वाराणसी मुठभेड़ में टीएसपीसी कमांडर बृजेश गंझू ढेर, झारखंड में नक्सल आतंक का बड़ा चैप्टर बंद
सारांश
मुख्य बातें
यूपी एटीएस के साथ वाराणसी में हुई मुठभेड़ में झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के शीर्ष कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह रविवार, 20 सितंबर 2026 की सुबह मारा गया। उस पर झारखंड सरकार का ₹25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का ₹5 लाख का इनाम घोषित था। उसकी मौत के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब टीएसपीसी के बचे हुए नेटवर्क और उसके अगले संभावित कमांडर पर टिक गई है।
मुठभेड़ और बृजेश गंझू का आपराधिक इतिहास
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) के साथ वाराणसी में हुई इस मुठभेड़ में बृजेश गंझू की मृत्यु हो गई। वह लंबे समय से झारखंड की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। एनआईए उसके खिलाफ टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों की सक्रिय जांच कर रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, टीएसपीसी से जुड़े मामलों में कोयला कारोबार, परिवहन और ठेकेदारी से संबद्ध लोगों से लेवी वसूली के आरोप बार-बार सामने आते रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में टीएसपीसी कमांडरों की उपस्थिति पहले भी सामने आ चुकी है। वर्ष 2025 में पलामू में सुरक्षाबलों से बच निकले टीएसपीसी कमांडर नगीना को वाराणसी में ही गिरफ्तार किया गया था, जिसकी पूछताछ में संगठन की उत्तर प्रदेश में आवाजाही और नेटवर्क के बारे में अहम जानकारियाँ सामने आई थीं।
अब टीएसपीसी का नेतृत्व किसके हाथ?
बृजेश गंझू के बाद पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव निवासी शशिकांत गंझू का नाम संगठन के अगले सबसे सक्रिय कमांडर के रूप में उभर रहा है। झारखंड सरकार ने उस पर ₹10 लाख का इनाम घोषित कर रखा है और वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पलामू, चतरा, लातेहार, गढ़वा और हजारीबाग समेत कई जिलों में उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। केदल और आसपास का इलाका उसका पुराना प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। हाल ही में जेल से रिहा टीएसपीसी से जुड़े नथुनी सिंह के उसके संपर्क में आने की बात भी सामने आई है।
शशिकांत: बार-बार बचता रहा सुरक्षाबलों से
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद से शशिकांत कई मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों को चकमा देता रहा है। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में हुई एक मुठभेड़ में भी वह बच निकला था, जिसमें कथित तौर पर दो पुलिसकर्मियों के शहीद होने की बात सामने आई थी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह हमेशा हथियारों से लैस रहता है और लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता है। पुलिस की पूर्व जांच में शशिकांत के अंधविश्वास से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख आया था, जो उसकी मनोवृत्ति और रणनीति को समझने में एजेंसियों के लिए एक अतिरिक्त जानकारी है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब क्या चुनौतियाँ
बृजेश गंझू की मौत के बाद झारखंड पुलिस, एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ अब संगठन के वित्तीय स्रोतों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सक्रिय सदस्यों की पहचान में जुटी हैं। टीएसपीसी के बचे हुए कैडर को एकजुट रखने और पुराने नेटवर्क को बनाए रखने की चुनौती भी संगठन के सामने है।
यह ऐसे समय में आया है जब टीएसपीसी के कई शीर्ष कमांडर पहले ही या तो गिरफ्तार हो चुके हैं या मुठभेड़ों में मारे गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए असली परीक्षा अब शशिकांत गंझू तक पहुँचना और संगठन की लेवी एवं टेरर फंडिंग की जड़ों को उखाड़ना है। यदि शशिकांत को जल्द नहीं पकड़ा गया तो वह बिखरे कैडर को पुनर्गठित करने की कोशिश कर सकता है।