाएं किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकती हैं।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना क्या है?
यह योजना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान करती है।
इस योजना का लाभ किसे मिला है?
इस योजना का लाभ उत्तर प्रदेश की बेटियों ने उठाया है, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है।
क्या यह योजना केवल बेटियों के लिए है?
नहीं, यह योजना सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सभी छात्रों के लिए उपलब्ध है।
क्या इस योजना से कोचिंग की आवश्यकता खत्म हो गई है?
जी हां, कई छात्र इस योजना के माध्यम से महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना भी सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
क्या इस योजना में शामिल होना कठिन है?
इस योजना में शामिल होना सरल है और यह सभी योग्य छात्रों के लिए खुली है।
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