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उत्तराखंड में 4.9 तीव्रता का भूकंप, चमोली रहा केंद्र; दिल्ली-एनसीआर तक हिली धरती

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उत्तराखंड में 4.9 तीव्रता का भूकंप, चमोली रहा केंद्र; दिल्ली-एनसीआर तक हिली धरती

सारांश

उत्तराखंड के चमोली में मंगलवार रात 4.9 तीव्रता के भूकंप ने कई जिलों को हिला दिया — झटके दिल्ली-एनसीआर तक पहुँचे। जोशीमठ से 50 किमी दक्षिण में केंद्र, 13 किमी गहराई। जान-माल का नुकसान नहीं, लेकिन भूकंप जोन-5 में बसे इस संवेदनशील क्षेत्र की चिंता फिर सतह पर।

मुख्य बातें

चमोली जिले में मंगलवार रात 10:23 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप आया।
भूकंप का केंद्र जोशीमठ से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में, गहराई 13 किलोमीटर ।
पौड़ी गढ़वाल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और दिल्ली-एनसीआर तक झटके महसूस किए गए।
अभी तक किसी भी जिले से जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी तहसीलों से नुकसान की रिपोर्ट तलब की; अफवाहों से बचने की अपील।
उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन-4 और जोन-5 में आता है, जो अतिसंवेदनशील क्षेत्र है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में मंगलवार रात 10 बजकर 23 मिनट पर 4.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके पौड़ी गढ़वाल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल समेत कई जिलों और दूर तक दिल्ली-एनसीआर में भी महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार अभी तक किसी भी जिले से जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

भूकंप का केंद्र और तकनीकी ब्यौरा

NCS के आँकड़ों के अनुसार भूकंप का अधिकेंद्र अक्षांश 30.103 और देशांतर 79.561 पर स्थित था, जो जोशीमठ से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में चमोली जिले में पड़ता है। भूकंप की गहराई जमीन से 13 किलोमीटर नीचे मापी गई। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी उथली गहराई पर आए भूकंप का असर व्यापक क्षेत्र में महसूस होता है, यही कारण है कि कई जिलों तक कंपन पहुँचा।

प्रभावित जिलों का विवरण

पौड़ी गढ़वाल में झटके रात 10 बजकर 26 मिनट पर महसूस किए गए, जहाँ अनुमानित तीव्रता 4.4 बताई जा रही है। कोटद्वार सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी कंपन दर्ज हुआ और लोग घरों से निकलकर खुले में आ गए।

उधम सिंह नगर में रात 10 बजकर 24 मिनट पर और नैनीताल में 10 बजकर 23 मिनट पर धरती हिली। हरिद्वार जिले से भी कंपन महसूस होने की जानकारी सामने आई। दिल्ली-एनसीआर में भी रात करीब 10 बजकर 25 मिनट पर झटके महसूस किए गए, जिसके बाद वहाँ के निवासी भी घरों से बाहर निकल आए।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन की प्रतिक्रिया

प्रशासन ने सभी तहसीलों से नुकसान की रिपोर्ट तलब की है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और भूकंप के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों का पालन करें। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

क्यों संवेदनशील है यह क्षेत्र

उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन-4 और जोन-5 में आता है, जिसे अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है। चमोली और जोशीमठ क्षेत्र पहले से ही भू-धंसाव को लेकर चिंता का विषय रहा है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई बार हल्के भूकंप के झटके दर्ज हो चुके हैं, जो टेक्टोनिक गतिविधि की निरंतरता की ओर संकेत करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जोशीमठ में भू-धंसाव की समस्या पहले से ही राष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है।

आगे की स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार 13 किलोमीटर की गहराई पर आया यह मध्यम श्रेणी का भूकंप संरचनात्मक क्षति के लिहाज से कम जोखिम वाला है, परंतु हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संवेदनशीलता को देखते हुए निगरानी जारी रहना आवश्यक है। प्रशासन जिलों से आने वाली रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे हर बार 'कोई नुकसान नहीं' की खबर से ढक दिया जाता है। असली सवाल यह है कि हिमालय की टेक्टोनिक सक्रियता के बीच इस क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की भूकंपरोधी तैयारी कहाँ खड़ी है। जोन-5 में बसे जोशीमठ जैसे कस्बे पहले से दरारों से जूझ रहे हैं — एक बड़े झटके की स्थिति में राहत और संपर्क तंत्र कितना तैयार है, यह सवाल हर बार टल जाता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में आए भूकंप की तीव्रता कितनी थी और केंद्र कहाँ था?
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई और इसका केंद्र चमोली जिले में जोशीमठ से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण में था। भूकंप की गहराई जमीन से 13 किलोमीटर नीचे थी।
क्या उत्तराखंड भूकंप से कोई जान-माल का नुकसान हुआ?
अभी तक किसी भी जिले से जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं आई है। प्रशासन ने सभी तहसीलों से नुकसान की रिपोर्ट तलब की है और स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
भूकंप के झटके किन-किन इलाकों में महसूस किए गए?
भूकंप के झटके पौड़ी गढ़वाल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल समेत कई जिलों में महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर में भी रात करीब 10 बजकर 25 मिनट पर कंपन दर्ज हुआ।
उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से इतना संवेदनशील क्यों है?
उत्तराखंड भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आता है, जो अतिसंवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। चमोली और जोशीमठ क्षेत्र पहले से भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहा है और हाल के महीनों में यहाँ कई बार हल्के भूकंप आ चुके हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को क्या सलाह दी है?
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और भूकंप के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों का पालन करें। प्रशासन सभी जिलों से आने वाली रिपोर्टों के आधार पर स्थिति की निगरानी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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