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वसुंधरा कोमकली: जमशेदपुर से हिंदुस्तानी संगीत की शिखर तक, पद्म श्री से सम्मानित 'वसुंधरा ताई' की अविस्मरणीय यात्रा

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वसुंधरा कोमकली: जमशेदपुर से हिंदुस्तानी संगीत की शिखर तक, पद्म श्री से सम्मानित 'वसुंधरा ताई' की अविस्मरणीय यात्रा

सारांश

जमशेदपुर में जन्मी, कोलकाता में तराशी गई और मुंबई-देवास में परिपक्व हुई — वसुंधरा ताई की यात्रा महज एक गायिका की कहानी नहीं, बल्कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक स्त्री की अपनी स्वतंत्र आवाज़ खोजने की साधना है। पद्म श्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित उनकी विरासत बेटी कलापिनी कोमकली आगे बढ़ा रही हैं।

मुख्य बातें

वसुंधरा कोमकली का जन्म 23 मई 1931 को जमशेदपुर, झारखंड में हुआ था।
मात्र 12 वर्ष की आयु में कोलकाता में कुमार गंधर्व को सुनकर शास्त्रीय संगीत सीखने का संकल्प लिया।
1946 में मुंबई आकर प्रोफेसर बी.आर.
देवधर और बाद में कुमार गंधर्व से संगीत की शिक्षा ली; 1962 में विवाह।
भारत सरकार ने 2006 में उन्हें पद्म श्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।
29 जुलाई 2015 को देवास, मध्य प्रदेश में कार्डियक अरेस्ट से निधन।
उनकी पुत्री कलापिनी कोमकली हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।

वसुंधरा कोमकली, जिन्हें स्नेह से 'वसुंधरा ताई' पुकारा जाता था, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की उन विरल हस्तियों में से थीं जिन्होंने अपनी साधना, समर्पण और सुरों की गहरी पकड़ से एक स्वतंत्र कलात्मक पहचान गढ़ी। 23 मई 1931 को झारखंड के जमशेदपुर में जन्मी वसुंधरा ताई का 29 जुलाई 2015 को मध्य प्रदेश के देवास में निधन हुआ — लेकिन उनकी संगीत विरासत आज भी जीवित है।

बचपन की ललक और संगीत की पहली किरण

वसुंधरा ताई ने बेहद कम उम्र में ही संगीत की राह पकड़ ली थी। जब वह महज 12 वर्ष की थीं, तब कोलकाता में आयोजित एक संगीत सम्मेलन में उन्होंने पहली बार प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व को सुना। उनकी गायकी का प्रभाव इतना गहरा था कि वसुंधरा ताई ने उसी क्षण शास्त्रीय संगीत को अपना जीवन-लक्ष्य बना लिया। हालाँकि तत्कालीन परिस्थितियों ने उनके सपने को तत्काल पूरा होने से रोका, लेकिन उनका संकल्प अडिग रहा।

कोलकाता से मुंबई तक: साधना का सफर

मुंबई जाकर सीखने का सपना उस वक्त पूरा न हो सका, तो वसुंधरा ताई ने कोलकाता में रहते हुए अपनी संगीत साधना जारी रखी। कम उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो से जुड़कर श्रोताओं के बीच अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। उनकी आवाज़ की मिठास और सुरों पर असाधारण पकड़ ने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच धीरे-धीरे एक जाना-पहचाना नाम बना दिया।

1946 में वसुंधरा ताई मुंबई पहुँचीं और वहाँ प्रसिद्ध संगीतज्ञ प्रोफेसर बी.आर. देवधर से संगीत की विधिवत शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने कुमार गंधर्व से भी शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ सीखीं। वर्षों की साझा साधना और कलात्मक संगति के बाद 1962 में दोनों विवाह-बंधन में बँध गए।

स्वतंत्र कलाकार की पहचान

वसुंधरा ताई को प्रायः कुमार गंधर्व की जीवनसंगिनी के रूप में याद किया जाता है, किंतु उनकी अपनी कलात्मक उपस्थिति उतनी ही सशक्त थी। शुरुआत में वह मंच पर तानपुरा संभालती थीं और सुरों में साथ देती थीं, परंतु उनकी प्रतिभा ने उन्हें शीघ्र ही एक स्वतंत्र और समादृत कलाकार के रूप में स्थापित कर दिया। उन्होंने ख्याल गायकी के साथ-साथ भजन, लोकगीत और पारंपरिक संगीत को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया — परंपरा और प्रयोग का एक दुर्लभ संगम।

सम्मान और विरासत

भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने 2006 में उन्हें प्रतिष्ठित पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाज़ा गया — जो भारत के शास्त्रीय प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मानों में से एक है।

29 जुलाई 2015 को देवास स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के कारण वसुंधरा कोमकली का निधन हो गया। उनकी पुत्री कलापिनी कोमकली आज हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक प्रतिष्ठित गायिका हैं और इस परिवार की संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं — वसुंधरा ताई की सबसे जीवंत विरासत।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि एक स्वतंत्र पद्म श्री विजेता के रूप में। ऑल इंडिया रेडियो से शुरू हुई उनकी यात्रा यह भी याद दिलाती है कि सार्वजनिक प्रसारण ने दशकों तक शास्त्रीय संगीत की महिला कलाकारों को वह मंच दिया जो निजी आयोजनों में दुर्लभ था। कलापिनी कोमकली की सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि यह विरासत केवल स्मृति नहीं, एक जीवंत परंपरा बनी रहे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसुंधरा कोमकली कौन थीं?
वसुंधरा कोमकली, जिन्हें 'वसुंधरा ताई' कहा जाता था, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित गायिका थीं। 23 मई 1931 को जमशेदपुर में जन्मी वसुंधरा ताई ने ख्याल, भजन और लोकगीत को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया और 2006 में पद्म श्री से सम्मानित हुईं।
वसुंधरा ताई का कुमार गंधर्व से क्या संबंध था?
वसुंधरा ताई ने कुमार गंधर्व से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और 1962 में उनसे विवाह किया। वह न केवल उनकी जीवनसंगिनी थीं, बल्कि एक स्वतंत्र और समादृत कलाकार भी थीं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
वसुंधरा कोमकली को कौन-से पुरस्कार मिले?
भारत सरकार ने 2006 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ, जो भारत के शास्त्रीय प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मानों में से एक है।
वसुंधरा ताई का निधन कब और कैसे हुआ?
29 जुलाई 2015 को मध्य प्रदेश के देवास स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के कारण वसुंधरा कोमकली का निधन हुआ। वह 84 वर्ष की थीं।
वसुंधरा ताई की संगीत विरासत आगे कौन बढ़ा रहा है?
उनकी पुत्री कलापिनी कोमकली हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक प्रतिष्ठित गायिका हैं और परिवार की संगीत परंपरा को आगे ले जा रही हैं। वसुंधरा ताई की गायकी की शैली और साधना का प्रभाव कलापिनी के संगीत में स्पष्ट रूप से दिखता है।
राष्ट्र प्रेस
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