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उत्तराखंड में जंगल की आग का खतरा बढ़ा: डीएफओ प्रदीप कुमार ने 51 अलर्ट में 3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया

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उत्तराखंड में जंगल की आग का खतरा बढ़ा: डीएफओ प्रदीप कुमार ने 51 अलर्ट में 3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया

सारांश

बढ़ती गर्मी और सूखे ने उत्तराखंड के जंगलों को आग की चपेट में ला दिया है। अल्मोड़ा के डीएफओ प्रदीप कुमार के अनुसार 51 अलर्ट में से 3-4 स्थानों पर करीब 3 हेक्टेयर वन प्रभावित हुआ। जानबूझकर आग लगाने के 5-6 मामलों में कार्रवाई जारी है और विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

मुख्य बातें

डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिनों में तापमान वृद्धि के कारण जंगल की आग की घटनाएँ बढ़ी हैं।
सिविल सोयम वन प्रभाग को 51 अलर्ट मिले; 3 से 4 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई और करीब 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ।
शुक्रवार को हुई हल्की बारिश से तापमान में एक डिग्री की गिरावट आई, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है।
जानबूझकर आग लगाने के 5 से 6 मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जागरूकता अभियान और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील जारी है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा सहित पूरे राज्य में बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में आग की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। सिविल सोयम वन प्रभाग के डीएफओ प्रदीप कुमार ने 23 मई को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को कुल 51 अलर्ट प्राप्त हुए और लगभग 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ है। वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर काम कर रही हैं और स्थानीय वन पंचायतें भी सहयोग दे रही हैं।

तापमान वृद्धि और आग का सीधा संबंध

डीएफओ प्रदीप कुमार के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने जंगलों में आग लगने की आशंका को कई गुना बढ़ा दिया है। शुक्रवार को हुई हल्की बारिश से तापमान में करीब एक डिग्री की गिरावट ज़रूर आई, जिससे कुछ राहत मिली। हालाँकि, गर्मी और सूखे की स्थिति अभी भी बनी हुई है, इसलिए खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड हर साल मार्च से जून के बीच जंगल की आग के सबसे संवेदनशील मौसम से गुज़रता है। गौरतलब है कि राज्य में शुष्क चीड़ के जंगलों की बड़ी मात्रा आग को तेज़ी से फैलने में सहायक होती है।

मुख्य घटनाक्रम: 51 अलर्ट, 3 हेक्टेयर प्रभावित

डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्राप्त 51 अलर्ट में से 3 से 4 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई, जिनसे करीब 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। वन विभाग की टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी स्थानों पर आग पर काबू पा लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरा स्टाफ अलर्ट मोड पर तैनात है और सूचना मिलते ही टीम रवाना की जाती है।

जानबूझकर आग लगाने के मामले, 5-6 पर कार्रवाई

एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में लोगों द्वारा जानबूझकर आग लगाने की घटनाएँ देखी गई हैं। डीएफओ के अनुसार, ऐसे 5 से 6 मामलों में संबंधित व्यक्तियों को पकड़ा गया है और उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जिलाधिकारी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दी जाए।

वन पंचायतों और समुदाय की भूमिका

वन विभाग ने संबंधित अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय वन पंचायतें भी स्वेच्छा से आग बुझाने में सहयोग कर रही हैं। डीएफओ ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

आम जनता से अपील

प्रदीप कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन या वन विभाग को दें। तापमान में और वृद्धि की आशंका को देखते हुए आने वाले दिनों में विभाग की निगरानी और सघन की जाएगी, ताकि वन संपदा को और नुकसान से बचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दीर्घकालिक समाधान — जैसे चीड़ की पत्तियों का व्यावसायिक उपयोग, फायरलाइन रखरखाव और सामुदायिक प्रशिक्षण — अब भी अधूरे हैं। जानबूझकर आग लगाने के मामलों का सामने आना यह संकेत देता है कि समस्या केवल मौसमी नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक भी है। विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन 51 अलर्ट और मात्र 3 हेक्टेयर नुकसान के आँकड़े तब तक अधूरे हैं जब तक उपग्रह आधारित स्वतंत्र सत्यापन न हो। राज्य सरकार को मानसून पूर्व इस चक्र को तोड़ने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में जंगल की आग की मौजूदा स्थिति क्या है?
23 मई तक सिविल सोयम वन प्रभाग को 51 अलर्ट मिले हैं, जिनमें से 3-4 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई और करीब 3 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वन विभाग की टीमों ने सभी स्थानों पर आग पर काबू पा लिया है।
उत्तराखंड में जंगल की आग क्यों बढ़ रही है?
डीएफओ प्रदीप कुमार के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में तापमान में लगातार वृद्धि और सूखे की स्थिति ने आग का खतरा बढ़ाया है। शुक्रवार की हल्की बारिश से एक डिग्री राहत मिली, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है।
क्या जानबूझकर आग लगाने के मामले सामने आए हैं?
हाँ, डीएफओ ने बताया कि कुछ मामलों में जानबूझकर आग लगाई गई। अल्मोड़ा जिले में अब तक 5 से 6 ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों को पकड़कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जंगल की आग की सूचना कहाँ दें?
डीएफओ प्रदीप कुमार ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन या वन विभाग को दी जाए। जिलाधिकारी ने भी इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
वन पंचायतें आग नियंत्रण में कैसे सहयोग कर रही हैं?
स्थानीय वन पंचायतें अपने स्तर पर आग बुझाने में स्वेच्छा से सहयोग कर रही हैं। वन विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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