वीणा जॉर्ज हमला मामला: गनमैन का SIT को बड़ा खुलासा — हमला होते नहीं देखा, मंत्री के कहने पर दिया था बयान
सारांश
मुख्य बातें
केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज पर कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुए कथित हमले का मामला 20 अक्टूबर 2026 को एक नाटकीय मोड़ पर आ गया, जब उनके गनमैन ने विशेष जांच दल (SIT) के सामने स्वीकार किया कि उसने केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) के कार्यकर्ताओं को वीणा पर हमला करते हुए नहीं देखा था। यह खुलासा उस मामले की बुनियाद को हिला देता है, जिसके आधार पर कई KSU कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास सहित गंभीर आरोप लगाए गए थे।
गनमैन अभिलाष का SIT के सामने बयान
गनमैन अभिलाष ने SIT को बताया कि उसने रेलवे पुलिस को जो बयान दिया था, वह तत्कालीन मंत्री वीणा जॉर्ज के निर्देश पर दिया गया था। उसने स्पष्ट किया कि उसने KSU कार्यकर्ताओं को वीणा जॉर्ज पर हमला करते प्रत्यक्षदर्शी के रूप में नहीं देखा था। इसी बयान के आधार पर अभियोजन पक्ष ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के विरुद्ध मजबूत आरोप खड़े किए थे।
यह खुलासा घटना के कई महीनों बाद हुआ है। गिरफ्तार KSU कार्यकर्ताओं को जमानत मिलने से पहले जेल में समय बिताना पड़ा था — एक तथ्य जो इस नए घटनाक्रम को और अधिक गंभीर बनाता है।
कन्नूर घटना की पृष्ठभूमि
यह घटना इस वर्ष की शुरुआत में पिनाराई विजयन सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दौर में घटी थी। वीणा जॉर्ज ने दावा किया था कि कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना में वे घायल हुई थीं। हालांकि, उन्हें घटना के महज दो दिन के भीतर ही कन्नूर के पास एक सरकारी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे सड़क मार्ग से यात्रा करने में सक्षम थीं।
उस समय भी घटना की परिस्थितियों और मामले को संभालने के तरीके पर सवाल उठे थे। अब गनमैन के बयान ने उन संदेहों को और बल दे दिया है।
वीणा जॉर्ज का राजनीतिक सफर और गिरावट
वीणा जॉर्ज का राजनीतिक उदय असाधारण रूप से तेज़ रहा। 2016 में, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उन्हें एक टेलीविज़न न्यूज़रूम से चुनकर अरनमुला सीट से सीपीआई (एम) का उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपना पहला चुनाव जीता और 2021 में भी सीट बरकरार रखी।
इसके बाद विजयन ने कई अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी। हालांकि, कार्यकाल के अंतिम चरण में उनके कामकाज को लेकर विवाद गहराए। कन्नूर की कथित हमले की घटना ने उनकी सार्वजनिक छवि को और नुकसान पहुँचाया।
हाल के विधानसभा चुनावों में वे अरनमुला से लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने में असफल रहीं। वर्तमान में वे सीपीआई (एम) राज्य समिति में एक आमंत्रित सदस्य बनी हुई हैं, लेकिन उनका राजनीतिक कद काफी घट चुका है।
SIT जांच और आगे की कानूनी राह
SIT की जांच अभी जारी है। गनमैन के इस ताजा बयान से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या KSU कार्यकर्ताओं पर लगाए गए गंभीर आरोप — विशेष रूप से हत्या के प्रयास का — टिकाऊ आधार पर खड़े हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने अपने पूर्व बयान से पलटकर इसे दबाव में दिया गया बताया है, तो अभियोजन पक्ष के सामने गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी।
गौरतलब है कि यह केरल में पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक हमले के आरोप जांच के दौरान विवादास्पद साबित हुए हों। यह मामला आने वाले समय में केरल की राजनीति में एक अहम कसौटी बन सकता है।