उत्तराखंड में जंगल की आग का खतरा बढ़ा: डीएफओ प्रदीप कुमार ने 51 अलर्ट में 3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के अल्मोड़ा सहित पूरे राज्य में बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में आग की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। सिविल सोयम वन प्रभाग के डीएफओ प्रदीप कुमार ने 23 मई को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को कुल 51 अलर्ट प्राप्त हुए और लगभग 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ है। वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं और स्थानीय वन पंचायतें भी सहयोग दे रही हैं।
तापमान वृद्धि और आग का सीधा संबंध
डीएफओ प्रदीप कुमार के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने जंगलों में आग लगने की आशंका को कई गुना बढ़ा दिया है। शुक्रवार को हुई हल्की बारिश से तापमान में करीब एक डिग्री की गिरावट ज़रूर आई, जिससे कुछ राहत मिली। हालाँकि, गर्मी और सूखे की स्थिति अभी भी बनी हुई है, इसलिए खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड हर साल मार्च से जून के बीच जंगल की आग के सबसे संवेदनशील मौसम से गुज़रता है। गौरतलब है कि राज्य में शुष्क चीड़ के जंगलों की बड़ी मात्रा आग को तेज़ी से फैलने में सहायक होती है।
मुख्य घटनाक्रम: 51 अलर्ट, 3 हेक्टेयर प्रभावित
डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्राप्त 51 अलर्ट में से 3 से 4 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई, जिनसे करीब 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। वन विभाग की टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी स्थानों पर आग पर काबू पा लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरा स्टाफ अलर्ट मोड पर तैनात है और सूचना मिलते ही टीम रवाना की जाती है।
जानबूझकर आग लगाने के मामले, 5-6 पर कार्रवाई
एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में लोगों द्वारा जानबूझकर आग लगाने की घटनाएँ देखी गई हैं। डीएफओ के अनुसार, ऐसे 5 से 6 मामलों में संबंधित व्यक्तियों को पकड़ा गया है और उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जिलाधिकारी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दी जाए।
वन पंचायतों और समुदाय की भूमिका
वन विभाग ने संबंधित अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय वन पंचायतें भी स्वेच्छा से आग बुझाने में सहयोग कर रही हैं। डीएफओ ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।
आम जनता से अपील
प्रदीप कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन या वन विभाग को दें। तापमान में और वृद्धि की आशंका को देखते हुए आने वाले दिनों में विभाग की निगरानी और सघन की जाएगी, ताकि वन संपदा को और नुकसान से बचाया जा सके।